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ऋषिकेश के घाटों पर फिर उमड़े श्रद्धालु और सैलानी, गंगा का जलस्तर घटने से सामान्य हुए हालातउत्तराखंड
20 अक्तू॰ 2026, 6:48 am (46 मिनट पहले)· 0

ऋषिकेश के घाटों पर फिर उमड़े श्रद्धालु और सैलानी, गंगा का जलस्तर घटने से सामान्य हुए हालात

ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर कम होने के बाद घाटों पर सामान्य गतिविधियां बहाल हो गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों की आवाजाही में भारी इजाफा देखा जा रहा है।

तीर्थनगरी ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर घटने के साथ ही नदी किनारे बने विभिन्न घाटों पर एक बार फिर से पुरानी रौनक लौटने लगी है। कुछ दिनों पहले तक पानी का बहाव तेज होने और जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण घाटों की सीढ़ियों तक आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। अब स्थिति में सुधार आने के बाद न केवल स्थानीय लोग सुबह की सैर और पूजा पाठ के लिए यहां पहुंच रहे हैं, बल्कि देश भर से आने वाले सैलानियों का जमावड़ा भी फिर से नजर आने लगा है।

सीढ़ियों पर चहल पहल और खुशनुमा माहौल

जलस्तर सामान्य होते ही घाटों का नजारा पूरी तरह बदल चुका है। सुबह और शाम के समय लोग गंगा तट पर बैठकर शांति के कुछ पल बिताते दिख रहे हैं। कई लोग अपने परिजनों और दोस्तों के साथ घाट की सीढ़ियों पर बैठकर बहते पानी और आसपास के सुरम्य पर्वतीय दृश्यों को निहार रहे हैं। दिन ढलते ही ठंडी हवाओं के बीच लोग शहर की भागदौड़ से दूर सुकून पाने के लिए घाटों का रुख कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बन गया है।

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सैलानियों ने साझा किया अपना अनुभव

झारखंड के रहने वाले अमित, जो वर्तमान में पंजाब के एक कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं, अपने सहपाठियों के साथ पहली बार ऋषिकेश की यात्रा पर आए हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा से पहले उन्होंने नदी का जलस्तर काफी ऊंचा होने की बात सुनी थी, लेकिन यहां पहुंचने पर स्थिति पूरी तरह सामान्य मिली। मौसम और नदी की स्थिति दोनों ही काफी अनुकूल हैं। अमित ने सलाह दी कि जो लोग नदी में स्नान करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह 10 बजे से 11 बजे का समय सबसे बेहतर रहता है, क्योंकि उस दौरान धूप खिली होती है। उन्होंने शाम के समय स्नान करने से बचने की सलाह दी, क्योंकि हल्की ठंड के चलते सर्दी और जुकाम होने की आशंका बनी रहती है।

पवित्र स्नान के लिए अनुकूल बनी परिस्थितियां

पड़ोसी शहर देहरादून से ऋषिकेश पहुंचे सूरज ने भी वहां के ताजा हालात पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बारिश के दिनों में गंगा के जलस्तर में जो उफान दिखता है, वह अब पूरी तरह थम चुका है और नदी अपने सामान्य प्रवाह में बह रही है। सूरज के अनुसार जो श्रद्धालु या सैलानी इस समय ऋषिकेश आ रहे हैं, वे बिना किसी डर या परेशानी के आस्था की डुबकी लगा सकते हैं। पहाड़ों की तलहटी में बहती ठंडी बयार और नदी का शांत प्रवाह इस स्थान के सौंदर्य को कई गुना बढ़ा रहा है, जिससे लोग सुकून से भ्रमण कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर घटने से क्या बदलाव आया है?
घाटों पर आम लोगों और सैलानियों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और वहां पहले जैसी रौनक लौट आई है।
गंगा में स्नान करने के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन सा बताया गया है?
दिन में 10 बजे से 11 बजे के बीच का समय सबसे सही माना गया है क्योंकि उस वक्त अच्छी धूप खिली रहती है।
शाम के वक्त गंगा स्नान से बचने की सलाह क्यों दी गई है?
शाम के समय हल्की ठंड होने के कारण पानी में उतरने से सर्दी और जुकाम होने का खतरा रहता है।
क्या वर्तमान में ऋषिकेश के घाटों पर जाना पूरी तरह सुरक्षित है?
जलस्तर सामान्य हो जाने के कारण अब पर्यटक और स्थानीय निवासी बिना किसी परेशानी के घाटों पर घूम सकते हैं और स्नान कर सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 मिनट पहले

चलो आखिरकार राहत मिली। पानी का स्तर कम होने से पर्यटकों की जान में जान आई होगी, वरना तो डर का माहौल बना रहता है।

Rohan Verma@rohan-verma·9 मिनट पहले

अमित, बिल्कुल सही कह रहे हो करण। पिछली बार जब मैं वहाँ गया था तो उफ़नाती धारा देखकर डर लग रहा था, अब सुकून मिला है।

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