सर्दियों के दिनों में ठंड के प्रकोप से बचने और शरीर को भीतरी तौर पर गर्म बनाए रखने के लिए लोग विभिन्न प्रकार की शारीरिक गतिविधियों का सहारा लेते हैं। इनमें योग और प्राणायाम की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। विशेष रूप से भस्त्रिका प्राणायाम को शीत ऋतु के दौरान सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस योग क्रिया में श्वास को बहुत तेजी से भीतर खींचने और बाहर छोड़ने की प्रक्रिया होती है, जिससे शरीर में ऊष्मा उत्पन्न होती है और श्वसन तंत्र से जुड़ी मांसपेशियां पूरी तरह सक्रिय बनी रहती हैं। ऋषिकेश के योगाचार्य दिनेश के अनुसार, प्राणायाम योग साधना का एक बेहद अहम अंग है जिसमें श्वास-प्रश्वास की गति को एक निश्चित और विशेष पद्धति से नियंत्रित किया जाता है। नियमित रूप से प्राणायाम का अभ्यास करने से मन को शांति मिलती है, मानसिक तनाव में कमी आती है और फेफड़ों की श्वास लेने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होता है।
इस विशेष प्राणायाम को ‘अग्नि श्वास’ के नाम से भी जाना जाता है। इस योग क्रिया के दौरान नाक के माध्यम से हवा को अत्यंत तीव्रता के साथ भीतर भरा जाता है और उतनी ही तेजी से बाहर निकाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पेट भी श्वास के साथ भीतर और बाहर गति करता है। इस तीव्र गति के कारण शरीर में गर्माहट का अहसास होता है और रेस्पिरेटरी सिस्टम चुस्त-दुरुस्त रहता है। सर्दियों के मौसम में सुस्ती, थकान और आलस्य आम बात है, जिससे निपटने के लिए भस्त्रिका प्राणायाम बेहद मददगार साबित होता है। इसे रोजाना अपनी दिनचर्या में शामिल करने से फेफड़ों की कार्यप्रणाली मजबूत होती है और शरीर में दिनभर के लिए स्फूर्ति बनी रहती है। इसके साथ ही यह एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक है।
हालांकि भस्त्रिका प्राणायाम के ढेरों स्वास्थ्य लाभ हैं, लेकिन यह हर किसी व्यक्ति के लिए सुरक्षित या उपयुक्त नहीं है। योगाचार्य दिनेश का कहना है कि उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों से पीड़ित मरीजों को इस प्राणायाम से पूरी तरह दूर रहना चाहिए, क्योंकि इसमें सांस की तेज गति के कारण शरीर के अंदरूनी अंगों और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके अलावा अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज या अन्य गंभीर श्वसन संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को भी इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। जिन व्यक्तियों को हाल ही में दिल का दौरा पड़ा हो, मिर्गी के दौरे आते हों, या फिर चक्कर आने और बेहोश होने की समस्या रहती हो, उन्हें भी इस योग से परहेज करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी यह प्राणायाम करने से पहले अपने चिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करना चाहिए। पेट में अल्सर या हर्निया जैसी जटिल समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए भी यह वर्जित माना गया है, क्योंकि इस क्रिया में श्वास का तीव्र आदान-प्रदान होता है जिससे कुछ मामलों में चक्कर आना, घबराहट महसूस होना या सांस फूलने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।



















