बांग्लादेश में इन दिनों गहराता बिजली और गैस संकट वहां की आम जनता और उद्योगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। ईंधन की तीव्र कमी के चलते देशभर में पावर प्लांट पर भारी दबाव बढ़ रहा है, जिससे कई इलाकों में घंटों लोड शेडिंग की नौबत आ गई है। इस गंभीर स्थिति से निपटने और अपने ऊर्जा ढांचे को ध्वस्त होने से बचाने के लिए बांग्लादेश को एक बार फिर अपने पड़ोसी देश भारत की ओर रुख करना पड़ा है। ऊर्जा किल्लत को दूर करने के उद्देश्य से बांग्लादेश सरकार ने भारत से तत्काल अतिरिक्त डीजल सप्लाई देने का औपचारिक अनुरोध किया है।
ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद और भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की अहम मुलाकात
बांग्लादेश के बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद ने गुरुवार को भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात कर द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों पर विस्तृत चर्चा की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच बिजली उत्पादन और पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण में परस्पर सहयोग बढ़ाने को लेकर विमर्श हुआ। वार्ता के पश्चात मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए बांग्लादेशी मंत्री ने स्वीकार किया कि उनके देश में डीजल की भारी कमी बनी हुई है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैस आधारित पावर प्लांट भी ईंधन संकट की वजह से अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं।
इकबाल हसन महमूद ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि दोनों देशों के पास ईंधन आयात के लिए पहले से ही एक मजबूत बुनियादी ढांचा मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत से डीजल मंगाने के लिए एक समर्पित पाइपलाइन स्थापित है, और बांग्लादेश ने इसी पाइपलाइन के माध्यम से अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति जल्द से जल्द शुरू करने का आग्रह किया है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत उनका पड़ोसी देश है और दोनों राष्ट्रों के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझा हित जुड़े हुए हैं। इन्हीं साझा प्राथमिकताओं और तात्कालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह वार्ता आयोजित की गई थी।
पावर प्लांटों पर बढ़ता दबाव और लोड शेडिंग का गंभीर संकट
वर्तमान में बांग्लादेश के अधिकांश हिस्सों में बिजली और गैस की अनुपलब्धता ने दैनिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। डीजल की घटती आपूर्ति के कारण बिजली संयंत्रों को अपनी उत्पादन क्षमता घटाने पर मजबूर होना पड़ा है। नतीजतन, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोड शेडिंग की समस्या तेजी से विकराल होती जा रही है। बांग्लादेशी अधिकारियों का मानना है कि यदि भारत से समय पर अतिरिक्त डीजल मिल जाता है, तो देश के ऊर्जा संकट को नियंत्रित करने और बिजली आपूर्ति को पटरी पर लाने में काफी हद तक सफलता मिलेगी।
हालांकि दोनों पक्षों के बीच ऊर्जा सहयोग का एक ढांचा पहले से क्रियाशील है, लेकिन आपूर्ति की निरंतरता और मात्रा भारत के निर्णयों पर निर्भर करती है। भारत चाहे तो अपनी घरेलू प्राथमिकताओं और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर आपूर्ति की शर्तों को तय कर सकता है। इसके बावजूद, क्षेत्रीय स्थिरता और पड़ोसी प्रथम की नीति के तहत भारत पूर्व में भी बांग्लादेश की ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।
भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन का इतिहास और पूर्व आपूर्ति
दोनों पड़ोसी देशों के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन का निर्माण किया गया था। यह क्रॉस-बॉर्डर पाइपलाइन दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों की आधारशिला रही है। इसी पाइपलाइन के माध्यम से इस वर्ष मार्च और अप्रैल के महीनों में भारत द्वारा बांग्लादेश को लगभग 30 हजार टन डीजल की सफल आपूर्ति की गई थी। उस दौरान इस आपूर्ति ने बांग्लादेशी ग्रिड को स्थिर करने में बेहद महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
हालांकि, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान इस पाइपलाइन के जरिए डीजल की नियमित आपूर्ति बाधित हो गई थी। आपूर्ति रुकने और घरेलू स्तर पर गैस व तेल के भंडार घटने के कारण बांग्लादेश में स्थिति बिगड़ती चली गई। अब जब ऊर्जा संकट चरम पर पहुंच चुका है, तो बांग्लादेशी प्रशासन को एक बार फिर इस पाइपलाइन के जरिए भारत से अतिरिक्त डीजल मंगाने का फैसला लेना पड़ा है।
कूटनीतिक बदलाव और भारत पर बढ़ती निर्भरता
हाल के दौर में बांग्लादेश की विदेश नीति में आए बदलावों और चीन व पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियों को लेकर भी क्षेत्रीय राजनीति में व्यापक चर्चाएं होती रही हैं। शेख हसीना के शासनकाल के बाद अंतरिम व्यवस्था के दौरान बांग्लादेश के कूटनीतिक तेवरों में बदलाव देखा गया था। परंतु आर्थिक और व्यावहारिक धरातल पर बांग्लादेश इस तथ्य से भली-भांति वाकिफ है कि संकट के समय भारत ही उसका सबसे भरोसेमंद और सुलभ सहयोगी साबित होता है।
इतिहास गवाह है कि जब भी बांग्लादेश पर कोई बड़ा संकट आया है, भारत ने एक जिम्मेदार पड़ोसी की तरह उसकी मदद की है। पूर्व में जब ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई थी, तब भी भारत ने अपने पड़ोसी देश को डीजल और पेट्रोल भेजकर उसकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर बनाए रखा था। वर्तमान बिजली संकट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि चीन और पाकिस्तान के खोखले वादों के मुकाबले भारत की जमीनी सहायता ही बांग्लादेश को उबार सकती है।



















