पश्चिम बंगाल के चर्चित सरकारी जमीन घोटाला मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को देश की शीर्ष अदालत से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक को फिलहाल के लिए आगे बढ़ा दिया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जांच प्रक्रिया में नए और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की बात कही, जिसके बाद अदालत ने इस पूरे विषय पर अगली सुनवाई के लिए 9 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।
सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट सौंपने की राज्य सरकार की मांग
सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि जांच एजेंसियों ने मामले में अहम प्रगति की है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान कुछ बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां और साक्ष्य हासिल हुए हैं, जिन्हें राज्य सरकार सीलबंद लिफाफे के जरिए अदालत के समक्ष पेश करना चाहती है। इसके अतिरिक्त, सुमित रॉय से की गई पूछताछ का पूरा ब्योरा और उससे संबंधित रिकॉर्ड भी अदालत के सामने रखा जाएगा। शीर्ष अदालत ने पूर्व में राज्य सरकार को पूछताछ से जुड़े दस्तावेज और विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से मामले को 8 या 9 सितंबर को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया था, जिसे स्वीकार करते हुए सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 9 सितंबर को अगली सुनवाई तय की। यह तारीख सुप्रीम कोर्ट की प्रकाशित कॉज लिस्ट में भी दर्ज की गई है।
सालबोनी जमीन विवाद से जुड़ा पूरा मामला
यह पूरा कानूनी मामला पश्चिम बंगाल के सालबोनी क्षेत्र में स्थित सरकारी जमीन की कथित तौर पर अवैध बिक्री और उसके निजी संपत्ति के रूप में इस्तेमाल किए जाने के गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है। इस मामले की जांच के दौरान सुमित रॉय की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियों ने उनसे सवाल-जवाब किए हैं। इससे पहले हुई अदालती कार्यवाहियों में सुमित रॉय के वकील ने पीठ के सामने तर्क दिया था कि मूल प्राथमिकी (एफआईआर) में उनके मुवक्किल का नाम कहीं दर्ज नहीं था। बचाव पक्ष का कहना था कि जांच आगे बढ़ने के साथ ही उनका नाम इस मामले में घसीटा गया और उन पर कथित तौर पर जुड़े होने के आरोप लगाए गए।
हिरासत में पूछताछ और सहयोग पर आमने-सामने की दलीलें
दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल सरकार का रुख इस मामले में काफी सख्त नजर आ रहा है। राज्य सरकार के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि जांच के दौरान सुमित रॉय की ओर से पूरा सहयोग नहीं मिल पा रहा है। सरकार का मानना है कि जमीन से जुड़े इस कथित घोटाले की पूरी सच्चाई सामने लाने और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी से हिरासत में लेकर पूछताछ किया जाना आवश्यक हो सकता है। जब सुमित रॉय ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते सर्वोच्च अदालत का रुख किया था, तब अदालत ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा देते हुए स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे जांच अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे।
9 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर रहेंगी नजरें
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम राहत जारी रखने के फैसले से सुमित रॉय को तात्कालिक रूप से गिरफ्तारी के खतरे से सुरक्षा मिल गई है, हालांकि मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। मामले में जांच का काम लगातार जारी है और 9 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले में बेहद निर्णायक साबित हो सकती है। उस दिन सर्वोच्च न्यायालय की पीठ राज्य सरकार की तरफ से सीलबंद लिफाफे में पेश की जाने वाली गोपनीय रिपोर्ट और पूछताछ के रिकॉर्ड की समीक्षा करेगी। अदालत इस बात का आकलन करेगी कि पेश की गई नई सामग्री के आधार पर सुमित रॉय की अंतरिम राहत को आगे बढ़ाया जाए या उसमें कोई बदलाव किया जाए।





















