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हवाई किराए की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट में कल बड़ी सुनवाई, तय होगी सीमाभारत
6 सित॰ 2026, 8:04 pm (27 मिनट पहले)· 2

हवाई किराए की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट में कल बड़ी सुनवाई, तय होगी सीमा

सुप्रीम कोर्ट 7 सितंबर को हवाई किराए की मनमानी बढ़ोतरी पर याचिका की सुनवाई करेगा, जिसमें स्वतंत्र एविएशन नियामक बनाने की मांग रखी गई है।

फेस्टिवल सीजन या किसी इमरजेंसी में एयरपोर्ट का टिकट बुक करते वक्त अगर कीमत देखकर हैरानी हुई हो, तो आप अकेले नहीं हैं। आम दिनों में साढ़े चार-पांच हजार रुपए में मिलने वाला टिकट त्योहारों के आसपास पंद्रह से बीस हजार रुपए तक चला जाता है। इसी मनमानी बढ़ोतरी और छिपे हुए शुल्कों पर अब सुप्रीम कोर्ट में बड़ा फैसला आने वाला है। 7 सितंबर को अदालत इस पूरे विवाद से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करेगी। इस सुनवाई की अगुआई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता करेंगे।

याचिका किसने और क्यों दायर की

यह अर्जी सोशल वर्कर एस. लक्ष्मीनारायणन ने दाखिल की है। उनका आरोप है कि देश की निजी विमान कंपनियां यात्रियों से मनमाफिक किराया वसूल रही हैं, खासकर तब जब त्योहार या छुट्टियां नजदीक होती हैं। ठीक उसी वक्त टिकट के दाम अचानक कई गुना बढ़ जाते हैं और साथ ही कई तरह के अतिरिक्त शुल्क भी चुपचाप जोड़ दिए जाते हैं, जिनकी भनक आम यात्री को पहले से नहीं होती।

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने अदालत के सामने दलील रखी कि मौजूदा व्यवस्था अब तक इस मनमानी पर लगाम नहीं लगा पाई है और इसका पूरा बोझ आम यात्री की जेब पर पड़ रहा है। याचिका में पूरे विमानन क्षेत्र के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत नियामक बनाने की मांग रखी गई है, जिससे किराया तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी बने और यात्रियों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।

अदालत पहले भी जता चुकी है नाराजगी

यह पहला मौका नहीं है जब शीर्ष अदालत ने हवाई किरायों पर सख्त रुख दिखाया हो। इसी साल जनवरी में सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि त्योहारों या छुट्टियों के दौरान किराए में अचानक इतनी तेज उछाल गंभीर चिंता का विषय है और जरूरत पड़ने पर वह इसमें हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगी। इसके बाद 15 मई को हुई सुनवाई में बेंच ने फिर टिप्पणी करते हुए कहा था कि किराया तय करने के पीछे कोई तार्किक और व्यवस्थित तरीका जरूर होना चाहिए, ताकि मनमानी की गुंजाइश न रहे।

सरकार ने कोर्ट को क्या जवाब दिया

अदालत ने केंद्र सरकार से भी पूछा था कि यात्रियों को इस बोझ से राहत देने के लिए क्या योजना बनाई जा रही है। 17 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में मंत्रालय की ओर से बताया गया कि विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाने के मकसद से लाए गए भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नए नियम बनाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार ने इन प्रस्तावित नियमों का एक मसौदा सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपा था और भरोसा दिलाया था कि इस पर चल रही अंतिम दौर की चर्चा अगले तीन हफ्तों में पूरी कर ली जाएगी। अब सबकी निगाहें सोमवार को होने वाली इस सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें साफ हो सकता है कि हवाई किराए की मनमानी पर लगाम कब और कैसे लगेगी।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई कब होगी?
7 सितंबर को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।
यह याचिका किसने दायर की है?
यह याचिका सोशल वर्कर एस. लक्ष्मीनारायणन ने दाखिल की है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में पूरे एविएशन सेक्टर के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत नियामक बनाने की मांग की गई है।
सरकार ने कोर्ट को क्या बताया है?
सरकार ने बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नए नियमों का मसौदा तैयार कर सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंप दिया गया है और अंतिम चर्चा तीन हफ्तों में पूरी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मुद्दे पर क्या कहा था?
जनवरी में कोर्ट ने त्योहारों के दौरान किराए में अचानक उछाल पर चिंता जताई थी, और 15 मई को कहा था कि किराया तय करने की कोई तार्किक व्यवस्था होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से कौन पेश हुआ था?
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव पेश हुए थे।
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