माता-पिता का साया छिन जाने के बाद संकट से जूझ रहे बच्चों की पढ़ाई और परवरिश को निरंतर बनाए रखने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार एक विशेष कल्याणकारी कार्यक्रम चला रही है। इस पहल के अंतर्गत आजमगढ़ जिले में लगभग 400 जरूरतमंद बच्चों को नियमित आर्थिक संबल उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि संसाधनों के अभाव में उनका शैक्षणिक सफर अधूरा न रहे। जिला प्रोबेशन विभाग के जरिए लागू की जा रही यह व्यवस्था संकटग्रस्त परिवारों के बच्चों के दैनिक खर्चों और स्कूल की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है।
प्रति परिवार अधिकतम दो बच्चों को सहायता राशि
जिला प्रोबेशन अधिकारी सुबोध कुमार सिंह के अनुसार, इस योजना का प्रमुख लक्ष्य उन किशोरों और बच्चों की हिफाजत करना है जिनके माता या पिता की मृत्यु महामारी के कठिन दौर में हो गई थी। निर्धारित नियमों के तहत किसी भी एक परिवार से ज्यादा से ज्यादा दो बच्चों को इस वित्तीय मदद के दायरे में शामिल किया जा सकता है। अहर्ता पूरी करने वाले हर बच्चे को हर माह 2500 रुपये की निश्चित रकम प्रदान की जाती है। इस तय सहायता राशि की मदद से बच्चों की मासिक स्कूल फीस, अध्ययन सामग्री, ड्रेस और अन्य जरूरी आवश्यकताओं का प्रबंध बिना किसी वित्तीय रुकावट के संभव हो पाता है।
डिजिटल माध्यम से घर बैठे करें पंजीकरण
इस कल्याणकारी कार्यक्रम का लाभ उठाने के लिए पूरी प्रणाली को पारदर्शी और ऑनलाइन रखा गया है, जिससे अभिभावकों या संरक्षकों को सरकारी दफ्तरों की दौड़-भाग न करनी पड़े। इच्छुक व्यक्ति अपने निवास स्थान से सीधे अथवा किसी नजदीकी जनसेवा केंद्र पर जाकर आधिकारिक वेब पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण पूरा कर सकते हैं। अधिकृत वेबसाइट mbsyup.in पर संबंधित विकल्प का चयन करके मांगी गई व्यक्तिगत और पारिवारिक जानकारियां दर्ज कर डिजिटल फॉर्म आसानी से जमा किया जा सकता है।
आवेदन के लिए अनिवार्य कागजी औपचारिकताएं
डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान आवेदकों को कई महत्वपूर्ण अभिलेख स्कैन करके अपलोड करने पड़ते हैं। इनमें माता-पिता का आधार कार्ड, आय से संबंधित प्रमाण पत्र, डिजिटल रूप से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र और संपर्क हेतु एक सक्रिय मोबाइल नंबर शामिल है। इसके अतिरिक्त आश्रित बच्चे का आधार कार्ड, प्राधिकृत स्तर से तैयार जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल का यू-डायस (UDISE) कोड दर्शाने वाला अध्ययन प्रमाण पत्र तथा बच्चे के बैंक खाते की पासबुक की प्रति भी अनिवार्य की गई है। फॉर्म के साथ वर्तमान संरक्षक के साथ बच्चे का एक संयुक्त फोटोग्राफ लगाना भी आवश्यक है।
सत्यापन प्रक्रिया और मासिक भुगतान का समय
पोर्टल पर डिजिटल फॉर्म जमा होने के उपरांत पूरी पत्रावली को परीक्षण के लिए ब्लॉक कार्यालय प्रेषित किया जाता है। ब्लॉक के प्रशासनिक कर्मचारी मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करते हैं और सभी कागजातों की प्रामाणिकता परखते हैं। क्षेत्रीय स्तर से संतुष्टि रिपोर्ट मुख्यालय को भेजे जाने के बाद सीधे बैंक खाते में सहायता राशि हस्तांतरित करने की कार्रवाई शुरू होती है। आवेदन जमा करने और जमीनी जांच मुकम्मल होने के करीब एक महीने के भीतर चयनित बच्चों के खाते में नियमित मासिक आर्थिक सहायता आनी शुरू हो जाती है। किसी भी प्रकार की तकनीकी अड़चन अथवा संशय की स्थिति में आवेदक सीधे जिला प्रोबेशन कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर सकते हैं।
























