तीर्थनगरी ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर घटने के साथ ही नदी किनारे बने विभिन्न घाटों पर एक बार फिर से पुरानी रौनक लौटने लगी है। कुछ दिनों पहले तक पानी का बहाव तेज होने और जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण घाटों की सीढ़ियों तक आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। अब स्थिति में सुधार आने के बाद न केवल स्थानीय लोग सुबह की सैर और पूजा पाठ के लिए यहां पहुंच रहे हैं, बल्कि देश भर से आने वाले सैलानियों का जमावड़ा भी फिर से नजर आने लगा है।
सीढ़ियों पर चहल पहल और खुशनुमा माहौल
जलस्तर सामान्य होते ही घाटों का नजारा पूरी तरह बदल चुका है। सुबह और शाम के समय लोग गंगा तट पर बैठकर शांति के कुछ पल बिताते दिख रहे हैं। कई लोग अपने परिजनों और दोस्तों के साथ घाट की सीढ़ियों पर बैठकर बहते पानी और आसपास के सुरम्य पर्वतीय दृश्यों को निहार रहे हैं। दिन ढलते ही ठंडी हवाओं के बीच लोग शहर की भागदौड़ से दूर सुकून पाने के लिए घाटों का रुख कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बन गया है।
सैलानियों ने साझा किया अपना अनुभव
झारखंड के रहने वाले अमित, जो वर्तमान में पंजाब के एक कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं, अपने सहपाठियों के साथ पहली बार ऋषिकेश की यात्रा पर आए हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा से पहले उन्होंने नदी का जलस्तर काफी ऊंचा होने की बात सुनी थी, लेकिन यहां पहुंचने पर स्थिति पूरी तरह सामान्य मिली। मौसम और नदी की स्थिति दोनों ही काफी अनुकूल हैं। अमित ने सलाह दी कि जो लोग नदी में स्नान करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह 10 बजे से 11 बजे का समय सबसे बेहतर रहता है, क्योंकि उस दौरान धूप खिली होती है। उन्होंने शाम के समय स्नान करने से बचने की सलाह दी, क्योंकि हल्की ठंड के चलते सर्दी और जुकाम होने की आशंका बनी रहती है।
पवित्र स्नान के लिए अनुकूल बनी परिस्थितियां
पड़ोसी शहर देहरादून से ऋषिकेश पहुंचे सूरज ने भी वहां के ताजा हालात पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बारिश के दिनों में गंगा के जलस्तर में जो उफान दिखता है, वह अब पूरी तरह थम चुका है और नदी अपने सामान्य प्रवाह में बह रही है। सूरज के अनुसार जो श्रद्धालु या सैलानी इस समय ऋषिकेश आ रहे हैं, वे बिना किसी डर या परेशानी के आस्था की डुबकी लगा सकते हैं। पहाड़ों की तलहटी में बहती ठंडी बयार और नदी का शांत प्रवाह इस स्थान के सौंदर्य को कई गुना बढ़ा रहा है, जिससे लोग सुकून से भ्रमण कर रहे हैं।





















