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अदालत ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों की रोकी गई एंट्री फिर शुरू करने का दिया फैसलाअमेरिका
24 सित॰ 2026, 12:41 pm (2 घंटे पहले)· 0

अदालत ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों की रोकी गई एंट्री फिर शुरू करने का दिया फैसला

एक फेडरल जज ने तीन प्रमुख समाचार आउटलेट्स पर लगे व्हाइट हाउस प्रवेश प्रतिबंध पर रोक लगाते हुए पत्रकारों के प्रेस पास तत्काल प्रभाव से लौटाने का निर्देश जारी किया है।

वाशिंगटन की एक फेडरल अदालत ने तीन प्रमुख समाचार संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस से बाहर रखने के कार्यकारी फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सीएनएन, एमएस नॉउ और पोलिटिको पर लगाया गया यह प्रतिबंध संभवतः असंवैधानिक था। इस अंतरिम कानूनी हस्तक्षेप के बाद अमेरिकी प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित संवाददाताओं के प्रेस क्रेडेंशियल्स तुरंत प्रभाव से बहाल करे। मामले की सुनवाई करते हुए अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज टिम केली ने इस निष्कासन कार्रवाई पर चौदह दिनों की अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे संवाददाताओं को परिसर में तत्काल प्रवेश मिल सकेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा की दलीलों पर न्यायिक रुख

अदालत की कार्यवाही के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाने के कदम को सुरक्षा कारणों से उचित ठहराने का प्रयास किया था। न्याय विभाग के वकीलों का तर्क था कि यह निर्णय व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया था। हालांकि न्यायाधीश केली ने इस तर्क को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस तथ्यात्मक आधार मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि इन संस्थानों के प्रेस पास निरस्त करने से सुरक्षा मजबूत होती है या उन्हें पास लौटा देने से देश की सुरक्षा के लिए कोई गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।

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न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि प्रतिबंध लगाते समय खुद राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से कहा था कि इन तीन मीडिया संस्थानों को लगातार मनगढ़ंत बातें और झूठ नहीं लिखना या रिपोर्ट नहीं करना चाहिए। अदालत ने पाया कि प्रशासनिक स्तर पर लगाए गए प्रतिबंध का मूल कारण रिपोर्टिंग में फिक्शन और झूठ का आरोप था, जिसे अदालत में औपचारिक बचाव के तौर पर सुरक्षा के आवरण में पेश करने का प्रयास किया गया।

संवैधानिक अधिकारों के हनन की दी गई चुनौती

इस पूरे मामले की शुरुआत अठारह सितंबर को हुई थी जब तीन संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में आने से रोकने की औपचारिक घोषणा की गई थी। इसके ठीक अगले दिन उन्नीस सितंबर को प्रशासन ने इन संवाददाताओं के प्रेस पास वापस ले लिए और उन्हें आधिकारिक परिसर में दाखिल होने से रोक दिया गया। इस प्रशासनिक आदेश के विरुद्ध तीनों मीडिया संगठनों ने सोमवार को वाशिंगटन स्थित फेडरल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

मुकदमे में राष्ट्रपति और उनके प्रशासन के अन्य प्रमुख सदस्यों को पक्षकार बनाया गया था। वादी मीडिया आउटलेट्स ने तर्क दिया कि यह रोक अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की आजादी और स्वतंत्र प्रेस के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, बिना किसी निष्पक्ष प्रक्रिया के अचानक प्रवेश रद्द करना उचित कानूनी प्रक्रिया (ड्यू प्रोसेस) के संवैधानिक अधिकारों पर भी कुठाराघात है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि जब तक पूरे मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक के लिए एक अस्थायी रोक आदेश जारी कर व्हाइट हाउस परिसर में उनकी पत्रकारिता गतिविधियों को बहाल किया जाए।

मध्यावधि चुनावों और गिरती अप्रूवल रेटिंग का राजनीतिक संदर्भ

प्रेस स्वतंत्रता से जुड़ी यह तीखी कानूनी तकरार ऐसे नाजुक राजनीतिक दौर में सामने आई है जब अमेरिका में तीन नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। कुछ ही हफ्तों में होने वाले इन महत्वपूर्ण चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस पर अपना नियंत्रण कायम रखने के लिए संघर्ष कर रही है। देश का राजनीतिक माहौल पहले से ही कई जटिल चुनौतियों से घिरा हुआ है।

ओपिनियन पोल के ताजा आंकड़ों में राष्ट्रपति की जॉब अप्रूवल रेटिंग रिकॉर्ड निचले स्तर पर दर्ज की जा रही है। जनता के बीच बढ़ती महंगाई और ईरान युद्ध जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर भारी चिंताएं हैं। ऐसे में प्रमुख समाचार संगठनों के साथ शुरू हुई इस खुली कानूनी खींचतान और अदालत से आए प्रतिकूल फैसले ने चुनावी मुकाबले से ठीक पहले प्रशासनिक नीतियों पर नई बहस छेड़ दी है।

सवाल-जवाब

अदालत ने किन मीडिया आउटलेट्स के पत्रकारों का प्रवेश बहाल करने का आदेश दिया?
फेडरल अदालत ने सीएनएन, एमएस नॉउ और पोलिटिको के पत्रकारों का व्हाइट हाउस में प्रवेश बहाल करने और उनके प्रेस पास तुरंत वापस करने का आदेश दिया है।
यह फैसला किस न्यायाधीश ने सुनाया और क्या निर्देश दिए?
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज टिम केली ने यह आदेश जारी करते हुए अधिकारियों को 14 दिनों तक प्रतिबंध लागू करने से रोक दिया है।
प्रशासन ने पत्रकारों पर प्रतिबंध लगाने के पीछे क्या दलील दी थी?
प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर प्रतिबंध का बचाव किया था, लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड में इसका कोई तथ्यात्मक आधार न पाकर इसे खारिज कर दिया।
यह विवाद कब और कैसे शुरू हुआ था?
यह विवाद 18 सितंबर को प्रतिबंध की घोषणा और 19 सितंबर को पत्रकारों के प्रेस पास वापस लिए जाने के बाद शुरू हुआ, जिसे मीडिया संगठनों ने अदालत में चुनौती दी।
इस कानूनी विवाद के समय अमेरिका में क्या राजनीतिक परिस्थितियां हैं?
यह विवाद 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले छिड़ा है, जहां महंगाई और ईरान युद्ध की चिंताओं के बीच राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग रिकॉर्ड निचले स्तर पर है।
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