उत्तर प्रदेश के व्यस्ततम रेल गलियारों में शुमार मुरादाबाद रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले मार्गों पर यातायात को सुगम बनाने के लिए एक व्यापक योजना पर अमल शुरू हो गया है। लगातार बढ़ते यात्री दबाव और माल ढुलाई की बढ़ती मांग को संतुलित करने के लिए रेल प्रशासन ने आधारभूत ढांचे के विस्तार की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए न सिर्फ वर्तमान पटरियों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा, बल्कि आने वाले समय में अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन का रास्ता भी तैयार होगा।
क्षमता विस्तार और तीसरी-चौथी लाइन की मंजूरी
गाजियाबाद और सीतापुर के बीच स्थित रेल मार्ग रणनीतिक तथा व्यापारिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और व्यस्त माना जाता है। मुरादाबाद मंडल के सीनियर डीसीएम महेश यादव के अनुसार, मौजूदा समय में यह पूरा खंड डबल लाइन ट्रैक पर संचालित हो रहा है। अत्यधिक व्यस्तता के चलते यात्री गाड़ियों के साथ-साथ भारी संख्या में चलने वाली मालगाड़ियों के सुचारू संचालन में लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ट्रैक की क्षमता का वर्तमान में अधिकतम उपयोग हो रहा है, जिससे गाड़ियों की समयबद्धता और नई सेवाएं शुरू करने की गुंजाइश सीमित हो चुकी थी।
इसी परिचालन दबाव को समाप्त करने के लिए गाजियाबाद से सीतापुर तक तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की योजना तैयार की गई, जिसे कैबिनेट कमेटी से औपचारिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इन अतिरिक्त दो पटरियों के बिछ जाने से न केवल ट्रेनों की औसत गति में इजाफा होगा, बल्कि मालगाड़ियों और यात्री एक्सप्रेस गाड़ियों के लिए अलग से ट्रैक स्लॉट प्रबंधित करना भी संभव हो सकेगा।
14.5 हजार करोड़ रुपये का निवेश और बाईपास का प्रावधान
इस वृहद रेल विकास कार्य पर लगभग 14.5 हजार करोड़ रुपये का खर्च आने का आकलन किया गया है। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान नए ट्रैक को कई मौजूदा प्रमुख जंक्शनों और स्टेशनों से इंटरकनेक्ट किया जाएगा, जिससे गाड़ियों का डायवर्जन और परिचालन तालमेल सुगम बना रहे। निर्माण प्रक्रिया के दौरान सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती घनी आबादी वाले शहरी इलाकों से गुजरना है।
मार्ग में पड़ने वाले कई कस्बों और शहरों में वर्तमान पटरियों के आसपास घनी बस्तियां हैं, जहां पटरियों के चौड़ीकरण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे संवेदनशील और घने क्षेत्रों में नई तीसरी और चौथी लाइन को घनी आबादी से बाहर निकालकर बाईपास अथवा समानांतर नए रूट के रूप में तैयार करने की रूपरेखा बनाई गई है। इससे बिना किसी बड़े विस्थापन के रेल नेटवर्क को गति दी जा सकेगी।
चार नए स्टेशनों का विकास और यात्रियों को राहत
अतिरिक्त लाइनों के बिछाने के साथ ही इस पूरे रूट पर चार नए रेलवे स्टेशनों की स्थापना भी की जाएगी। प्रस्तावित योजना के तहत मुरादाबाद और हापुड़ के निकटवर्ती क्षेत्रों के अलावा दो अन्य चिन्हित स्थानों पर नए स्टेशन बनाए जाने का खाका तैयार किया गया है। इन नए स्टेशनों के अस्तित्व में आने से उपनगरीय और ग्रामीण इलाकों के लोगों को सीधी रेल कनेक्टिविटी सुलभ होगी।
इसके अलावा, वर्तमान में मुरादाबाद और हापुड़ जैसे बड़े स्टेशनों पर जुटने वाली भारी भीड़ को भी विकेंद्रीकृत करने में सहायता मिलेगी। स्थानीय यात्रियों को अपने नजदीकी उपनगरीय स्टेशनों से ही ट्रेन पकड़ने का विकल्प मिलेगा, जिससे मुख्य जंक्शनों पर प्लेटफॉर्म और सर्कुलेटिंग एरिया में होने वाली अव्यवस्था कम होगी।
400 किलोमीटर से लंबा दायरा और जमीनी सर्वे
यह समग्र इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट 400 किलोमीटर से अधिक लंबाई के दायरे को कवर करेगा। वर्तमान चरण में इस पूरे गलियारे पर ग्राउंड लेवल सर्वे का काम तेजी से संचालित किया जा रहा है। विस्तृत तकनीकी व भौगोलिक सर्वे का कार्य संपन्न होने के बाद भूमि संरेखण और निर्माण संबंधी अगली प्रक्रियाएं गति पकड़ेंगी, जिसके उपरांत वास्तविक धरातल पर पटरियां बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा। निर्माण पूरा होने के बाद पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के बीच एक सशक्त, निर्बाध और तेज रेल कॉरिडोर उपलब्ध हो सकेगा।





















