उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में एक बेहद हैरान करने वाली चोरी की वारदात सामने आई है। बिधौली इलाके में काफी समय से बंद पड़े एक बड़े हॉस्टल को अज्ञात चोरों के गिरोह ने निशाना बनाया। आरोपियों ने चोरी के पारंपरिक तरीके अपनाने के बजाय खुद को वैध खरीदार के रूप में पेश किया। दिनदहाड़े गाड़ियां लगाकर हॉस्टल से सामान ले जाया गया, जिससे किसी को भी शुरुआत में कोई शक नहीं हुआ। जब आसपास के लोगों ने उनसे पूछताछ की, तो आरोपियों ने दावा किया कि उन्होंने हॉस्टल मालिक से यह सारा सामान कानूनी रूप से खरीद लिया है।
स्थानीय लोगों को झांसा देने और अपने दावे को पुख्ता करने के लिए आरोपियों ने मौके पर एक जाली एग्रीमेंट भी दिखा दिया। इस झूठे दस्तावेज के आधार पर उन्होंने पड़ोसियों का भरोसा जीत लिया। इसके बाद लगातार चार दिनों तक गाड़ियां भरकर हॉस्टल की एक-एक चीज बाहर निकाली जाती रही। बेखौफ होकर की गई इस लूटपाट की भनक चार दिनों तक किसी को नहीं लगी। जब हॉस्टल के मालिक शनिवार को मौके पर पहुंचे, तब जाकर इस बड़े नुकसान का खुलासा हुआ।
करीब 30 कमरों वाले परिसर से चार दिन तक चलता रहा सामान का खेल
यह पूरी घटना प्रेमनगर थाना अंतर्गत बिधौली की है, जहां लगभग 30 कमरों वाला एक हॉस्टल काफी समय से पूरी तरह बंद पड़ा था। इसी सन्नाटे और लावारिस स्थिति का फायदा उठाकर शातिर गिरोह ने यह योजना बनाई। गिरोह के सदस्य दिनदहाड़े मौके पर पहुंचे और वाहनों में सामान लादने लगे। आसपास के लोगों को जब लगातार लोडिंग होते दिखी, तो उन्होंने पूछताछ शुरू की। आरोपियों ने तुरंत खुद को संपत्ति और सामान का अधिकृत खरीदार बताया और कहा कि हॉस्टल संचालक ने पूरा फर्नीचर व उपकरण उन्हें बेच दिया है। मौके पर फर्जी एग्रीमेंट पेश किए जाने के कारण किसी ने पुलिस को सूचना नहीं दी और आरोपी आराम से चार दिन तक गाड़ियां भरते रहे।
मालिक के पहुंचते ही खुली पोल, अंदर का नजारा देख उड़े होश
हॉस्टल के मालिक रजत दुआ जब शनिवार को किसी काम से अपनी संपत्ति का जायजा लेने पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर सन्न रह गए। पूरा परिसर अंदर से वीरान हो चुका था और वहां रखा सारा कीमती सामान गायब था। रजत दुआ के अनुसार, परिसर में बहुत बड़े स्तर पर सामान साफ किया गया है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस पूरी शातिराना वारदात में लगभग 30 लाख रुपये की संपत्ति चोरी हो चुकी है। हॉस्टल मालिक ने तुरंत इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी स्थानीय पुलिस प्रशासन को दी।
दरवाजे, खिड़कियों के चैनल से लेकर नल और शावर तक उखाड़े
चोरों ने हॉस्टल के किसी भी हिस्से को नहीं बख्शा। वे हॉस्टल के कमरों से लगभग 70 बेड, 32 गीजर, 35 अलमारियां, दो बड़े डीप फ्रीजर और छह गैस सिलेंडर वाहनों में लादकर ले गए। इसके अलावा आरोपियों ने इमारत के 20 दरवाजे और सभी खिड़कियों के लोहे के चैनल तक दीवार से उखाड़ लिए। बाथरूम में लगी फिटिंग्स भी नहीं छोड़ी गईं; वहां के सभी नल, टोंटियां और शावर तक गायब कर दिए गए। हॉस्टल में मौजूद अन्य उपयोगी उपकरणों और बाकी जरूरी चीजों को भी पूरी तरह समेट लिया गया, जिससे मालिक को करीब 30 लाख रुपये की चपत लगी है।
पुलिस ने शुरू की तलाश, गिरोह की पहचान में जुटी टीम
इस अनूठी और सुनियोजित चोरी की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग सक्रिय हो गया है। एसपी सिटी देहरादून शेखर सुयाल के अनुसार, पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच और तलाश शुरू कर दी है। पुलिस की अलग-अलग टीमें इस वारदात में शामिल गिरोह की शिनाख्त करने में जुटी हैं ताकि चोरी गए शत-प्रतिशत सामान को बरामद किया जा सके। जिस तरह से फर्जी कागजात दिखाकर और खरीदार बनकर पूरे हॉस्टल को खाली किया गया, उसने सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस शातिर गिरोह को बेनकाब करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।























