नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने कई हंसते-खेलते परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। इस तबाही में न जाने कितने लोगों के सिर से उनकी छत छिन गई है, तो वहीं कई मासूम बच्चों के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है। सितंबर का महीना शुरू होने के साथ ही ठंड ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है, जिससे उन बेघर परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं जिनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। इस बेहद कठिन और भावुक कर देने वाले समय में देहरादून के नागरिकों ने अपने पड़ोसी देश नेपाल के प्रभावित लोगों की मदद के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कदम आगे बढ़ाए हैं। देहरादून के आम लोगों और गोरखाली सुधार सभा के संयुक्त प्रयासों से सोशल मीडिया पर एक विशेष सहायता अभियान शुरू किया गया था, जिसे समाज के हर वर्ग का भरपूर समर्थन मिला है।
सोशल मीडिया अभियान से जुटाए लाखों रुपये
इस व्यापक जन-अभियान के माध्यम से लगभग 60 से 70 लाख भारतीय रुपये की बड़ी राहत राशि जुटाई गई है। नेपाली मुद्रा में आकलित करने पर यह राशि लगभग 1 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। इस पूरी राशि का उपयोग नेपाल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे जरूरतमंद लोगों के लिए तत्काल आवश्यक राहत सामग्री खरीदने और उसे उन तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। राहत अभियान के पहले चरण में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया जा रहा है कि प्रभावित परिवारों को ठंड के प्रकोप से बचाया जा सके। इसके लिए गर्म कपड़े, भारी कंबल, आरामदायक गद्दे और रोजमर्रा के इस्तेमाल की जरूरी चीजें भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
दीर्घकालिक पुनर्वास और स्कूलों का जीर्णोद्धार
केवल बुनियादी जरूरतें पूरी करना ही इस अभियान का एकमात्र लक्ष्य नहीं है, बल्कि आपदा से प्रभावित बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। अभियान के आयोजकों ने निर्णय लिया है कि इस राहत राशि का एक हिस्सा उन स्कूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण पर खर्च किया जाएगा, जिन्हें इस आपदा में भारी नुकसान पहुंचा है। आवश्यकता के अनुसार, क्षतिग्रस्त स्कूलों में नई लाइब्रेरी की स्थापना, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (लैब) का निर्माण या स्कूल भवनों और हॉलों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कोई बाधा न आए और वे फिर से स्कूल जा सकें।
गोरखाली सुधार सभा का 88 वर्षों का सेवा इतिहास
इस पुनीत कार्य में सबसे आगे खड़ी संस्था, गोरखाली सुधार सभा का समाज सेवा का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। संस्था के अध्यक्ष पदम सिंह थापा ने बताया कि यह सभा देहरादून के गोरखा समुदाय की सबसे प्रतिष्ठित और अग्रणी सामाजिक संस्थाओं में से एक है। इसकी स्थापना आज से लगभग 88 वर्ष पूर्व, 17 अप्रैल 1938 को देहरादून के डोभालवाला क्षेत्र में हुई थी। अपने गठन के समय से ही यह संस्था समाज के गरीब, असहाय, बुजुर्ग, विधवा महिलाओं और अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है और सामाजिक विकास के विभिन्न कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाती आई है।
पदम सिंह थापा के अनुसार, पिछले 88 वर्षों के दौरान जब भी नेपाल या भारत के किसी भी हिस्से में कोई प्राकृतिक आपदा आई है, तब-तब गोरखाली सुधार सभा ने सबसे पहले आगे आकर अपनी राहत टीमें और आवश्यक सामग्री भेजने का काम किया है। इस बार भी जैसे ही नेपाल में आपदा की खबर मिली, संस्था ने बिना समय गंवाए सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों का उपयोग करके लोगों से आर्थिक और सामग्री सहयोग की अपील की। इस अपील का असर यह हुआ कि बड़ी संख्या में संवेदनशील नागरिकों ने इस मानवीय कार्य में अपनी सामर्थ्य के अनुसार खुलकर दान दिया।
उत्तराखंड और नेपाल का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध
उत्तराखंड और नेपाल के बीच का संबंध केवल दो भौगोलिक सीमाओं का नहीं है, बल्कि यह बेहद प्राचीन और गहरा है। उत्तराखंड सरकार में गोरख कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष अभिषेक शाही ने इस संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तराखंड और नेपाल के बीच सदियों पुराना 'रोटी-बेटी का रिश्ता' रहा है। यह रिश्ता दोनों क्षेत्रों के बीच गहरे पारिवारिक, सामाजिक और वैवाहिक संबंधों को दर्शाता है। यही कारण है कि जब भी नेपाल के लोगों पर कोई विपत्ति आती है, तो उत्तराखंड का हर नागरिक उस दर्द को महसूस करता है और उनकी मदद के लिए तत्पर रहता है।
अभिषेक शाही ने यह भी बताया कि इस राहत मुहिम में केवल गोरखा समाज के लोग ही शामिल नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड के विभिन्न समुदायों और वर्गों के लोगों ने भी अपनी तरफ से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राहत सामग्री को सही तरीके से वितरित करने के लिए गोरखाली सुधार सभा के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जुटाई गई पूरी धनराशि और सभी राहत सामग्रियों को सीधे नेपाल के उन इलाकों में भेजा जाएगा जहां इसकी सबसे ज्यादा और तत्काल जरूरत है।
धरातल पर समन्वय और सीधी सहायता की योजना
राहत सामग्री का वितरण पूरी तरह से पारदर्शी और प्रभावी हो, इसके लिए देहरादून की टीम नेपाल सरकार और वहां स्थानीय स्तर पर सक्रिय विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। अभिषेक शाही ने जानकारी दी कि इस निरंतर संपर्क का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमें ग्राउंड लेवल की वास्तविक स्थिति का पता चलता रहे और यह स्पष्ट हो सके कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में किस चीज की सबसे अधिक कमी है। देहरादून से एक विशेष प्रतिनिधिमंडल खुद नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा ताकि राहत सामग्री सीधे जरूरतमंदों के हाथों में सौंपी जा सके।
हालांकि दुनिया भर की कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां नेपाल में राहत कार्यों में जुटी हुई हैं, लेकिन देहरादून की इस टीम का विशेष ध्यान उन जरूरतमंदों तक पहुंचना है जो अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बदलते मौसम और बढ़ती ठंड को देखते हुए अस्थाई तंबू और शिविरों में रह रहे परिवारों तक गर्म कपड़े और बिस्तर पहुंचाना सबसे पहली प्राथमिकता है। इसके अलावा, उन अनाथ बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिन्होंने इस त्रासदी में अपने माता-पिता को खो दिया है। देहरादून से भेजी जा रही यह राहत सामग्री केवल भौतिक वस्तुओं का बंडल नहीं है, बल्कि यह नेपाल के लोगों के लिए एक भरोसा है कि इस मुश्किल घड़ी में उनका पड़ोसी उनके साथ मजबूती से खड़ा है।



















