बुर्गनस्टॉक में राजनयिकों का ऐतिहासिक महाजुटान
स्विट्जरलैंड के खूबसूरत पर्वतीय स्थल बुर्गनस्टॉक में एक बड़ा कूटनीतिक प्रयास देखने को मिला है। यहां अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल एक विशेष बैठक के लिए जुटे हैं, जिसे 'लेक ल्यूसर्न समिट' का नाम दिया गया है। TrendKia को मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने ईरानी प्रतिनिधियों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने संयम दिखाया और तनाव कम करने की कोशिश की। यह उच्च स्तरीय बैठक पिछले हफ्ते हस्ताक्षरित हुए एक नए MoU को लागू करने के उद्देश्य से की जा रही है।
इस चार-पक्षीय बातचीत के प्रारूप में अमेरिका और ईरान मुख्य पक्षों के रूप में शामिल हैं। वहीं, पाकिस्तान और कतर इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य उस MoU के प्रमुख हिस्सों को अमलीजामा पहनाना है, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हस्ताक्षर किए थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ इस समझौते में एक गारंटर की भूमिका में हैं।
क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए साझा प्रयास
समिट के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने ईरानी नेतृत्व की नीयत पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि ईरानी नेतृत्व वास्तव में क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देना चाहता है। शरीफ़ ने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी यही मंशा है। उन्होंने ट्रंप को शांतिप्रिय व्यक्ति बताते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का जिक्र किया।
डोनाल्ड ट्रंप अक्सर यह दावा करते रहे हैं कि वाशिंगटन ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में मदद की थी। ट्रंप ने पिछले साल 10 मई की तारीख को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया था। उस तारीख को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि दोनों पक्ष तत्काल और पूर्ण युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने इसे वाशिंगटन की मध्यस्थता में रात भर चली लंबी बातचीत का नतीजा बताया था। शहबाज़ शरीफ़ ने वाशिंगटन के साथ पाकिस्तान के भविष्य के रिश्तों पर भी बात की और उम्मीद जताई कि अमेरिका के साथ पाकिस्तान की दोस्ती फिर से मजबूत होगी और दोनों देशों के बीच करीबी तालमेल और सहयोग बढ़ेगा। शरीफ़ ने यह बातें बैठक शुरू होने से पहले अमेरिकी और कतर के नेताओं के साथ खड़े होकर कही।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का मुद्दा
एक तरफ जहां बैठकें शुरू हुईं, दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक सख्त चेतावनी जारी कर दी। उन्होंने लिखा कि ईरान को लेबनान में सक्रिय अपने भारी भुगतान वाले प्रॉक्सी को तुरंत अशांति फैलाने से रोकना होगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो अमेरिका ईरान पर फिर से बहुत कड़ा प्रहार करेगा, ठीक वैसा ही जैसा पिछले हफ्ते किया गया था, लेकिन इस बार हमला और भी भीषण होगा। ट्रंप ने इस धमकी को लेबनान के घटनाक्रम से जोड़ा, जो इस बातचीत का एक मुख्य मुद्दा है।
इसके अलावा, फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद किए जाने के खतरों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि उनके पास इस स्थिति से निपटने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब राजनयिक सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव के मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे थे।
जेडी वेंस का बड़ा बयान और भारत-पाकिस्तान से जुड़ा निजी किस्सा
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत में प्रगति के लिए समझौते और लचीलेपन की जरूरत है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक मुलाकात बताते हुए कहा कि इससे पहले कभी भी ईरानी और अमेरिकी नेतृत्व इस्लामाबाद से बाहर इतने उच्च स्तर पर नहीं मिले हैं। वेंस ने कहा कि इस बैठक ने एक तकनीकी बातचीत का रास्ता खोल दिया है, जिससे भले ही सारे मतभेद तुरंत दूर न हों, लेकिन यह एक बड़ी शुरुआत है।
वेंस के अनुसार, आज की बैठक इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इतिहास में पहली बार दोनों पक्षों की टीमें एक साथ बैठकर यह तय कर रही हैं कि दोनों देशों के लिए क्या सबसे ज्यादा मायने रखता है, ताकि समस्याओं को सुलझाकर एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ा जा सके। उन्होंने बताया कि विभिन्न देशों का राजनीतिक नेतृत्व यहां इसलिए मौजूद है ताकि इस तकनीकी बातचीत का ढांचा तैयार किया जा सके और अपनी टीमों को पूरा समर्थन दिया जा सके। वेंस ने ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे देखना चाहते हैं कि क्या मध्य पूर्व में सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है या चीजें पुराने ढर्रे पर ही चलती रहेंगी।
वेंस ने स्पष्ट किया कि ट्रंप लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में पूर्ण युद्धविराम का समर्थन करते हैं, हालांकि व्यावहारिक रूप से युद्धविराम लागू रखना हमेशा जटिल होता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सकारात्मक प्रगति हुई है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के रुख को स्पष्ट करते हुए वेंस ने कहा कि अगर ईरान लंबे समय के लिए अपने परमाणु हथियार बनाने की महत्वाकांक्षा को छोड़ने के लिए तैयार है, तो अमेरिका उसके साथ संबंधों को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि ट्रंप ने उन्हें ईरान के साथ एक नया अध्याय शुरू करने और दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाने के लिए कहा है।
बैठक के दौरान वेंस ने पाकिस्तानी नेतृत्व और वहां के सैन्य नेतृत्व का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने एक हल्का-फुल्का मजाक करते हुए कहा कि उनके जीवन में दो बेहद महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं, जिनमें से एक भारतीय है और दूसरा पाकिस्तानी। भारतीय उनकी पत्नी हैं और पाकिस्तानी फील्ड मार्शल मुनीर हैं। वेंस ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उनकी फील्ड मार्शल मुनीर से अक्सर बातचीत होती रही है।
मध्यस्थों की भूमिका और आगे की राह
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने भी उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने शांति प्रयासों के लिए अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों का धन्यवाद किया। कतर के पीएम ने कहा कि यह बैठक बेहद ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण है, जिसका असर न केवल इस क्षेत्र की सुरक्षा पर बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
मुख्य बैठक से पहले शहबाज़ शरीफ़ ने दोनों पक्षों के नेताओं से अलग से मुलाकात की। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई जेडी वेंस ने की, जबकि ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने मोर्चा संभाला। शहबाज़ शरीफ़ के कार्यालय द्वारा एक्स पर साझा की गईं तस्वीरों में उन्हें दोनों प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग हाथ मिलाते हुए देखा जा सकता है। शरीफ़ के साथ यात्रा पर गए पाकिस्तान के सेना प्रमुख मुनीर भी वाशिंगटन और तेहरान के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों के दौरान नजर आए।
इस MoU के तहत पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है। इसके एजेंडे में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, ईरान पर लगे प्रतिबंध और लेबनान में इजरायल का सैन्य अभियान शामिल हैं। तकनीकी स्तर की बातचीत शुक्रवार से शुरू होनी थी, लेकिन इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच नए सिरे से हुई गोलीबारी के कारण इसमें थोड़ी देरी हुई है।













