गौतम बुद्ध नगर जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने एक व्यापक जांच अभियान चलाया है। नोएडा और आसपास के इलाकों में हर रोज 3,300 से अधिक स्कूल बसें हजारों छात्रों को घर से स्कूल और वापस पहुंचाने का काम करती हैं। हालांकि, परिवहन विभाग की हालिया पड़ताल में यह बात सामने आई है कि विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की 70 से अधिक बसें सड़क सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर रही हैं। इनमें से 51 बसें अनफिट पाई गई हैं, जबकि 18 बसों का ट्रांसपोर्ट परमिट पूरी तरह समाप्त हो चुका है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एआरटीओ डॉ. उदित नारायण ने अभिभावकों से अपने बच्चों की दैनिक यात्रा पर कड़ा पहरा रखने का अनुरोध किया है।
जांच में हुआ 70 से ज्यादा खतरनाक बसों का खुलासा
गौतम बुद्ध नगर जिले में प्रतिदिन 3,000 से 3,300 से अधिक बसें स्कूली विद्यार्थियों के परिवहन के लिए सड़कों पर उतरती हैं। आमतौर पर माता-पिता यह मानकर चलते हैं कि जिस वाहन में उनका बच्चा सफर कर रहा है, वह पूरी तरह सुरक्षित और कानूनी रूप से वैध है। स्कूल प्रशासन या क्लास टीचर भी कभी पेरेंट्स को यह जानकारी नहीं देते कि बस की यांत्रिक स्थिति कैसी है या उसका परमिट वैध है या नहीं। आरटीओ और एआरटीओ कार्यालय द्वारा की गई जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ कि 51 बसें बिना वैध फिटनेस प्रमाण पत्र के छात्रों को ढो रही थीं। इसके अतिरिक्त 18 अन्य बसें ऐसी पाई गईं, जिनका व्यावसायिक परमिट समय सीमा बीत जाने के बाद भी नवीनीकृत नहीं कराया गया था। इन 70 से अधिक अनफिट और बिना परमिट वाली बसों का संचालन बच्चों की जान को सीधे जोखिम में डालता है।
एआरटीओ डॉ. उदित नारायण ने अभिभावकों से की खास अपील
इस खतरनाक लापरवाही को ध्यान में रखते हुए एआरटीओ डॉ. उदित नारायण ने जिले के सभी अभिभावकों के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि माता-पिता को केवल स्कूल प्रशासन पर निर्भर रहने के बजाय खुद अपने बच्चों से रोज बस यात्रा का फीडबैक लेना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों को रोजाना कुछ प्रमुख बिंदुओं पर बच्चों से बातचीत करनी चाहिए
- असामान्य ठहराव: क्या बस चालक रास्ते में बच्चों को लाते या ले जाते समय किसी संदिग्ध, सुनसान या वीरान स्थान पर वाहन रोकता है?
- तकनीकी गड़बड़ी: क्या यात्रा के दौरान बस बीच रास्ते में बार-बार बंद होती है या उसमें कोई यांत्रिक खराबी आती है?
- अवांछित स्थानों पर रोकना: क्या बस ड्राइवर रास्ते में किसी शराब के ठेके, दुकान या अनधिकृत स्थान के पास वाहन खड़ा करता है?
- रैश ड्राइविंग: क्या ड्राइवर बस को ओवर स्पीड में चलाता है या यातायात नियमों की अनदेखी करता है?
परिवहन अधिकारियों का मानना है कि यदि अभिभावक इन विषयों पर अपने बच्चों से नियमित रूप से पूछेंगे, तो किसी भी सुरक्षा जोखिम का समय रहते पता लगाया जा सकेगा और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
लापरवाह स्कूल प्रशासनों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
परिवहन विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अनफिट और बिना परमिट वाली बसें चलाने वाले सभी संबंधित स्कूल संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। नोटिस के जरिए स्कूल प्रशासन को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे तत्काल प्रभाव से इन 51 बसों की यांत्रिक कमियां दूर कराकर फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त करें। इसके साथ ही, जिन 18 बसों का परमिट समाप्त हो चुका है, उन्हें तुरंत छात्र परिवहन सेवा से बाहर किया जाए।
एआरटीओ कार्यालय ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूल प्रबंधन निर्धारित समय सीमा के भीतर इन निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उनके खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग न केवल इन वाहनों को जब्त करेगा, बल्कि संबंधित स्कूल प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू करेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के जीवन से खिलवाड़ करने की अनुमति किसी भी संस्थान को नहीं दी जाएगी।


















