देश की समुद्री सुरक्षा में सेंध लगाने की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश करते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने दो संदिग्धों को अपनी गिरफ्त में लिया है। इस पूरे मामले में विशाखापत्तनम नौसेना बेस से जुड़े एक कर्मचारी और एक अनुबंध चालक को विदेशी खुफिया एजेंसी के लिए काम करने के गंभीर आरोपों में पकड़ा गया है। जांचकर्ताओं के अनुसार इस संदिग्ध जासूसी नेटवर्क के दायरे में कुल 18 लोग जांच के घेरे में आए हैं, जिनमें से 13 लोग सीधे तौर पर नौसेना के विभिन्न विभागों से ताल्लुक रखते हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा मानकर जांच को आगे बढ़ा रही हैं।
विशाखापत्तनम बेस से जुड़े दो प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस विभाग की ओर से मंगलवार को साझा किए गए आधिकारिक विवरण के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान प्रदीप मुखर्जी और अन्नम साई वरप्रसाद के रूप में हुई है। प्रदीप मुखर्जी विशाखापत्तनम स्थित नौसेना बेस में कार्यरत कर्मचारी हैं, जबकि अन्नम साई वरप्रसाद उसी परिसर में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के वाहनों का संचालन करने वाला एक कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवर है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य की काउंटर इंटेलिजेंस सेल को पुख्ता इनपुट प्राप्त हुए थे कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति पाकिस्तान के इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स यानी पीआईओ के साथ सीधे गोपनीय तालमेल में बने हुए हैं और देश की अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।
न्यायिक हिरासत में भेजे गए दोनों संदिग्ध
प्रारंभिक साक्ष्यों में इन दोनों आरोपियों की सक्रिय संलिप्तता स्पष्ट होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। प्रदीप मुखर्जी को हाल ही में तमिलनाडु के कोयंबटूर से हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद जांच टीम ने दोनों आरोपियों को विजयवाड़ा की एक स्थानीय अदालत में पेश किया। न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत ने दोनों को 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया। वर्तमान में प्रदीप मुखर्जी और अन्नम साई वरप्रसाद दोनों विजयवाड़ा की जिला जेल में बंद हैं, जहां उनसे जुड़े नेटवर्क के बारे में विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
ऑपरेशन फायरवॉल-2026 के तहत 10 राज्यों में तालमेल
इस बड़े जासूसी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए आंध्र प्रदेश काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने 10 राज्यों की पुलिस टीमों के साथ एक व्यापक संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसे 'ऑपरेशन फायरवॉल-2026' नाम दिया गया। जांच के दौरान सामने आया कि पाकिस्तानी एजेंटों के साथ संबंध रखने वाले संदिग्धों ने विशाखापत्तनम के सामरिक नौसैनिक ठिकानों के अलावा देश के अन्य हिस्सों की महत्वपूर्ण रक्षा जानकारियों को सीमा पार साझा किया था। गोपनीय सूचनाओं को भेजने के लिए एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनलों का सहारा लिया जा रहा था। सुरक्षा बलों ने आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद किए हैं और शेष संदिग्धों की भूमिका को लेकर जांच लगातार जारी है।



















