अमेरिका जाने की योजना बना रहे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए वीजा नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने अस्थायी तौर पर चलाए जा रहे वीजा बॉन्ड पायलट प्रोग्राम को अब स्थायी कानून का रूप दे दिया है। इस नए प्रावधान के तहत कुछ खास देशों के नागरिकों को अमेरिका का वीजा हासिल करने से पहले भारी-भरकम वित्तीय सुरक्षा बॉन्ड जमा करना होगा। यह व्यवस्था आगामी 3 अगस्त से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी। इस फैसले से उन यात्रियों पर सीधा असर पड़ेगा जो व्यापारिक या पर्यटन के मकसद से अमेरिका जाना चाहते हैं।
किन देशों और वीजा श्रेणियों पर लागू होगा यह नियम?
अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार, यह स्थायी नियम फिलहाल 50 देशों के नागरिकों पर लागू किया गया है। प्रभावित देशों में सबसे ज्यादा संख्या अफ्रीकी महाद्वीप के राष्ट्रों की है। हालांकि, भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल और भूटान को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है। भारतीय यात्रियों के लिए राहत की खबर यह है कि भारत का नाम इस 50 देशों की सूची में शामिल नहीं है, जिससे भारतीय नागरिकों को यह सिक्योरिटी बॉन्ड नहीं देना पड़ेगा।
यह नियम मुख्य रूप से व्यापारिक गतिविधियों के लिए आवेदन करने वाले B-1 वीजा और पर्यटन के लिए आवेदन करने वाले B-2 वीजा धारकों पर केंद्रित है। कांसुलर अधिकारियों को यह विशेषाधिकार दिया गया है कि वे आवेदक की स्थिति का आकलन करके तय करें कि उससे बॉन्ड लिया जाए या नहीं। इसका मतलब है कि संबंधित देश के हर आवेदक के लिए बॉन्ड जमा करना अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि यह पूरी तरह अधिकारी के विवेक पर निर्भर करेगा।
बॉन्ड की राशि और नियमों में क्या बदलाव हुए हैं?
जब अमेरिकी सरकार ने एक साल के लिए इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी, तब सुरक्षा बॉन्ड के रूप में 5 हजार डॉलर, 10 हजार डॉलर और 15 हजार डॉलर की तीन अलग-अलग श्रेणियां तय की गई थीं। अब स्थायी नियम लागू करते हुए 5 हजार डॉलर वाले शुरुआती विकल्प को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही बॉन्ड की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 20 हजार डॉलर (लगभग 19 लाख भारतीय रुपये) कर दिया गया है। अब पात्र आवेदकों से 10 हजार से लेकर 20 हजार डॉलर तक की राशि मांगी जा सकती है।
सरकार का तर्क और भविष्य की योजना
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि एक साल के ट्रायल रन के दौरान प्राप्त आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि वित्तीय बॉन्ड की शर्त से वीजा ओवरस्टे की समस्या पर प्रभावी अंकुश लगता है। वित्तीय जोखिम जुड़ा होने के कारण यात्री तय समय सीमा के भीतर देश छोड़ने और वीजा शर्तों का सख्ती से पालन करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन ने यह संकेत भी दिया है कि आने वाले समय में समीक्षा के आधार पर इस सूची में अन्य नए देशों को भी जोड़ा जा सकता है।
मानवाधिकार संगठनों का विरोध और नीतियां
इस फैसले के सामने आते ही इमिग्रेशन विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। आलोचकों का कहना है कि 19 लाख रुपये तक की अत्यधिक राशि का बॉन्ड मांगना आम यात्रियों के लिए अमेरिका की यात्रा को लगभग असंभव बना देगा। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीतियों का खामियाजा अब वैध यात्रियों को भी भुगतना पड़ रहा है। वीजा फीस में बढ़ोतरी, सोशल मीडिया खातों की गहन जांच और लगातार कड़े होते नियमों के कारण कानूनी प्रक्रिया से अमेरिका जाने वाले लोगों पर मानसिक और वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।



















