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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के मेल वोटिंग नियम पर से हटाई रोक, सोनिया सोतोमयोर और केतनजी ब्राउन जैक्सन ने किया कड़ा विरोधदुनिया
25 अग॰ 2026, 7:39 pm (64 दिन पहले)· 2

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के मेल वोटिंग नियम पर से हटाई रोक, सोनिया सोतोमयोर और केतनजी ब्राउन जैक्सन ने किया कड़ा विरोध

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को मेल वोटिंग के नियमों पर मिली राहत के बीच उदारवादी जजों ने चुनाव में अराजकता की आशंका जताई है। हालांकि इस अदालती कदम के बाद भी प्रशासन का पूरा निर्देश अभी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है और कानूनी लड़ाई जारी है।

अमेरिकी सर्वोच्च अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए मेल वोटिंग से जुड़े नए नियमों पर लगी निचली अदालत की रोक को हटा दिया है। हालांकि इस कानूनी घटनाक्रम को डोनाल्ड ट्रंप के खेमे के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, लेकिन इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि संबंधित आदेश तुरंत प्रभाव से जमीनी स्तर पर लागू हो जाएगा। इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत के उदारवादी खेमे से ताल्लुक रखने वाली सोनिया सोतोमयोर और केतनजी ब्राउन जैक्सन ने इस फैसले के खिलाफ अपनी कड़ी असहमति दर्ज कराई और इसे बेहद निराशाजनक करार दिया।

उदारवादी जजों का वैचारिक रुख और पृष्ठभूमि

न्यायालय की बेंच में सोनिया सोतोमयोर और केतनजी ब्राउन जैक्सन दोनों को ही उदारवादी विचारधारा का मजबूत स्तंभ माना जाता है। दोनों ही न्यायमूर्तियों ने अपने अब तक के कार्यकाल में कई संवेदनशील मामलों के दौरान नागरिक अधिकारों और मतदान के हक की जोरदार पैरवी की है। सोनिया सोतोमयोर को अदालत के भीतर सामाजिक न्याय और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर मुखर आवाज के तौर पर देखा जाता है। वहीं दूसरी ओर, केतनजी ब्राउन जैक्सन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में बैठने वाली पहली अश्वेत महिला न्यायूर्ति हैं, जो इस सर्वोच्च पद पर पहुंचने से पहले अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स में अपनी सेवाएं दे चुकी थीं।

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केतनजी ब्राउन जैक्सन की तीखी असहमति और चुनावी अराजकता की आशंका

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केवल एक विशिष्ट रोक हटाए जाने के बावजूद दूसरी कानूनी रुकावटें अभी भी बरकरार हैं, जिसके चलते पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसी बीच जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन ने अपने साथियों के बहुमत वाले फैसले के विरोध में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि इस प्रकार के न्यायिक कदमों से आगामी अमेरिकी चुनावों के दौरान मतदान प्रक्रिया में भयंकर अव्यवस्था और असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।

संविधान और चुनावी व्यवस्था पर जैक्सन की कानूनी दलीलें

केतनजी ने अपने 23 पन्नों के विस्तृत असहमति नोट में विस्तार से समझाया कि यह मामला कानूनी रूप से बेहद सीधा था और अदालत को प्रशासन को मेल वोटिंग के मोर्चे पर आगे बढ़ने की छूट नहीं देनी चाहिए थी। उन्होंने अपने सहयोगी जजों पर व्यावहारिक वास्तविकताओं की अनदेखी करने का गंभीर आरोप भी लगाया। जैक्सन का कहना था कि यदि सरकार राज्यों के आंतरिक चुनावी ढांचे में दखल देने का प्रयास करती है, तो देश का संविधान इसकी कतई अनुमति नहीं देता है और इस तरह के कदमों को हरी झंडी देना एक भारी कानूनी भूल साबित होगी।

सोनिया सोतोमयोर की आपत्ति और नवंबर 2026 के चुनावों पर सवाल

जस्टिस केतनजी के साथ-साथ जस्टिस सोनिया सोतोमयोर ने भी सर्वोच्च अदालत के इस रुख के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका मानना था कि विभिन्न राज्यों को इस प्रकार के प्रशासनिक आदेशों को चुनौती देने के लिए अनावश्यक रूप से लंबा इंतजार नहीं करना चाहिए था। आज के इस फैसले के दायरे में इस बात पर गहराई से विचार नहीं किया गया है कि क्या नवंबर 2026 के चुनावों के दौरान राज्यों के स्वतंत्र प्रशासनिक कार्यों में राष्ट्रपति का दखल देना कानूनन वैध है या नहीं।

डोनाल्ड ट्रंप को मिली शुरुआती बढ़त और आगे की कानूनी राह

सर्वोच्च अदालत के इस हालिया फैसले के जरिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले अपने कार्यकारी आदेश को आगे बढ़ाने का एक अहम अवसर जरूर हासिल हुआ है। इसके बावजूद सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अदालत ने अभी तक इस बात पर मुहर नहीं लगाई है कि डोनाल्ड ट्रंप का संपूर्ण आदेश कानूनी और संवैधानिक कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं। संक्षेप में कहें तो इस कानूनी जंग में डोनाल्ड ट्रंप को भले ही शुरुआती बढ़त मिल गई हो, लेकिन अंतिम परिणाम आने में अभी काफी वक्त बाकी है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में क्या फैसला दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के नए मेल वोटिंग नियम पर लगी निचली अदालत की एक रोक को हटा दिया है।
इस फैसले के विरोध में कौन सी जस्टिस खड़ी थीं?
जस्टिस सोनिया सोतोमयोर और जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।
केतनजी ब्राउन जैक्सन ने अपनी असहमति में क्या आशंका जताई है?
उन्होंने चेतावनी दी है कि इस फैसले से इस साल होने वाले अमेरिकी चुनावों में अराजकता और अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
क्या डोनाल्ड ट्रंप का पूरा आदेश अब पूरी तरह लागू हो गया है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केवल एक रोक हटाई है और दूसरी रोक अभी भी कायम है, इसलिए अंतिम फैसला आना बाकी है।
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