अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की दिशा में लंबे समय तक काम करने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवनेथम नावी पिल्लई को वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला लिया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति की ओर से जोर्गेन वाट्ने फ्राइडनेस ने इस वैश्विक सम्मान की औपचारिक घोषणा की। समिति ने स्पष्ट किया कि शांति की स्थापना और वैश्विक कानूनी ढांचे को मजबूती देने के उनके प्रयासों को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है।
मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून में लंबा योगदान
नावी पिल्लई का करियर मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय की बहाली के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने वर्ष 2008 से 2014 के दौरान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के पद पर जिम्मेदारी संभाली थी। इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने वैश्विक स्तर पर शांति बहाली, मानवीय गरिमा की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के निष्पक्ष अनुपालन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। समिति ने उनके इसी वैश्विक योगदान को मान्यता देते हुए सर्वोच्च शांति सम्मान देने का निर्णय लिया।
डोनाल्ड ट्रंप के दावों को नहीं मिली जगह
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस घोषणा के बाद एक बार फिर निराशा का सामना करना पड़ा है। ट्रंप काफी समय से शांति का नोबेल पुरस्कार पाने की इच्छा जताते रहे थे। उनका तर्क रहा है कि उन्होंने कई देशों के बीच जारी सैन्य संघर्षों और युद्धों को रुकवाने में सीधी भूमिका निभाई है, इसलिए वे इस प्रतिष्ठित सम्मान के वास्तविक हकदार हैं। बहरहाल, नोबेल समिति ने उनके दावों पर विचार न करते हुए इस बार भी अपना ध्यान कानूनी संस्थागत प्रयासों और मानवाधिकार रक्षा से जुड़े कार्यों पर केंद्रित रखा।



















