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आंखों के इलाज के लिए अमेरिका जाने की अर्जी खारिज होने पर तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिकापश्चिम बंगाल
8 अग॰ 2026, 2:36 pm (82 दिन पहले)· 1

आंखों के इलाज के लिए अमेरिका जाने की अर्जी खारिज होने पर तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका

कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा विदेश यात्रा की इजाजत से इनकार किए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वे अपनी आंख के आगे के इलाज के लिए अमेरिका जाना चाहते हैं, जबकि राज्य सरकार और हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पताल की सिफारिश की है।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपनी आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की मंजूरी न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल की है। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस हालिया फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया गया था। यह पूरा विवाद एक आपराधिक मामले में मिली अंतरिम राहत की शर्तों और उनके डॉक्टरी इलाज की जरूरतों से जुड़ा हुआ है।

कानूनी विवाद और यात्रा पर पाबंदी का मामला

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने का एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। जब इस मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी, तब अदालत ने उनके सामने कुछ कानूनी शर्तें भी रखी थीं। इनमें एक प्रमुख शर्त यह थी कि वे बिना अदालत की पूर्व अनुमति के देश से बाहर यात्रा नहीं कर सकते। इसी यात्रा प्रतिबंध की शर्त में ढील मांगने और इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति हासिल करने के मकसद से उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

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हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पहले के घटनाक्रम

विदेश यात्रा से जुड़ा यह कानूनी मामला पिछले कुछ हफ्तों से लगातार अदालतों में विचाराधीन है। 20 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की विदेश जाने की अर्जी खारिज कर दी थी और उन्हें कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में अपना डॉक्टरी इलाज कराने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के इस रुख से असहमत होकर बनर्जी ने देश की शीर्ष अदालत का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर 3 अगस्त को सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वह अभिषेक बनर्जी की याचिका पर बिना किसी देरी के जल्द से जल्द फैसला सुनाए।

मेडिकल बोर्ड के सामने गैरहाजिरी पर हाईकोर्ट का रुख

शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में इस मामले की दोबारा सुनवाई हुई। 5 अगस्त को हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की राहत याचिका को एक बार फिर खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन यह आकलन करने के लिए किया गया था कि क्या याचिकाकर्ता को वाकई अपनी आंखों के इलाज के लिए विदेश जाना जरूरी है। हालांकि, बनर्जी उस मेडिकल बोर्ड के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि वे बोर्ड के सामने पेश होते, तो चिकित्सकों की जांच रिपोर्ट से अदालत को किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचने में मदद मिलती।

बनर्जी के वकीलों और राज्य सरकार की दलीलें

मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि वे अमेरिका में उसी नेत्र विशेषज्ञ से इलाज जारी रखना चाहते हैं जिन्होंने पहले उनकी आंख की सर्जरी की थी। उन्होंने सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में इलाज कराने के सुझाव को स्वीकार करने से मना कर दिया। दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी विदेश यात्रा की मांग का जोरदार विरोध किया। राज्य सरकार के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि यह कोई ऐसी आकस्मिक मेडिकल इमरजेंसी नहीं है जिसके लिए तुरंत विदेश जाना अपरिहार्य हो। इसके साथ ही सरकार ने यह आशंका भी जताई कि यदि उन्हें देश से बाहर जाने की इजाजत दी जाती है, तो उनके खिलाफ जारी कानूनी जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अब यह मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंच चुका है, जहां आने वाले दिनों में इस पर सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया है?
उन्होंने अपनी आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार करने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के 5 अगस्त के फैसले को चुनौती दी है।
अभिषेक बनर्जी के विदेश जाने पर अदालत की पाबंदी क्यों लगी थी?
एक कथित भड़काऊ भाषण के आपराधिक मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते समय हाईकोर्ट ने शर्त रखी थी कि वे बिना अदालत की मंजूरी के देश से बाहर यात्रा नहीं कर सकते।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 5 अगस्त को उनकी अर्जी किस आधार पर खारिज की?
हाईकोर्ट ने कहा कि बनर्जी उस विशेष मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए, जिसे यह तय करना था कि क्या विदेश जाकर इलाज कराना अनिवार्य है।
अभिषेक बनर्जी और राज्य सरकार के वकीलों ने क्या दलीलें दीं?
बनर्जी के वकीलों ने कहा कि वे अमेरिका के उसी डॉक्टर से इलाज कराना चाहते हैं जिन्होंने पहले सर्जरी की थी, जबकि राज्य सरकार ने इसे गैर-आपातकालीन बताते हुए जांच प्रभावित होने का तर्क दिया।
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