ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद की रहने वाली 23 वर्षीय छात्रा नजमेह अमिनी को एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण मौत की सजा सुनाई गई है। यह मामला देश के धार्मिक कानूनों, अभिव्यक्ति की आजादी और न्याय प्रणाली को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अधिकारियों का आरोप है कि अमिनी ने ऑनलाइन माध्यम से पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया था, जिसे देश के कानूनी ढांचे के तहत गंभीर अपराध माना गया है।
सब्ब अल-नबी और कानूनी धाराएं
ईरान की दंड संहिता की धारा 262 के अंतर्गत पैगंबर के अपमान से जुड़े मामलों में मौत की सजा का प्रावधान है। इस कानूनी प्रावधान को 'सब्ब अल-नबी' कहा जाता है। हालांकि, इसी संहिता की धारा 263 में कुछ खास परिस्थितियों का जिक्र किया गया है जहां बयानों को पूरी तरह से जानबूझकर किया गया अपराध नहीं माना जाता। इनमें नशीले पदार्थों के प्रभाव में होने या गलती से मुंह से शब्द निकल जाने जैसी स्थितियां शामिल हैं, लेकिन अदालत ने बचाव पक्ष की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
गिरफ्तारी और अन्य मामले
अमिनी को जनवरी 2026 में देश भर में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरन हिरासत में लिया गया था। ईरान ह्यूमन राइट्स और एचराना की रिपोर्टों के मुताबिक उनके खिलाफ कई अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए थे। इनमें ईश्वर के दुश्मनों की श्रेणी में आने वाला 'मोहारेबेह' आरोप, शत्रु देशों से सहयोग का संदेह, देश के सर्वोच्च नेता का अपमान करना और सुरक्षाबलों के साथ टकराव जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। मशहद की एक आपराधिक अदालत में इन सभी मामलों की अलग-अलग सुनवाई की गई।
जेल से जारी ऑडियो संदेश
कैद में रहने के दौरान अमिनी ने एक ऑडियो संदेश रिकॉर्ड किया था जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने अपने परिवार के भविष्य और अपनी उम्मीदों का जिक्र करते हुए यह आशंका जताई है कि शायद उन्हें अपनी बात दुनिया के सामने रखने का यह आखिरी मौका मिल रहा हो। हालांकि, यह सजा अभी पूरी तरह अंतिम नहीं है और इसके खिलाफ देश के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
साइकेडेलिक मशरूम और अदालत का रुख
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया था कि घटना के समय अमिनी ने अपने दोस्तों के साथ साइकेडेलिक मशरूम का सेवन किया था जिससे उन्हें मतिभ्रम हो रहा था और यह बयान उनकी अनजाने में फिसली हुई जुबान का नतीजा था। खुरासान अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, जज ने इस दलील को खारिज करते हुए सवाल उठाया कि यदि वह वास्तव में ऐसी मानसिक स्थिति में थीं, तो उन्होंने अन्य राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस तरह की बातें क्यों नहीं कहीं।
अतिरिक्त सजा और वकीलों की पाबंदियां
मशहद रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने एक अलग फैसले के तहत अमिनी को 12 साल, 6 महीने और 1 दिन की जेल की सजा भी दी है। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने और सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने के आरोप सिद्ध किए गए। ईरान ह्यूमन राइट्स मॉनिटर के अनुसार, पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपनी पसंद का कानूनी प्रतिनिधि चुनने की अनुमति नहीं दी गई और यह आशंका भी जताई गई कि उनसे जबरन बयान हासिल करने के लिए प्रताड़ित किया गया होगा।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
विभिन्न मानवाधिकार समूहों ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि केवल ऑनलाइन की गई किसी टिप्पणी के आधार पर किसी को मौत के घाट उतारना बेहद अनुचित कदम है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति का भी यही मत है कि जिन मामलों में सीधे तौर पर किसी की हत्या नहीं की गई हो, वे अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के तहत उन गंभीर अपराधों में नहीं आते जिनके लिए प्राणदंड दिया जाना चाहिए।
























