पूर्वांचल से दस्तक देगा मानसून, पर पूरे यूपी को अभी करना होगा इंतजार, IMD ने बताई देरी की असली वजहuttar-pradesh
2 घंटे पहले· 2

पूर्वांचल से दस्तक देगा मानसून, पर पूरे यूपी को अभी करना होगा इंतजार, IMD ने बताई देरी की असली वजह

उत्तर प्रदेश में मानसून अपने तय समय से 5 से 10 दिन पिछड़ गया है। IMD के मुताबिक एक से दो दिन में पूर्वी यूपी में इसकी एंट्री होगी, जबकि कई जिलों में तेज आंधी और बारिश का येलो अलर्ट जारी है।

तपती गर्मी और उमस से जूझ रहे उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए मौसम विभाग ने राहत भरी खबर सुनाई है, लेकिन साथ में एक पेच भी जोड़ दिया है। IMD का कहना है कि अगले एक से दो दिन के भीतर मानसून प्रदेश के पूर्वी हिस्से में दस्तक दे देगा, जिससे झुलसाने वाली गर्मी से कुछ राहत मिलेगी। खेतों में धान की बिजड़ी डालने के लिए आसमान की ओर ताक रहे किसानों को भी आने वाले हफ्ते में सुकून मिलने की उम्मीद है।

हालांकि असली चिंता की बात यह है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत के पूर्वी इलाके में अचानक सुस्त पड़ गया है। इसका सीधा असर यह होगा कि इस बार पूरे उत्तर प्रदेश को बारिश के लिए सामान्य से ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा।

कब और कहां से होगी एंट्री

आमतौर पर उत्तर प्रदेश में मानसून पहुंचने की औसत तारीख 18 जून मानी जाती है, और राजधानी लखनऊ तक यह परंपरागत रूप से 23 जून तक पहुंच जाता है। लेकिन साल 2026 में बदले मौसमी मिजाज ने गणित बिगाड़ दिया है। अनुमान है कि इस बार मानसून अपने तय समय से करीब 5 से 10 दिन देरी से आएगा।

मौसम वैज्ञानिकों का आकलन है कि अब मानसून 22 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी के रास्ते पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगा। इसके बाद यह धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अपनी चपेट में लेगा, और तभी पूरे राज्य में मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो पाएगा।

बीच रास्ते में क्यों थम गया मानसून

मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल मानसून की हवाएं बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में आकर ठहर गई हैं। मानसून अपनी सामान्य गति से 4 से 5 दिन पीछे चल रहा है। जून के मध्य में वायुमंडलीय बदलावों के चलते इसकी आगे की चाल अचानक रुक गई, जिसका नतीजा यह हुआ कि भारी बारिश से पहले पूरे प्रदेश में प्री-मानसून की उमस और गर्मी और बढ़ गई।

लखनऊ के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने इसकी वजह साफ की। उनके मुताबिक मानसून के थमने के पीछे हवा में नमी की कमी नहीं है, बल्कि ऊपरी वायुमंडल में हवा के पैटर्न में अचानक आया बदलाव असली कारण है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि मानसून का इस तरह बीच में सुस्त पड़ जाना कोई असामान्य घटना नहीं है। जैसे ही वायुमंडलीय हालात दोबारा अनुकूल होंगे, यह अपनी खोई हुई रफ्तार वापस पकड़ लेगा।

देश में अभी कहां तक पहुंचा मानसून

मंगलवार तक मानसून पश्चिम में दक्षिणी महाराष्ट्र, दक्षिण-पूर्व में ओडिशा के कुछ हिस्सों और पूर्व में पश्चिम बंगाल तथा बिहार के इलाकों तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका था। लेकिन इस देरी ने देश में बारिश की कमी, पानी के संकट और लगातार चढ़ते पारे को लेकर आशंकाएं गहरी कर दी हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह मजबूत होता अल नीनो प्रभाव भी बताया जा रहा है, जो प्रशांत महासागर की सतह के गर्म होने से जुड़ा है और भारत में कमजोर मानसून के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

पिछले सालों में कैसा रहा मानसून का मिजाज

उत्तर प्रदेश में मानसून का व्यवहार हर बार एक जैसा नहीं रहा। किसी साल यह अपने नियत समय पर पहुंचा, सबसे पहले राज्य के पूर्वी हिस्सों में घुसा और फिर आगे बढ़ते हुए बाकी क्षेत्रों को कवर कर लिया।

एक बार आगमन में थोड़ी देरी हुई और यह सामान्य 20 जून की जगह 25 जून को शुरू हुआ, लेकिन बाद में रफ्तार पकड़कर 30 जून तक पूरे राज्य में फैल गया, जो इसके सामान्य कवरेज की समय-सीमा से बिल्कुल मेल खाता था। एक मौके पर मानसून ने पड़ोसी राज्य बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश में कदम रखा और 24 जून को पूर्वी जिलों में दस्तक देने के बाद महज एक सप्ताह में पूरे राज्य को अपनी जद में ले लिया।

कुछ वर्षों में इसका आगमन लगभग सामान्य समय पर या उससे थोड़ा विलंब से हुआ, जब शुरुआती दौर में व्यापक प्री-मानसून बौछारें पड़ीं और फिर जून के अंतिम सप्ताह तक झमाझम बारिश का मुख्य दौर शुरू हो गया।

आंधी-तूफान और बारिश का येलो अलर्ट

भले ही मुख्य मानसून की एंट्री में देर हो रही हो, पर मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए तेज आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और हल्की बारिश का येलो अलर्ट जारी कर दिया है। विभाग के अनुसार आज प्रदेश के कई जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से और कुछ जगहों पर 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिन जिलों के लिए चेतावनी है उनमें महाराजगंज, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, कुशीनगर, गाजीपुर, चंदौली, मऊ, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर शामिल हैं। इनके अलावा नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और प्रयागराज में भी धूलभरी आंधी और प्री-मानसून बौछारों की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश में मानसून कब आएगा?
अनुमान है कि मानसून 22 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी के रास्ते पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगा और फिर धीरे-धीरे पश्चिमी हिस्से को कवर करेगा।
मानसून बीच रास्ते में क्यों रुक गया?
वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश के मुताबिक इसकी वजह हवा में नमी की कमी नहीं, बल्कि ऊपरी वायुमंडल में हवा के पैटर्न में अचानक आया बदलाव है।
इस बार मानसून कितनी देरी से आ रहा है?
मानसून अपने तय समय से करीब 5 से 10 दिन की देरी से आने की आशंका है और सामान्य रफ्तार से 4 से 5 दिन पीछे चल रहा है।
किन जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट है?
महाराजगंज, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, कुशीनगर, गाजीपुर, चंदौली, मऊ, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर समेत नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और प्रयागराज के लिए येलो अलर्ट है।
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