ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य के अंतर्गत आने वाले सेसनॉक शहर में प्रवासी भारतीय समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और नस्लवादी सामग्री वाले पोस्टर लगाए जाने से माहौल गरमा गया है। सिडनी से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर बसे इस क्षेत्र में इन पोस्टरों के सामने आने के बाद स्थानीय प्रवासी समुदाय में भारी रोष व्याप्त है। इन विज्ञापनों और पोस्टरों में सीधे तौर पर भारतीय नागरिकों और प्रवासियों को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक बातें लिखी गई थीं, जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
पोस्टर में क्या था और कैसे फैला विवाद
सामने आए इन विवादित पोस्टरों में एक व्यक्ति को सड़क पर शौच करते हुए दर्शाया गया था और उसके साथ एक भड़काऊ संदेश लिखा था जिसमें संस्कृति को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके अलावा इन पोस्टरों में ऑस्ट्रेलिया की डेमोग्राफी से जुड़े कुछ आंकड़े भी छापे गए थे जिनमें यह दावा किया गया था कि देश की 32 प्रतिशत आबादी का जन्म विदेश में हुआ है और इस फेहरिस्त में भारत शीर्ष स्थान पर काबिज है। प्रवासियों को देश से बाहर भेजने की मांग करते हुए रीमाइग्रेशन नाउ यानी तत्काल वापसी का नारा भी इन पर अंकित किया गया था। विशेषज्ञों और समुदाय के लोगों का मानना है कि इस प्रकार के अभियान विशुद्ध रूप से भारतीय मूल के नागरिकों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा करने और उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर उन्हें लक्षित करने के लिए चलाए जा रहे हैं।
सांसद डैन रेपाचोली की सख्त प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद हंटर निर्वाचन क्षेत्र से सांसद डैन रेपाचोली ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी और इन पोस्टरों को अत्यंत घृणित करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सेसनॉक और हंटर क्षेत्र में नस्लवाद के लिए किसी भी प्रकार की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रकार की तुच्छ हरकतें करने वाले लोग स्थानीय आबादी के बहुमत का प्रतिनिधित्व कतई नहीं करते हैं। जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी भी नागरिक को ऐसे आपत्तिजनक पोस्टर दिखाई दें तो वह तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दे ताकि इन्हें अविलंब हटाया जा सके और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
न्यू साउथ वेल्स में भारतीय समुदाय की स्थिति
भौगोलिक और जनसांख्यिकीय दृष्टिकोण से न्यू साउथ वेल्स ऑस्ट्रेलिया का सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत है और इसकी राजधानी सिडनी देश की आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र है। इस संपूर्ण क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं। सिडनी स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो न्यू साउथ वेल्स और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों की कुल संख्या लगभग 1.75 लाख बैठती है, जो कि पूरे ऑस्ट्रेलिया में बसे कुल भारतीय समुदाय का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा है। वर्तमान स्थिति यह है कि देश में भारतीय मूल के लोगों की तादाद अंग्रेजी मूल के नागरिकों से भी आगे निकल चुकी है। ऐसे समय में इस प्रकार की नस्लवादी घटनाएं प्रवासियों के सामने आने वाली सामाजिक चुनौतियों और भेदभाव के मुद्दों को एक बार फिर से केंद्र में ले आई हैं।























