भागलपुर में विकसित होगा राज्य का पहला आम गांव, 500 से अधिक जर्दालू के पेड़ लगाने की तैयारीझारखंड की प्रेरणा ने शुरू किया खास फैशन ब्रांड, सात समंदर पार तक पहुंची यूनिक ड्रेसेस की चमककेजीएमयू उत्पीड़न और धर्मांतरण मामला: 12 कर्मचारियों पर मंडराया अनुशासनात्मक कार्रवाई का खतराअमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 में डोनाल्ड ट्रंप की अग्निपरीक्षा, जानें मतदान का पूरा कार्यक्रमअमेरिकी पाबंदियों के बीच अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की प्रमुख तोमोको अकाने ने संयुक्त राष्ट्र से मांगी सुरक्षाराजस्थान में बुनियादी ढांचे पर ₹2.61 लाख करोड़ का निवेश, रिफाइनरी से लेकर मेट्रो और एयरपोर्ट तक बदलेगा स्वरूपझारखंड में गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ बदलेगा मौसम, 5 नवंबर से साफ होगा आसमानपोलैंड में जमीन के नीचे बसी नमक की अनोखी सल्तनत, 300 किलोमीटर तक फैली हैं रहस्यमयी गुफाएंगैरी टैन का एआई जुनून, एजेंट्स और टोकन्स पर हर साल खर्च कर रहे 2 लाख डॉलर तकदीपावली की खरीदारी से चमका बिलासपुर, इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्नीचर दुकानों को 50 करोड़ रुपये के कारोबार का भरोसा
अमेरिकी पाबंदियों के बीच अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की प्रमुख तोमोको अकाने ने संयुक्त राष्ट्र से मांगी सुरक्षादुनिया
3 नव॰ 2026, 5:38 am (1 घंटे पहले)· 1

अमेरिकी पाबंदियों के बीच अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की प्रमुख तोमोको अकाने ने संयुक्त राष्ट्र से मांगी सुरक्षा

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की अध्यक्ष तोमोको अकाने ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अमेरिकी पाबंदियों के खिलाफ अदालत की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान किया है।

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की अध्यक्ष तोमोको अकाने ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर वैश्विक न्याय व्यवस्था में बाधा डालने का आरोप लगाया है। न्यायाधीश तोमोको अकाने का कहना है कि न्यायाधिकरण के कामकाज को कमजोर करने के इरादे से उस पर आर्थिक और प्रशासनिक पाबंदियां लगाई गई हैं। सोमवार को संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत को पंगु बनाने की यह कोशिश कभी सफल नहीं होगी। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया भर के देशों से आग्रह किया कि वे ठोस और व्यावहारिक कदम उठाकर इस स्वतंत्र अदालत की रक्षा के लिए आगे आएं।

पाबंदियों के चलते वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुआ संबोधन

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर तोमोको अकाने खुद भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकीं, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उन्हें दूर बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी बात रखनी पड़ी। अपने इस विशेष संबोधन में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों से सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक न्याय व्यवस्था की रक्षा की जिम्मेदारी केवल अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के 125 सदस्य देशों की ही नहीं है, बल्कि दुनिया के प्रत्येक राष्ट्र को इस संस्था के साथ खड़ा होना चाहिए। अकाने ने सदस्य देशों को सलाह दी कि वे व्यक्तिगत तौर पर और सामूहिक मंचों के माध्यम से इन कदमों का उचित जवाब दें।

ये भी पढ़ें

जांच के दायरे में अमेरिका और उसके सहयोगी

अमेरिकी प्रशासन की दंडात्मक कार्रवाई के सिलसिलेवार घटनाक्रम को रेखांकित करते हुए तोमोको अकाने ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के चुनिंदा अधिकारियों को निशाना बनाते हुए उन पर पाबंदियां लगाई थीं। इसके बाद पिछले महीने पूरे न्यायाधिकरण को ही इन व्यापक प्रतिबंधों के दायरे में खींच लिया गया। अकाने ने इन कदमों को अदालत के अस्तित्व को खत्म करने के एक संगठित अभियान का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सीधे तौर पर अदालत द्वारा अमेरिका और उसके रणनीतिक साझेदारों से जुड़े मामलों की जांच शुरू करने की प्रतिक्रिया में की गई है, जिनमें इजराइल भी शामिल है।

न्यायिक स्वतंत्रता पर अप्रत्याशित दबाव

अदालत की अध्यक्ष ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिकी कदमों ने सीधे तौर पर न्यायाधीशों और अभियोजकों की सुरक्षा और कार्यशैली को खतरे में डाल दिया है। इसके अलावा पूरी संस्था के संचालन ढांचे को भी सीधा निशाना बनाया गया है। इन पाबंदियों को असाधारण और अभूतपूर्व बताते हुए उन्होंने कहा कि इसी भारी दबाव के चलते उन्हें वैश्विक सभा को दूर बैठकर संबोधित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। अकाने ने पूरे घटनाक्रम को निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रक्रियाओं पर खुला हमला करार दिया।

नोबेल शांति पुरस्कार और प्रतिबंधों का विरोधाभास

अकाने ने इस दौरान 9 अक्टूबर की तारीख का विशेष रूप से उल्लेख किया, जब अदालत के खिलाफ नए और व्यापक प्रतिबंध थोपे गए थे। उन्होंने ध्यान दिलाया कि ठीक उसी दिन नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने भी एक ऐतिहासिक घोषणा की थी। उस दिन दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवी पिल्ले को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। नवी पिल्ले अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रह चुकी हैं।

