यूरोपीय देश फ्रांस में भड़की व्यापक अशांति, आगजनी और सुरक्षा संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की राजधानी पेरिस की मौजूदा स्थिति और वहां की जनसांख्यिकी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि फ्रांस सरकार की इमिग्रेशन नीति के कारण राजधानी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और यदि समय रहते उनकी चेतावनी पर ध्यान दिया गया होता, तो देश को इस गंभीर संकट और व्यापक हिंसा का सामना नहीं करना पड़ता।
इमिग्रेशन नीति और जनसांख्यिकी पर ट्रंप का कड़ा बयान
वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के मौजूदा हालातों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फ्रांस की इमिग्रेशन नीतियों के कारण पेरिस के सामाजिक ढांचे में अप्रत्याशित बदलाव आया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि फ्रांस की राजधानी बहुत जल्द एक मुस्लिम शहर में तब्दील हो जाएगी, जबकि ऐसी कोई व्यवस्था कभी तय नहीं की गई थी। ट्रंप ने रेखांकित किया कि दुनिया भर से बिना रोक-टोक लोगों को अपने देश में प्रवेश की अनुमति देना एक बहुत बड़ी प्रशासनिक भूल साबित हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ अपने पुराने संवाद का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने कई वर्ष पहले ही उन्हें इस नीतिगत खतरे से आगाह किया था। ट्रंप ने कहा, "वह मेरे दोस्त हैं, मैंने बहुत पहले कहा था कि दुनिया भर से हर किसी को आने देकर आप बड़ी गलती कर रहे हैं।" ट्रंप के अनुसार, बड़े पैमाने पर बिना कड़े नियमों के प्रवासियों को देश में बसने देना ही आज के टकराव और अस्थिरता की मुख्य जड़ बन चुका है।
पेरिस से नीस तक फैली हिंसा, कई शहरों में लगा कर्फ्यू
फ्रांस में यह अशांति उस वक्त चरम पर पहुंची जब बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के ऊंचे खर्च के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसके बाद सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और दुकानों में भारी लूटपाट की गई। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने राजधानी पेरिस के अलावा लिली और नीस जैसे प्रमुख शहरों में स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू लागू कर दिया है। इसके साथ ही कई संवेदनशील इलाकों में सार्वजनिक सभाओं और लोगों के एकत्र होने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
इस व्यापक उपद्रव ने देश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को गंभीर चोट पहुंचाई है। स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान हुआ है, जिससे आम जनता और व्यापारियों में सरकार की सुरक्षा व्यवस्था के प्रति भारी असंतोष फैल गया है। देश में आगामी राष्ट्रपति चुनावों से पहले सुरक्षा मोर्चे पर विफलता और जनता के इस बढ़ते गुस्से ने प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के नेतृत्व वाली सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
गृह मंत्री के इस्तीफे की पेशकश और मैक्रों का रुख
हिंसा पर काबू पाने के लिए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कुछ विशेष और अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बेहद सीमित कर्फ्यू लगाने का निर्देश जारी किया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य दंगों और संगठित लूटपाट की वारदातों को तत्काल रोकना है। कानून व्यवस्था के इस गंभीर संकट के बीच फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। हालांकि, देश में बने आपातकालीन माहौल और पुलिस बल के सुचारू संचालन को देखते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान संकट के समय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का नेतृत्व स्थिर रहना बेहद अनिवार्य है। उन्होंने लॉरेंट नुनेज को पद पर बने रहने का निर्देश देते हुए यह आदेश दिया कि खुफिया तंत्र की कथित चूकों और हिंसा की पूर्व साजिश का पता लगाने में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। इसके साथ ही मैक्रों ने पुलिस और सुरक्षा बलों को भविष्य में ऐसी अराजकता रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से नई रणनीतियां जमीन पर लागू करने का आदेश दिया है।
उपद्रवियों पर बड़ी कार्रवाई, ढाई हजार से अधिक गिरफ्तारियां
फ्रांसीसी प्रशासन ने उपद्रव और तोड़फोड़ में शामिल तत्वों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। देश भर के अलग-अलग शहरों से पुलिस अब तक 2,500 से अधिक उपद्रवियों को हिरासत में ले चुकी है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर संदिग्धों की धरपकड़ जारी है।
इस बीच, हालात की समीक्षा करते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में संदेश दिया कि सार्वजनिक शांति भंग करने वालों और सरकारी या निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मैक्रों ने कहा कि जिन भी लोगों ने तोड़फोड़ और बर्बरता की है, उन्हें इस भारी विनाश की पूरी भरपाई अपनी जेब से करनी होगी। सरकार ने कानून के उल्लंघन पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने का फैसला किया है।
























