अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फैजाबाद जिला अदालत में एक विशाल आरोप पत्र दाखिल किया है। 73 हजार 480 पन्नों की इस विस्तृत चार्जशीट में मंदिर के भीतर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान को चुराने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई से चोरी के इस पूरे नेक्सस की परतें खुल गई हैं और आरोपियों के खिलाफ कई पुख्ता सबूत अदालत के सामने रखे गए हैं।
सीसीटीवी फुटेज और मुख्य आरोपी का खुलासा
जांच के दौरान पुलिस को मंदिर के भीतर लगे कैमरों से चोरी की कई हैरान करने वाली गतिविधियां मिलीं। चार्जशीट के अनुसार, मंदिर के काउंटिंग रूम और अन्य जगहों पर चढ़ावे की चोरी से जुड़ी कुल 105 घटनाएं सीसीटीवी कैमरों में दर्ज पाई गईं। इनमें से अकेले अविनाश शुक्ला उर्फ सनी की मुख्य भूमिका इस बात की ओर इशारा करती है कि यह खेल कितने समय से और कितने बेखौफ तरीके से चल रहा था, क्योंकि वह अकेले ही 85 बार पैसे निकालते हुए कैमरे पर पकड़ा गया। पुलिस ने इस मामले में कुल 8 आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए हैं और अदालत के समक्ष पेश किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए 173 गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। इस मामले में मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी गवाह बनाया गया है, जिससे सरकारी पक्ष का केस और मजबूत हो गया है।
ऐसे हुआ था इस बड़े घोटाले का भंडाफोड़
राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी का यह सनसनीखेज मामला सबसे पहले 4 जून 2026 को प्रकाश में आया था। उस दिन मंदिर के काउंटिंग रूम में पैसे गिनने का काम चल रहा था, तभी वहां तैनात एक सजग कर्मचारी आनंद चौधरी को अपने ही साथियों की हरकतों पर शक हुआ। उन्होंने चुपचाप अपने मोबाइल से उन कर्मचारियों का वीडियो बना लिया जो नोटों की गड्डियों को अपनी पैंट और कमर के कपड़ों में छिपा रहे थे। इस गंभीर धोखे को देखते हुए उन्होंने तुरंत यह वीडियो तत्कालीन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को भेज दिया।
डिजिटल सबूतों और छानबीन से खुला राज
जिस दिन यह वारदात हुई यानी 4 जून को चंपत राय अयोध्या में मौजूद नहीं थे। अगले दिन यानी 5 जून को अयोध्या लौटने पर चंपत राय ने अनिल मिश्रा, गोपाल राव और डॉ. नरेंद्र के साथ मिलकर सुरक्षा कैमरों के फुटेज खंगाले। इसके बाद पुलिस ने सभी संदिग्धों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए, जिससे कई अहम डिलीट किए गए चैट और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड बरामद हुए। यह डिजिटल डेटा, बैंक खातों में अचानक जमा की गई बड़ी रकम और चोरी के पैसे से खरीदी गई जमीनों के कागजात ही इस 73,480 पन्नों की विशाल चार्जशीट का मुख्य आधार बने हैं।
आरोपियों की जमानत अर्जी कोर्ट से खारिज
इस मामले में कानूनी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ रही है। हाल ही में इस चोरी कांड के तीन मुख्य आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे की जमानत याचिका अदालत द्वारा खारिज कर दी गई थी। आरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह ने बताया था कि इन तीनों की जमानत अर्जी पर 22 सितंबर को अदालत में लंबी बहस हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उनकी जमानत याचिकाओं को नामंजूर कर दिया। इसके बाद आरोपियों के पक्ष ने अपनी जमानत के लिए अब उच्च न्यायालय का रुख करने का फैसला किया है।



















