उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के राजेंद्र नगर चौराहे के निकट एक बहुमंजिला आवासीय परिसर में पारिवारिक विवाद के चलते 42 वर्षीय महिला की जान चली गई। विजन अपार्टमेंट के एक फ्लैट में हुई इस घटना में मृतका की पहचान गीता भागचंदानी के रूप में की गई है। मामले में मृतक महिला के 17 वर्षीय नाबालिग बेटे पर हत्या का आरोप लगा है, जिसे सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके से ही अपनी हिरासत में ले लिया।
सर्जरी को लेकर उपजे विवाद के बाद हमला
पुलिस अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, गुरुवार को घर के भीतर जेंडर-अफ़र्मिंग सर्जरी यानी लिंग बदलने के चिकित्सीय विकल्प को लेकर बातचीत चल रही थी। नाबालिग लड़का काफी समय से एक महिला के तौर पर रह रहा था और अपनी पहचान को कानूनी व चिकित्सीय तौर पर बदलने के लिए सर्जरी कराने की इच्छा जाहिर कर रहा था। इसी मांग को लेकर परिवार में पिछले कुछ समय से लगातार तनाव और मतभेद की स्थिति बनी हुई थी।
प्रारंभिक छानबीन में यह बात सामने आई है कि घटना के वक्त मां अपने बेटे को सीधे सर्जरी कराने से रोक रही थी। वह उसे समझा रही थी कि किसी भी तरह के बड़े चिकित्सीय कदम से पहले उसे मनोवैज्ञानिक परामर्श और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए। इसी बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और आक्रोश में आकर नाबालिग ने घर में रखे लोहे के रिंच से अपनी मां के सिर पर हमला कर दिया। सिर में गहरी और जानलेवा चोट लगने के कारण महिला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
वारदात के बाद घर में ही मौजूद रहा आरोपी
घटना को अंजाम देने के बाद नाबालिग मौके से फरार नहीं हुआ, बल्कि उसने खुद ही इस पूरे मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना पाकर पुलिस बल अपार्टमेंट के फ्लैट में पहुंचा, जहां महिला का शव मिला और आरोपी किशोर वहीं बैठा हुआ पाया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे फौरन हिरासत में ले लिया। पुलिस के उच्चाधिकारियों के साथ फील्ड यूनिट और फोरेंसिक विशेषज्ञों ने मौके का जायजा लिया। जांच दल ने घटनास्थल से वारदात में इस्तेमाल किए गए लोहे के रिंच सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। मृतका के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया है।
जेंडर डिस्फोरिया की संभावना और मनोवैज्ञानिक जांच
नाका हिंडोला के SHO विवेक कुमार चौधरी ने बताया कि अब तक हुई जांच से यह संकेत मिलते हैं कि नाबालिग किशोर 'जेंडर डिस्फोरिया' से जूझ रहा हो सकता है। जेंडर डिस्फोरिया एक ऐसी मानसिक और भावनात्मक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपनी जैविक पहचान और लैंगिक प्राथमिकताओं के बीच भारी तनाव व बेचैनी महसूस करता है। पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मामले की अग्रिम विवेचना के दौरान किशोर की काउंसिलिंग मेडिकल प्रोफेशनल्स और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों की देखरेख में कराई जाएगी, ताकि उसकी मानसिक स्थिति और पूरे घटनाक्रम की कड़ी से कड़ी जोड़ी जा सके।



















