नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग के 100 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर एक दो दिवसीय शताब्दी सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसमें संस्थान की एक सदी की यात्रा और भविष्य की प्राथमिकताओं पर गहन मंथन हुआ। इस सम्मेलन में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक सेवा आयोग के योगदान को रेखांकित करते हुए प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक युग की जरूरतों के अनुकूल ढालने पर बल दिया। अपने संबोधन में उन्होंने देश के बदलते शासन मॉडल, भर्ती प्रक्रिया की शुचिता और परीक्षाओं के समयबद्ध संचालन को लेकर कई अहम दिशा-निर्देश साझा किए।
साहस और धैर्य की मिसाल, कैप्टन स्मित मच्छार का विशेष उल्लेख
संबोधन के शुरुआती हिस्से में प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मित मच्छार के साहसिक कदम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से कैप्टन ने संकट के समय धैर्य, सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय दिया, वह हर भारतवासी को गर्व की अनुभूति कराता है। इस घटनाक्रम का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री ने भी उनके इस पराक्रम की सराहना करते हुए कहा था कि इस साहसी हिंदुस्तानी ने 9/11 जैसी भयानक त्रासदी होने से बचा लिया। ऐसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि भारतीय प्रतिभा संकट के समय किस दृढ़ता से निर्णय लेने में सक्षम है।
गैलरी में 1920 का इतिहास और सरदार वल्लभ भाई पटेल का योगदान
कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित ऐतिहासिक गैलरी का अवलोकन करने के बाद प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर की प्रशासनिक व्यवस्था को याद किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1920 में जब देश पर ब्रिटिश हुकूमत का शासन था, तब सुभाष चंद्र बोस भी इसी चयन प्रक्रिया से गुजरे थे। उस कठिन दौर में भी संस्कृत विषय का प्रश्नपत्र हुआ करता था और सुभाष बाबू ने संस्कृत में ही अपना पर्चा लिखा था, जो देश की समृद्ध विरासत और उस दौर की प्रतिभा की गहराई को दर्शाता है।
इसके साथ ही उन्होंने देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को श्रद्धापूर्वक नमन किया। आजादी के तुरंत बाद केवल देश की सीमाओं को सुरक्षित रखना ही चुनौती नहीं थी, बल्कि बिखरी हुई व्यवस्थाओं को जोड़कर एक संपूर्ण राष्ट्र को सुचारू रूप से संचालित करना भी अत्यंत कठिन कार्य था। सरदार पटेल ने राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक कौशल ढांचा तैयार किया और लोक सेवा आयोग को स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक रीढ़ बनाकर मजबूती प्रदान की।
नेशन फर्स्ट और सीटिजन फर्स्ट की कसौटी पर भर्ती
प्रधानमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों को याद दिलाया कि आज चयनित होने वाले युवा ही विकसित भारत के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले हैं और आने वाले समय में वे ही इस प्रगति के सबसे बड़े लाभार्थी भी होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक चयन प्रक्रिया को दो बुनियादी कसौटियों पर परखा जाना चाहिए, पहला नेशन फर्स्ट और दूसरा सीटिजन फर्स्ट। व्यवस्था में ऐसे नौजवानों का आना आवश्यक है जो किसी सरकारी दफ्तर के आकर्षण या रुतबे के बजाय वास्तविक जनसेवा के भाव से प्रेरित हों।
उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं का स्वरूप केवल यह जांचने तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि किसी अभ्यर्थी के पास ज्ञान की कितनी मात्रा है, बल्कि परीक्षा तंत्र को यह भी समझना होगा कि वह युवा सिविल सेवा के क्षेत्र में क्यों कदम रखना चाहता है। लोक सेवकों में नीतिगत नियमों के पालन के साथ-साथ यह परखने की क्षमता भी होनी चाहिए कि कोई विशेष नियम सामान्य जनजीवन के लिए कितना हितकारी सिद्ध हो रहा है।
माई-बाप सरकार के दौर से प्रो-एक्टिव सुशासन की ओर
प्रशासनिक मानसिकता में आए परिवर्तन की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने वह दौर भी देखा है जब सत्ता को ही जनता का माई-बाप समझा जाता था। हालांकि, इक्कीसवीं सदी का वर्तमान समय पूरी तरह से 'नागरिक देवो भव' के विचार पर आधारित है, जहां नागरिक की गरिमा और उसकी सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। आधुनिक भारत की कार्य संस्कृति अब प्रो-पीपल और प्रो-एक्टिव गुड गवर्नेंस के सिद्धांत पर मजबूती से आगे बढ़ रही है।
इसके लिए ऐसे कुशल अधिकारियों की दरकार है जिनके भीतर गरीब और वंचित तबके की पीड़ा को समझने की गहरी संवेदनशीलता हो। संकट के समय नवाचार के माध्यम से समाधान खोजने और देश की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देने वाले अधिकारी ही इस नए युग के संवाहक बन सकते हैं।
मिशन कर्मयोगी, कैपेसिटी बिल्डिंग और परीक्षा सुधार
प्रशासनिक तंत्र को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ने संघ लोक सेवा आयोग और राज्यों के लोक सेवा आयोगों की निरंतर क्षमता वृद्धि पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत विकसित किए गए आईगोट डिजिटल मंच का उपयोग आंतरिक कार्यप्रणाली और टीमों की दक्षता को निखारने के लिए व्यापक स्तर पर किया जा सकता है। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं युवा शक्ति से राष्ट्र शक्ति के निर्माण की आधारशिला हैं।
अंत में उन्होंने सुधारों की गति बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि जब समूचा देश रिफॉर्म एक्सप्रेस की गति से आगे बढ़ रहा है, तो भर्ती संस्थाओं को भी अपने नियमों को समय के अनुरूप अपडेट करना होगा। परीक्षा प्रक्रिया को केवल एक नियमित आयोजन न मानकर लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा संकल्प समझा जाना चाहिए। कैलेंडर में कुछ महीनों का विलंब भी युवाओं के करियर को प्रभावित कर सकता है, इसलिए पूरी परीक्षा प्रणाली को समय की निश्चितता के सिद्धांत का कड़ाई से पालन करना चाहिए।



















