संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति के कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर होने वाले मध्यावधि चुनाव की घड़ी आ चुकी है। इस बार के मुकाबले को डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासनिक फैसलों और उनकी नीतियों की लोकप्रियता की सीधी परीक्षा माना जा रहा है। पिछले दो वर्षों के दौरान विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय रणनीतियों में किए गए व्यापक बदलावों के बाद अब यह फैसला अमेरिकी मतदाताओं के हाथ में है कि वे वर्तमान नीतियों को आगे बढ़ाना चाहते हैं या सदन में संतुलन बदलना चाहते हैं।
मतदान का समय और अलग-अलग टाइम जोन
अमेरिका में आधिकारिक मतदान 3 नवंबर की सुबह 7 बजे से शुरू हो रहा है, जो भारतीय समयानुसार 4 नवंबर यानी बुधवार की सुबह पड़ता है। देश भर में कई अलग-अलग टाइम जोन होने के कारण विभिन्न राज्यों में मतदान शुरू और समाप्त होने का समय अलग रहेगा। जैसे-जैसे राज्यों में मतदान प्रक्रिया पूरी होगी, वैसे-वैसे मतगणना और चुनावी नतीजों के रुझान सामने आने लगेंगे।
प्रारंभिक मतदान और उम्मीदवारों का प्रचार
इस चुनाव में आधिकारिक मतदान के दिन से पहले ही 4 करोड़ से अधिक नागरिक प्रारंभिक मतदान प्रक्रिया के जरिए अपने मत का इस्तेमाल कर चुके हैं। शुरुआती आंकड़ों में रिपब्लिकन पार्टी पीछे दिखाई दी, जिसके बाद ट्रंप ने 30 राज्यों में सक्रियता बढ़ाई। चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय समुदाय के मतदाताओं को आकर्षित करने पर भी खास ध्यान दिया गया, जहां प्रत्याशी मंदिरों के दौरों और पारंपरिक आयोजनों में शामिल होते दिखे। मिशिगन में डेमोक्रेटिक प्रत्याशी अब्दुल अल-सैयद जैसे चेहरे भी इस चुनाव में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
चुनाव सुरक्षा और नतीजों के सियासी मायने
मतदान में किसी भी तरह की गड़बड़ी या वोट चोरी को रोकने के लिए ट्रंप ने सतर्कता बरतने की बात कही और इसके लिए इनाम की भी घोषणा की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलती है, तो इसका सीधा असर अमेरिकी प्रशासन के विधायी कामकाज और कॉरपोरेट जगत की नीतियों पर देखने को मिलेगा।



