इन दोनों घटनाओं की तुलना करते हुए तोमोको अकाने ने कहा कि वैश्विक सम्मान जहां अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली की अपार महत्ता को दर्शाता है, वहीं अमेरिकी कदम उस प्रतिष्ठित संस्था को दबाने का प्रयास कर रहे हैं जो इन उसूलों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने दोनों दृष्टिकोणों के बीच के इस गहरे अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय गंभीर अपराधों के मामलों में वैश्विक कानून को सख्ती से लागू करने का केंद्रीय आधार स्तंभ है।

अदालत का दायरा और अमेरिकी रुख

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने औपचारिक रूप से साल 2002 में अपना कामकाज शुरू किया था। इस न्यायाधिकरण की स्थापना युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों और नरसंहार जैसे जघन्य मामलों में मुकदमा चलाने के उद्देश्य से की गई थी। यह अदालत विशेष रूप से उन परिस्थितियों में दखल देती है जब किसी देश की राष्ट्रीय कानूनी प्रणालियां गंभीर अपराधियों पर मुकदमा चलाने में असमर्थ होती हैं या जानबूझकर ऐसा नहीं करना चाहती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका इस अदालत का सदस्य देश नहीं है।

तोमोको अकाने के इस कड़े भाषण पर अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई। हालांकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन ताजा प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए पहले ही अपने रुख की पुष्टि कर दी थी। रुबियो ने कहा, "अमेरिका इस अनियंत्रित अदालत के साथ सभी लेन-देन पर रोक लगाएगा, जिससे उसके संसाधनों में कटौती होगी और हमारे खिलाफ काम करने की उसकी क्षमता पंगु हो जाएगी।"

न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और वैश्विक समर्थन

बाहरी दबावों को पूरी तरह खारिज करते हुए अध्यक्ष तोमोको अकाने ने अदालत के मूल मिशन का पुरजोर बचाव किया। अकाने ने अपने रुख पर अडिग रहते हुए कहा, "मैं पूरी तरह स्पष्ट कर देना चाहती हूं कि यह अदालत गंभीर अपराधों के अनगिनत पीड़ितों की खातिर केवल कानून और सबूतों के आधार पर पूरी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करती रहेगी।"

अकाने के संबोधन के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के कई प्रमुख देशों और संगठनों ने अदालत के पक्ष में अपनी आवाज उठाई। यूरोपीय संघ ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और उसके कानूनी कामकाज का पूर्ण समर्थन किया। कई अन्य सदस्य देशों ने भी मंच से संस्था के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए अदालत को अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक अनिवार्य माध्यम बताया। वैश्विक मंच से दिए गए इन बयानों में मानवता को प्रभावित करने वाले सबसे जघन्य अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने पर बल दिया गया।

सवाल-जवाब

तोमोको अकाने ने संयुक्त राष्ट्र को दूर बैठकर क्यों संबोधित किया?
अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की अध्यक्ष तोमोको अकाने को संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में दूर से वीडियो के जरिए अपनी बात रखनी पड़ी।
ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर प्रतिबंध क्यों लगाए?
अमेरिकी प्रशासन ने यह कदम अदालत द्वारा अमेरिका और उसके सहयोगी देशों, विशेष रूप से इजराइल, से जुड़े मामलों की जांच किए जाने के विरोध में उठाया।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन प्रतिबंधों पर क्या कहा?
मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस अदालत के साथ सभी लेन-देन पर प्रतिबंध लगाएगा ताकि उसके संसाधनों में कटौती कर उसके संचालन को रोका जा सके।
तोमोको अकाने ने 9 अक्टूबर की तारीख का उल्लेख किस संदर्भ में किया?
अकाने ने बताया कि 9 अक्टूबर को एक तरफ अदालत पर नए अमेरिकी प्रतिबंध लगाए गए, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश नवी पिल्ले को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की स्थापना कब हुई थी और इसका मुख्य कार्य क्या है?
यह अदालत साल 2002 में शुरू हुई थी और इसका मुख्य काम युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के गंभीर मामलों पर मुकदमा चलाना है।
तोमोको अकाने के संबोधन के बाद किन पक्षों ने अदालत का समर्थन किया?
संबोधन के बाद यूरोपीय संघ और कई अन्य सदस्य देशों ने मंच से अदालत के कामकाज और उसकी स्वतंत्रता का खुला समर्थन किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·10 मिनट पहले

अकाने को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बोलना पड़ा, यह साफ दिखाता है कि ताकतवर देश अपने खिलाफ जांच बर्दाश्त नहीं करते। अंतरराष्ट्रीय कानून सिर्फ कमजोरों के लिए रह गया है क्या?

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 मिनट पहले

अदालत की प्रमुख को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भाषण देना पड़े, तो समझ लीजिए वैश्विक न्याय पर कितना दबाव है। अमेरिका का इस तरह खुलेआम अदालत को रोकना तानाशाही नहीं तो और क्या है?

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·30 मिनट पहले

अर्जुन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बोलना ही तो सबसे बड़ी बात है। सोचिए, अमेरिका जाने से रोकना कितना बड़ा दबाव है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·50 मिनट पहले

अकाने को यूएन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बोलना पड़ा, यह अमेरिका के भारी दबाव का सीधा सबूत है। वैश्विक अदालतों पर इस तरह की पाबंदियां न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·50 मिनट पहले

करण जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। लेकिन क्या यूएन के बाकी देश वाकई अमेरिका के खिलाफ जाकर आईसीसी का साथ देंगे?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp