देश के मौसम में इस समय दोहरे बदलाव की स्थिति देखने को मिल रही है। एक तरफ राजस्थान के चुनिंदा इलाकों से दक्षिण-पश्चिम मानसून के लौटने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ समुद्री हलचल ने एक नए चक्रवाती खतरे का संकेत दे दिया है। प्रशांत महासागर में अल नीनो का प्रभाव गहराने से इस बार के मानसूनी सीजन में सामान्य से कम वर्षा रहने के आसार पहले से बने हुए हैं। इसके उलट, केरल में हाल ही में मूसलाधार बारिश और घातक भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस विपरीत मौसमी माहौल के बीच अब बंगाल की खाड़ी में बन रहा निम्न दबाव का क्षेत्र भारत के पूर्वी राज्यों के लिए चिंता का सबब बन रहा है।
थाईलैंड और म्यांमार से बढ़ा मौसमी परिसंचरण
मौसम विज्ञानियों ने बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र पर पैनी नजर रखी हुई है। यह मौसमी प्रणाली उत्तरी थाईलैंड और उससे लगे म्यांमार के भूभाग पर बने एक चक्रवाती परिसंचरण से शुरू हुई थी। वहां से आगे खिसकते हुए यह सिस्टम अब बंगाल की खाड़ी के मध्य हिस्सों में दाखिल हो चुका है। वायुमंडलीय आकलन के मुताबिक, अनुकूल परिस्थितियों के चलते यह प्रणाली 22 सितंबर तक डिप्रेशन या डीप डिप्रेशन का रूप ले सकती है। यदि समुद्र की सतह का तापमान और हवाओं का रुख अनुकूल बना रहा, तो यह आगे चलकर एक पूर्ण उष्णकटिबंधीय चक्रवात में भी परिवर्तित हो सकता है। फिलहाल इसकी गति और सटीक दिशा को लेकर पूरी निश्चितता अगले सप्ताह के मध्य तक ही सामने आ पाएगी, जब यह प्रणाली गहरे दबाव के चरण में पहुंचेगी।
पूर्वी तटीय राज्यों पर संभावित प्रभाव का आकलन
यद्यपि इस मौसमी प्रणाली का अंतिम लैंडफॉल और मार्ग अभी पूरी तरह तय नहीं है, फिर भी बंगाल की खाड़ी में उठने वाले तूफान स्वाभाविक रूप से भारत के पूर्वी तट के लिए चुनौती पैदा करते हैं। आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे तटीय राज्य इस संभावित वेदर सिस्टम के सीधे प्रभाव क्षेत्र में आ सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे यह प्रणाली और संगठित होगी, उपग्रह चित्रों के जरिए इसके केंद्र, संरचना और फैलाव की स्पष्ट जानकारी मिलेगी। सैटेलाइट विश्लेषण के आधार पर ही यह सटीक तौर पर कहा जा सकेगा कि यह किस रफ्तार से तट की ओर बढ़ेगा और किन क्षेत्रों में भारी बारिश या तेज हवाएं लाएगा।
मानसून की विदाई और नए चक्रवात का नामकरण
अगर यह मौसमी प्रणाली चक्रवात के तय पैमानों को छूती है, तो यह साल 2026 का पहला उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान दर्ज किया जाएगा। इस वर्ष प्री-मानसून सीजन के दौरान भारतीय समुद्री क्षेत्र में किसी भी चक्रवात की उत्पत्ति नहीं हुई थी। इससे पहले हिंद महासागर क्षेत्र में आया आखिरी चक्रवात दितवाह था, जिसने 28 नवंबर 2025 को श्रीलंका के पूर्वी तट पर दस्तक देकर भयानक बाढ़ और भूस्खलन की विभीषिका पैदा की थी। इस संभावित चक्रवात का समय इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यह दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के ठीक समानांतर चल रहा है। इस चक्रवाती गतिविधि के कारण मध्य और पूर्वी भारत से मानसून की वापसी की सामान्य गति लड़खड़ा सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की क्षेत्रीय नामकरण सूची के तहत यदि यह तूफान का रूप लेता है, तो इसका नाम अर्नब रखा जाएगा, जो कि बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित किया गया नाम है।



















