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उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में 6 सीटों पर भाजपा और 5 पर सपा की जीत, नतीजों पर बोले अखिलेश यादवउत्तर प्रदेश
30 अक्तू॰ 2026, 12:49 am (1 घंटे पहले)· 3

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में 6 सीटों पर भाजपा और 5 पर सपा की जीत, नतीजों पर बोले अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों के नतीजे घोषित हो गए हैं, जिनमें भाजपा को 6 और समाजवादी पार्टी को 5 सीटें मिली हैं। नतीजों के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे डबल इंजन की दोहरी हार बताया है।

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। इन 11 निर्वाचन क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में 5 सीटें आई हैं। आंकड़ों के लिहाज से भारतीय जनता पार्टी अपनी पिछली संख्या यानी 6 सीटों को बरकरार रखने में कामयाब रही है, वहीं समाजवादी पार्टी ने पिछली बार के मुकाबले 2 अतिरिक्त सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी स्थिति मजबूत की है। समाजवादी पार्टी को यह सीधा फायदा लखनऊ और वाराणसी जैसी अहम सीटों पर मिला है। इन दोनों प्रमुख राजनीतिक केंद्रों पर पार्टी प्रत्याशियों की कामयाबी के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने परिणामों को लेकर सत्ताधारी गठबंधन पर तीखा हमला बोला है।

सीटों का पूरा समीकरण और हार-जीत का ब्योरा

विधान परिषद की जिन 11 सीटों पर मतदान हुआ था, उनमें शिक्षक और स्नातक दोनों वर्ग शामिल थे। पिछले चुनाव में जहां 2 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई थीं, वहीं इस बार किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी को सफलता नहीं मिल सकी। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, जो पिछले चुनाव में एक निर्दलीय प्रत्याशी के पास था, उस पर इस बार भारतीय जनता पार्टी ने अपना परचम लहराया है। इसके विपरीत, लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट, जिस पर पिछली बार भारतीय जनता पार्टी का कब्जा था, वह इस बार समाजवादी पार्टी के खाते में चली गई। इसी तरह आगरा शिक्षक सीट पर भी इस बार निर्दलीय के स्थान पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने बाजी मारी है।

समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ी प्रतिष्ठा की लड़ाई वाराणसी में थी। पार्टी ने वाराणसी शिक्षक और वाराणसी स्नातक दोनों ही सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। यह दोनों सीटें पिछली बार भी समाजवादी पार्टी के पास ही थीं, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी की कड़ी घेराबंदी के बीच इन्हें बचा पाना पार्टी नेतृत्व के लिए विशेष तौर पर उत्साहवर्धक माना जा रहा है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी ने प्रयागराज-झांसी स्नातक सीट पर भी जीत हासिल की है।

सभी 11 सीटों के विजेता दलों की स्थिति

चुनाव आयोग द्वारा घोषित नतीजों के अनुसार 11 सीटों का अंतिम विवरण इस प्रकार रहा है

  • मेरठ शिक्षक सीट: इस निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिली है।
  • बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट: यहां भी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जीत दर्ज कराई है।
  • लखनऊ शिक्षक सीट: शिक्षक कोटे की इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हुआ है।
  • गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट: भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर जीत हासिल की है।
  • आगरा स्नातक सीट: स्नातक वर्ग की इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी विजयी रहे हैं।
  • मेरठ स्नातक सीट: मेरठ की स्नातक सीट पर भी भारतीय जनता पार्टी ने बाजी मारी है।
  • वाराणसी शिक्षक सीट: इस सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है।
  • वाराणसी स्नातक सीट: स्नातक कोटे की इस महत्वपूर्ण सीट पर समाजवादी पार्टी ने अपना कब्जा बरकरार रखा है।
  • आगरा शिक्षक सीट: इस बार शिक्षक कोटे की इस सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को कामयाबी मिली है।
  • लखनऊ स्नातक सीट: राजधानी की स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को हराकर कब्जा किया है।
  • प्रयागराज-झांसी स्नातक सीट: इस बड़े निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ने जीत का परचम लहराया है।

अखिलेश यादव का सत्तापक्ष पर तीखा हमला

नतीजों के औपचारिक ऐलान के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि मतदाताओं के फैसले ने भारतीय जनता पार्टी को एक फ्लॉप शो साबित कर दिया है। अखिलेश यादव ने विशेष तौर पर वाराणसी के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां पहले सामान्य मतगणना में पराजय हुई और फिर दोबारा हुई पुनर्मतगणना में भी हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने दो बार हुई मतगणना में मिली शिकस्त को रेखांकित करते हुए इसे डबल इंजन की दोहरी हार की संज्ञा दी। सपा प्रमुख ने कहा कि विधान परिषद चुनाव का यह परिणाम वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सीधी प्रस्तावना लिख चुका है।

अखिलेश यादव ने यह भी जोड़ा कि यह फैसला एक ओर भारतीय जनता पार्टी की शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थी विरोधी नीतियों की विफलता को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ शिक्षित बेरोजगार स्नातकों ने भी सत्ता के खिलाफ अपना स्पष्ट जनमत दर्ज कराया है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब सरकार की प्राथमिकताओं और नीतियों को पूरी तरह नकार चुकी है।

पीडीए के विस्तार और संगठनात्मक स्थिति पर दावे

सपा प्रमुख ने अपने राजनीतिक समीकरण 'पीडीए' यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समूह की चर्चा करते हुए कहा कि समाज के हर तबके को जिस प्रकार प्रताड़ित और उपेक्षित किया गया है, उससे सभी पीड़ित वर्ग एक मंच पर आ गए हैं। अखिलेश यादव के अनुसार अब पीडीए का सामाजिक आधार बढ़कर 95 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, क्योंकि जो भी पीड़ित है, वही इस समूह का स्वाभाविक हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल अब गंभीर अस्तित्व संकट का सामना कर रहा है और अंदरूनी कलह के कारण आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी तलाशना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि टिकट की खिड़की खाली है और पार्टी के संभावित उम्मीदवार मैदान में उतरने का हौसला खो रहे हैं।

मतदाताओं और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी उन शिक्षकों और युवाओं की विशेष रूप से आभारी है जिन्होंने न केवल मतदान किया, बल्कि मतगणना केंद्रों पर प्रमाण पत्र जारी होने तक डटकर निगरानी भी की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का कोई भी प्रत्याशी वास्तव में पराजित नहीं हुआ है, बल्कि वे प्रशासनिक गड़बड़ियों के सामने रुके हैं। उन्होंने बिना प्रमाण पत्र वाले ऐसे सभी प्रत्याशियों को भी नैतिक विजेता करार दिया और कहा कि यही एकजुटता 2027 के विधानसभा चुनाव में नई सरकार के गठन का आधार तैयार करेगी।

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सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कितनी सीटों पर चुनाव हुआ और परिणाम क्या रहा?
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा ने 6 और समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की।
समाजवादी पार्टी को पिछले चुनाव की तुलना में कितनी सीटों का फायदा हुआ?
समाजवादी पार्टी को पिछले चुनाव के मुकाबले 2 सीटों का शुद्ध फायदा हुआ है, जिसमें लखनऊ स्नातक और आगरा शिक्षक सीट शामिल हैं।
वाराणसी की शिक्षक और स्नातक सीटों पर किस पार्टी ने जीत हासिल की?
वाराणसी की दोनों महत्वपूर्ण सीटों, शिक्षक और स्नातक, पर समाजवादी पार्टी ने अपना कब्जा बरकरार रखते हुए जीत दर्ज की।
इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों का क्या प्रदर्शन रहा?
पिछले चुनाव में 2 सीटें जीतने वाले निर्दलीय उम्मीदवार इस बार एक भी सीट नहीं जीत सके और सभी सीटें भाजपा और सपा में बंट गईं।
अखिलेश यादव ने चुनावी नतीजों को क्या नाम दिया है?
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इन नतीजों को सत्ताधारी दल के लिए 'डबल इंजन की डबल हार' करार दिया है।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर किस दल का प्रत्याशी जीता?
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की, जो पिछली बार एक निर्दलीय के पास थी।
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टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·2 मिनट पहले

वाराणसी और लखनऊ में सपा की ये जीत क्या सच में ज़मीन पर बड़ा बदलाव दिखा रही है, या फिर ये महज़ स्थानीय समीकरणों का खेल है?

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 मिनट पहले

लखनऊ और वाराणसी में सपा का जीतना वाकई दिलचस्प है। विधान परिषद में समाजवादी पार्टी का इस तरह दो सीटें बढ़ाना साफ संकेत है कि जमीन पर चुनौती मजबूत हो रही है, खासकर तब जब बीजेपी ने अपनी पुरानी संख्या बरकरार रखी है।

Ravikash Gupta@ravikash·26 मिनट पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा। पिछली बार जब मैं लखनऊ गया था, तब भी ग्राउंड पर माहौल सपा के पक्ष में सुगबुगाहट दे रहा था।

Rohan Verma@rohan-verma·40 मिनट पहले

वाराणसी में दोनों सीटें बचा लेना सपा के लिए छोटी बात नहीं — वो भी तब जब भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी थी। पीएम का संसदीय क्षेत्र है, फिर भी सपा वहाँ टिकी रही। यह आँकड़ा लखनऊ की जीत से भी ज़्यादा ध्यान खींचता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 मिनट पहले

Rohan भाई, सही कह रहे हो — मैं 2022 में वाराणसी में था, भाजपा की वो मशीनरी देखी है ज़मीन पर। उसके बाद भी सपा का वहाँ टिके रहना हल्का नहीं है।

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