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सुप्रीम कोर्ट से सुमित रॉय को अंतरिम राहत बरकरार, सालबोनी जमीन मामले में 9 सितंबर को होगी अगली सुनवाईपश्चिम बंगाल
7 सित॰ 2026, 1:16 pm (1 घंटे पहले)· 2

सुप्रीम कोर्ट से सुमित रॉय को अंतरिम राहत बरकरार, सालबोनी जमीन मामले में 9 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

पश्चिम बंगाल के सालबोनी सरकारी जमीन मामले में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा जारी रखी गई है। राज्य सरकार की सीलबंद लिफाफे में नई जानकारी पेश करने की मांग के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को तय की है।

पश्चिम बंगाल के चर्चित सरकारी जमीन घोटाला मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को देश की शीर्ष अदालत से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक को फिलहाल के लिए आगे बढ़ा दिया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जांच प्रक्रिया में नए और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की बात कही, जिसके बाद अदालत ने इस पूरे विषय पर अगली सुनवाई के लिए 9 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।

सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट सौंपने की राज्य सरकार की मांग

सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि जांच एजेंसियों ने मामले में अहम प्रगति की है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान कुछ बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां और साक्ष्य हासिल हुए हैं, जिन्हें राज्य सरकार सीलबंद लिफाफे के जरिए अदालत के समक्ष पेश करना चाहती है। इसके अतिरिक्त, सुमित रॉय से की गई पूछताछ का पूरा ब्योरा और उससे संबंधित रिकॉर्ड भी अदालत के सामने रखा जाएगा। शीर्ष अदालत ने पूर्व में राज्य सरकार को पूछताछ से जुड़े दस्तावेज और विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से मामले को 8 या 9 सितंबर को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया था, जिसे स्वीकार करते हुए सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 9 सितंबर को अगली सुनवाई तय की। यह तारीख सुप्रीम कोर्ट की प्रकाशित कॉज लिस्ट में भी दर्ज की गई है।

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सालबोनी जमीन विवाद से जुड़ा पूरा मामला

यह पूरा कानूनी मामला पश्चिम बंगाल के सालबोनी क्षेत्र में स्थित सरकारी जमीन की कथित तौर पर अवैध बिक्री और उसके निजी संपत्ति के रूप में इस्तेमाल किए जाने के गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है। इस मामले की जांच के दौरान सुमित रॉय की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियों ने उनसे सवाल-जवाब किए हैं। इससे पहले हुई अदालती कार्यवाहियों में सुमित रॉय के वकील ने पीठ के सामने तर्क दिया था कि मूल प्राथमिकी (एफआईआर) में उनके मुवक्किल का नाम कहीं दर्ज नहीं था। बचाव पक्ष का कहना था कि जांच आगे बढ़ने के साथ ही उनका नाम इस मामले में घसीटा गया और उन पर कथित तौर पर जुड़े होने के आरोप लगाए गए।

हिरासत में पूछताछ और सहयोग पर आमने-सामने की दलीलें

दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल सरकार का रुख इस मामले में काफी सख्त नजर आ रहा है। राज्य सरकार के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि जांच के दौरान सुमित रॉय की ओर से पूरा सहयोग नहीं मिल पा रहा है। सरकार का मानना है कि जमीन से जुड़े इस कथित घोटाले की पूरी सच्चाई सामने लाने और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी से हिरासत में लेकर पूछताछ किया जाना आवश्यक हो सकता है। जब सुमित रॉय ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते सर्वोच्च अदालत का रुख किया था, तब अदालत ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा देते हुए स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे जांच अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे।

9 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर रहेंगी नजरें

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम राहत जारी रखने के फैसले से सुमित रॉय को तात्कालिक रूप से गिरफ्तारी के खतरे से सुरक्षा मिल गई है, हालांकि मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। मामले में जांच का काम लगातार जारी है और 9 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले में बेहद निर्णायक साबित हो सकती है। उस दिन सर्वोच्च न्यायालय की पीठ राज्य सरकार की तरफ से सीलबंद लिफाफे में पेश की जाने वाली गोपनीय रिपोर्ट और पूछताछ के रिकॉर्ड की समीक्षा करेगी। अदालत इस बात का आकलन करेगी कि पेश की गई नई सामग्री के आधार पर सुमित रॉय की अंतरिम राहत को आगे बढ़ाया जाए या उसमें कोई बदलाव किया जाए।

सवाल-जवाब

सुमित रॉय कौन हैं और वह किस मामले में जांच का सामना कर रहे हैं?
सुमित रॉय टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक हैं और वे पश्चिम बंगाल के सालबोनी में सरकारी जमीन के कथित अवैध लेनदेन मामले में जांच का सामना कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय को क्या राहत दी है?
शीर्ष अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक को बरकरार रखा है और मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर तय की है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत से क्या मांग की?
राज्य सरकार के वकील तुषार मेहता ने नए जांच तथ्यों और पूछताछ से जुड़े रिकॉर्ड को सीलबंद लिफाफे में पेश करने के लिए समय मांगा।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई किस पीठ ने की?
इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।
सुमित रॉय के वकील का मुख्य तर्क क्या था?
उनके वकील ने तर्क दिया कि मूल एफआईआर में सुमित रॉय का नाम नहीं था और उनका जुड़ाव बाद में जांच के दौरान दिखाया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·55 मिनट पहले

सालबोनी सरकारी जमीन मामले में सीलबंद लिफाफे में नए साक्ष्य सौंपने की राज्य सरकार की मांग और 9 सितंबर की अगली तारीख से यह स्पष्ट है कि कानूनी शिकंजा कस सकता है। टीएमसी सांसद के करीबी की गिरफ्तारी पर रोक का यह मामला अब जांच एजेंसियों के रुख और अदालत में पेश होने वाले गोपनीय दस्तावेजों पर टिक गया है, जो पश्चिम बंगाल की क्षेत्रीय राजनीति में अहम राजनीतिक सरगर्मी पैदा कर रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·55 मिनट पहले

अपराध और कानूनी मामलों की दृष्टि से यह समझना आवश्यक है कि जब जांच एजेंसियां सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज दाखिल करती हैं, तो न्यायिक समीक्षा का दायरा काफी संवेदनशील हो जाता है। सुमित रॉय के मामले में मूल एफआईआर में नाम न होने का बचाव पक्ष का तर्क और राज्य सरकार द्वारा असहयोग का आरोप, दोनों पक्षों के बीच कानूनी दांव-पेच को तेज करता है। 9 सितंबर को अदालत यह तय करेगी कि क्या गोपनीय साक्ष्यों के आधार पर अंतरिम सुरक्षा बढ़ाई जाएगी या कड़े कदम उठाए जाएंगे, जिसका सीधा असर राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों पर पड़ेगा।

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