प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान अपने ही साथी को आतंकी धमकी देकर डराने की एक सनसनीखेज साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। खुद को लाहौर से जुड़ा बताकर और एक संगठन का नाम लेकर दिल्ली में बम धमाके के लिए चुने जाने की बात कहने वाले छात्र सूरज वर्मा को आखिरकार सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने दबोच लिया। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र द्वारा अपने परिचित को किए गए इस फोन कॉल के बाद राष्ट्रीय राजधानी से लेकर उत्तर प्रदेश तक सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई थीं। जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने आरोपी को कानपुर से हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया।
मुखर्जी नगर के छात्र को आया था संदिग्ध फोन
कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने मामले के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस की तरफ से एक बेहद गंभीर इनपुट साझा किया गया था। दिल्ली के जाने-माने कोचिंग हब मुखर्जी नगर में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्र रोहित को एक अज्ञात नंबर से धमकी भरा कॉल आया था। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को पाकिस्तान के लाहौर से बोलने वाला बताया था। उसने रोहित से सीधे तौर पर कहा कि ‘जन्नत-ए-फिरदौस’ नाम के संगठन की नजर उस पर काफी लंबे समय से बनी हुई थी। इसके बाद कॉलर ने दावा किया कि उसे देश की राजधानी दिल्ली में एक बड़े बम ब्लास्ट को अंजाम देने के लिए चुना गया है। यह सनसनीखेज बात कहने के तुरंत बाद कॉलर ने फोन काट दिया, जिससे छात्र बुरी तरह सहम गया और उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
इंटरनेट कॉलिंग और तकनीकी सर्विलांस से खुला राज
मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा और बम धमाके की धमकी शामिल होने के चलते पुलिस प्रशासन ने फौरन विशेष तकनीकी टीमों को काम पर लगा दिया। दिल्ली पुलिस की तकनीकी जांच में यह स्पष्ट हुआ कि धमकी देने के लिए जिस नंबर का इस्तेमाल हुआ था, वह एक जियो फाइबर कनेक्शन से जुड़ा हुआ था। आगे की डिजिटल पड़ताल में इस कनेक्शन का पता कानपुर के काकादेव इलाके के नवीन नगर का निकला। यह कनेक्शन मनोज कुमार वर्मा के नाम पर पंजीकृत था। इसके तुरंत बाद काकादेव थाने की सर्विलांस टीम हरकत में आई और मनोज कुमार वर्मा के पते पर छापेमारी की। वहां पुलिस टीम को मनोज का बेटा अक्षत वर्मा मिला, जो मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी कर रहा है।
रिश्तेदारी और बीमारी के सिलसिले में कानपुर आया था आरोपी
पुलिस टीम ने जब अक्षत वर्मा से कड़ाई से पूछताछ की, तो पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हो गईं। अक्षत ने बताया कि औरैया जिले के दिबियापुर का रहने वाला उसका चचेरा भाई सूरज वर्मा कुछ दिनों पहले उसके घर आया हुआ था। सूरज भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा हुआ है। पूछताछ में सामने आया कि सूरज की चाची कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और कानपुर के पारस हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है। इसी सिलसिले में उनकी देखभाल और अस्पताल के चक्कर लगाने के लिए सूरज औरैया से कानपुर आकर अपने चचेरे भाई के घर रुका हुआ था। इसी दौरान उसने घर में लगे इंटरनेट कनेक्शन के जरिए यह कॉल की थी।
प्रैंक का दावा और खुफिया एजेंसियों की पूछताछ
सारे सुराग मिलने के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए सूरज वर्मा को अपनी गिरफ्त में ले लिया। पुलिस की पूछताछ के दौरान सूरज ने बचाव में दावा किया कि उसने कोई वास्तविक साजिश नहीं रची थी, बल्कि अपने दोस्त रोहित को डराने और मजाक करने के मकसद से यह प्रैंक कॉल की थी। हालांकि राजधानी दिल्ली में बम धमाके और आतंकी संगठन के नाम पर दी गई धमकी को पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कतई हल्के में नहीं लिया। लोकल इंटेलिजेंस यूनिट ने भी आरोपी से घंटों तक गहन पूछताछ की। जांच पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी सूरज वर्मा को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब कॉल डेटा, इंटरनेट रिकॉर्ड और आरोपी की पृष्ठभूमि की गहन जांच कर रही है ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि इसके पीछे सिर्फ शरारत थी या कोई गहरी साजिश छुपी हुई थी।





















