उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर नागरिक पुलिस और समकक्ष पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। अदालत ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने की तैयारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह अहम निर्णय न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की एकल पीठ द्वारा श्याम सुंदर, कमलेश यादव व अन्य तथा यश पांडेय व 44 अन्य अभ्यर्थियों की ओर से पेश की गई अलग-अलग याचिकाओं पर प्रारंभिक विचार के बाद सुनाया गया है। मामले की अगली आधिकारिक सुनवाई 5 अक्टूबर के लिए तय की गई है।
भर्ती का विज्ञापन, परीक्षा और चयन के प्रमुख आंकड़े
इस सीधी भर्ती प्रक्रिया का आधिकारिक विज्ञापन 12 अगस्त 2025 को जारी किया गया था। इस भर्ती के तहत राज्य भर से कुल 15 लाख 75 हजार 7 सौ 6 अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन जमा किए थे। इसके बाद लिखित परीक्षा का आयोजन 14 और 15 मार्च को दो-दो पालियों में संपन्न कराया गया था, जिसमें वास्तविक रूप से 10 लाख 77 हजार उम्मीदवार सम्मिलित हुए थे।
लिखित परीक्षा का परिणाम 7 मई को घोषित किया गया था, जिसमें चयन प्रक्रिया के अगले चरण में शामिल होने के लिए 12733 अभ्यर्थियों को योग्य ठहराया गया था। इन सभी चरणों की समाप्ति के बाद भर्ती बोर्ड ने 14 जुलाई को अंतिम चयन परिणाम सार्वजनिक किया था। इसके पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सफल अभ्यर्थियों को औपचारिक नियुक्ति पत्र सौंपे जाने की व्यापक प्रशासनिक तैयारी की जा रही थी।
आंसर की में बदलाव और अभ्यर्थियों की आपत्तियां
अदालत में याचियों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता संजय कुमार यादव ने बताया कि भर्ती बोर्ड ने सबसे पहले 23 मार्च को अनंतिम उत्तर कुंजी जारी की थी। विवाद उस समय शुरू हुआ जब 7 मई को लिखित परीक्षा परिणाम के साथ अंतिम उत्तर कुंजी जारी की गई और उसमें कई सवालों के सही उत्तर बदल दिए गए। परीक्षा के मूल्यांकन नियमों के अनुसार प्रत्येक प्रश्न 2.5 अंक का निर्धारित था।
उत्तर में किए गए इस अचानक बदलाव से कई अभ्यर्थियों के कुल प्राप्तांक सीधे प्रभावित हुए और वे बेहद मामूली अंतर से चयन से वंचित रह गए। कई ऐसे अभ्यर्थी भी थे जिनका नाम लिखित परीक्षा के बाद अगले चरण की सूची में दर्ज था, परंतु 14 जुलाई को आए अंतिम परिणाम में वे एक या दो अंकों से बाहर हो गए। उम्मीदवारों ने संशोधित उत्तरों पर बोर्ड के समक्ष औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन भर्ती बोर्ड द्वारा इन आपत्तियों पर विचार नहीं किया गया। याचिकाओं की पैरवी के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, अधिवक्ता संजय कुमार यादव और आलोक मिश्र ने अदालत के समक्ष अभ्यर्थियों की दलीलें रखीं।





















