उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित शिक्षक-स्नातक सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और उसके बहुचर्चित पीडीए फॉर्मूले पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने विरोधी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस पीडीए की बात की जा रही थी, वह असल में परिवार के विकास और दूसरों के संसाधनों पर कब्जे तक सीमित रह गया है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती शासनकाल में भर्ती प्रक्रियाओं में हुई कथित गड़बड़ियों और हालिया राजनीतिक फैसलों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए।
राज्यसभा उम्मीदवारी और पीडीए नारे पर तीखा तंज
सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के पीडीए नारे की व्याख्या अपने तरीके से की। उन्होंने कहा कि पहले दिन से ही यह स्पष्ट था कि इनके लिए पीडीए का असली अर्थ परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी या फिर पराया धन अपना है। उन्होंने हालिया राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि टिकट वितरण के समय यह सामाजिक न्याय का दावा कहां गायब हो गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी ने राज्यसभा के लिए दो उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, जिसमें से एक सीट अपने चाचा को दे दी गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि प्रतिनिधित्व ही देना था तो काशी, गाजीपुर या बलिया के किसी स्थानीय यादव नेता को अवसर दिया जा सकता था। इसके अतिरिक्त दूसरी सीट पर किसी दलित चेहरे को या फिर अपने पारंपरिक मतदाता वर्ग के किसी मुस्लिम नेता को मौका दिया जा सकता था। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी उम्मीदवारी मुंबई के एक धन्नासेठ को सौंप दी गई, जिससे परिवार के लाभ और धन जुटाने की मंशा पूरी तरह उजागर हो गई।
भर्ती आयोग और पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल
मुख्यमंत्री ने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान राज्य भर्ती आयोगों की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन का अध्यक्ष अनिल यादव को बनाया गया था, जो इस संवैधानिक पद के योग्य ही नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस प्रशासनिक व्यवस्था में भारी अनियमितताएं हुईं और ऐसे अभ्यर्थी को राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शीर्ष स्थान दिला दिया गया, जिसके हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और बीए में केवल थर्ड डिवीजन अंक आए थे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उस समय प्रदेश में भारी प्रशासनिक अराजकता और गुंडागर्दी का माहौल था, जिसने लाखों योग्य युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। उन्होंने तत्कालीन व्यवस्था पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस शासन के दौरान हर ओर उपद्रव, दंगे और माफिया गिरोहों का वर्चस्व बना हुआ था, जिससे राज्य की प्रशासनिक विश्वसनीयता पूरी तरह नष्ट हो गई थी।
सैफई सिंडिकेट और चाचा-भतीजा पर गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय रोजगार के अवसरों पर केवल एक खास सिंडिकेट का नियंत्रण था। उन्होंने कहा कि उस शासन में युवाओं की गंभीर दुर्गति हुई क्योंकि व्यवस्था में विकास की कोई गति ही मौजूद नहीं थी। जब किसी व्यवस्था में आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति नहीं होती, तो वहां केवल अव्यवस्था ही जन्म लेती है।
उन्होंने कहा कि उस कालखंड में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर एक ही परिवार के करीबी लोगों को बैठाया गया था। उनके अनुसार, पहले अपने कुनबे के जरिए पदों की अधिसूचना निकाली जाती थी और फिर चाचा और भतीजे की जोड़ी वित्तीय वसूली के लिए सक्रिय हो जाती थी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उस दौर में सैफई सिंडिकेट के दायरे से बाहर के किसी भी सामान्य या प्रतिभाशाली युवा को योग्यता के आधार पर नौकरी नहीं मिल पाती थी।
नौ साल में साढ़े नौ लाख नौकरियां और आगामी लक्ष्य
वर्तमान सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा पेश करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन व्यवस्था के तहत पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश के साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भर्ती की प्रक्रियाएं अब पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित हैं।
समारोह के दौरान नियुक्ति पत्र वितरण के संबंध में पूछे गए सवाल का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा प्रशासनिक लक्ष्य साझा किया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले छह महीनों के भीतर राज्य सरकार एक लाख और युवाओं को विभिन्न विभागों में निष्पक्ष रूप से सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र वितरित करने जा रही है।




















