उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की राजनीतिक तैयारियों को गति देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के विशेष सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने विपक्षी खेमे पर जोरदार राजनीतिक प्रहार किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाए जाने वाले वोट चोरी के आरोपों पर सीधी आपत्ति जताई। शाह ने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें राजनीतिक साहस है तो वे संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग करें, जहां सत्तारूढ़ दल हर सवाल का सिलसिलेवार उत्तर देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी पराजय का सामना करने के बाद विपक्षी दल जनादेश को स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर दोष मढ़ने का प्रयास करते हैं।
हार के बाद आत्ममंथन करने के बजाय अंपायर पर बेईमानी का आरोप
विपक्षी गठबंधन की कार्यशैली और बयानों की तुलना खेल के मैदान की परिस्थितियों से करते हुए अमित शाह ने कहा कि खेल में जब कोई टीम मुकाबला हारती है तो वह अपनी कमियों का विश्लेषण करती है, आत्ममंथन का रास्ता चुनती है और अगली बार बेहतर प्रदर्शन के लिए मैदान पर कठिन अभ्यास करती है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत राहुल गांधी और अखिलेश यादव का रवैया बिल्कुल अलग दिखता है, क्योंकि वे हारने के बाद अंपायर पर ही बेईमानी का आरोप लगाने लगते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि संसद में जब भी सार्थक परिचर्चा का समय आता है, तब विपक्ष सिर्फ हंगामा खड़ा करता है और सदन के कामकाज को सुचारू रूप से चलने नहीं देता। समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए शाह ने कहा कि अखिलेश यादव इस बात को भलीभांति समझ लें कि उत्तर प्रदेश में अगले 30 साल तक उनकी पार्टी की सरकार सत्ता में वापस नहीं आने वाली है।
तीसरी बार जीत के बाद उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प
कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए गृह मंत्री ने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार अंगद के पैर की तरह मजबूती से जम चुकी है, जिसे विपक्ष किसी भी प्रयास से डिगा नहीं सकता। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेदों और गिले-शिकवों को गोमती नदी में बहाकर वर्ष 2027 के चुनाव की तैयारियों में जुटने का आग्रह किया। मंच से घोषणा करते हुए शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी की लगातार तीसरी बार सरकार बनते ही पूरे राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भाजपा अपने चुनावी और वैचारिक संकल्पों को हर हाल में धरातल पर उतारती है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करना और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा करना है।
योगी सरकार के विकास आंकड़े और 1990 के अयोध्या गोलीकांड का उल्लेख
संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासनिक कार्यों की सराहना करते हुए अमित शाह ने कहा कि सपा और बसपा के पूरे शासनकाल के कार्यों को एक साथ जोड़ दिया जाए, तब भी योगी सरकार का अकेला कार्यकाल उन पर भारी साबित होता है। उन्होंने बताया कि राज्य में कानून-व्यवस्था के सुदृढ़ होने से 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं। शाह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा के मौजूदा शासनकाल में राज्य के भीतर दंगों की घटनाओं में 70 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है और संगठित माफिया तंत्र को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर हुई पुलिस गोलीबारी का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक दलों ने निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, वे आज सत्ता में लौटने का दावा किस आधार पर कर रहे हैं, क्योंकि प्रदेश की जनता उस ऐतिहासिक घटना को कभी नहीं भुला सकती।
























