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अरुणाचल प्रदेश मेंकेमिकल से केले पकाने का मामला, पुलिस ने शुरू की जांचअरुणाचल प्रदेश
10 सित॰ 2026, 11:21 am (1 घंटे पहले)· 2

अरुणाचल प्रदेश मेंकेमिकल से केले पकाने का मामला, पुलिस ने शुरू की जांच

अरुणाचल प्रदेश के न, हरलगुन इलाके में केमिकल के जरिए केले को कृत्रिम तरीके से पकाने का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने नाहरलगुन क्षेत्र में कथित रूप से केमिकल का इस्तेमाल करके केलों को तेजी से पकाने के मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी है।

यह जांच तब शुरू हुई जब पुलिस के सामने सोशल मीडिया पर एक वीडियो आया। इस वीडियो में कथित तौर पर केलों को समय से पहले पकाने के लिए एक संदिग्ध रासायनिक पदार्थ का उपयोग करते हुए दिखाया गया था। नाहरलगुन-ईटानगर कैपिटल रीजन के पुलिस अधीक्षक निएलम नेगा ने यह जानकारी दी है।

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एफआईआर दर्ज और कानूनी कार्रवाई

इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद नाहरलगुन पुलिस स्टेशन के अधिकारी के देव ने बुधवार को भारतीय न्याय संहिता और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत एक एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह कार्रवाई वीडियो के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए की गई है।

यह वीडियो कथित तौर पर नूरांग ताकर डोपुम द्वारा फेसबुक पर अपलोड किया गया था, जिसमें केलों पर कृत्रिम रूप से पकाने के लिए एक केमिकल एजेंट लगाने का दृश्य दिखाया गया था। इसी वीडियो ने पुलिस का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।

वैज्ञानिक जांच और आगे की कार्रवाई

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले उस संदिग्ध पदार्थ की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। इसकी असली संरचना और प्रकृति का पता लगाने के लिए जांच के तहत वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा।

इस जांच का उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना भी है जो इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि यदि यह मामला सही पाया जाता है, तो क्या इससे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ है और क्या यह जनस्वास्थ्य के लिए कोई गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

प्रशासन का कड़ा रुख

पुलिस अधीक्षक निएलम नेगा ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पुलिस सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर पूरी तरह सतर्क है और जहां भी जरूरत होगी, तुरंत कदम उठाया जाएगा।

फिलहाल इस मामले की पूरी छानबीन जारी है और वैज्ञानिक विश्लेषण की रिपोर्ट आने के बाद ही संदिग्ध पदार्थ की असलियत सामने आ पाएगी।

सवाल-जवाब

यह मामला किस जगह का है?
यह मामला अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन इलाके का है।
पुलिस ने जांच किस आधार पर शुरू की?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की है।
एफआईआर किस अधिकारी ने दर्ज की?
नाहरलगुन पुलिस स्टेशन के अधिकारी के देव ने एफआईआर दर्ज की है।
यह वीडियो किसने अपलोड किया था?
यह वीडियो कथित तौर पर नूरांग ताकर डोपुम द्वारा फेसबुक पर अपलोड किया गया था।
किस कानून के तहत मामला दर्ज हुआ है?
मामला भारतीय न्याय संहिता और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत दर्ज किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·50 मिनट पहले

अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन में सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर पुलिस का स्वतः संज्ञान लेना और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करना एक सराहनीय कदम है। यद्यपि रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट से ही संदिग्ध पदार्थ की प्रकृति स्पष्ट होगी, लेकिन यह मामला खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ के बड़े खतरे को उजागर करता है। ऐसे मामलों में केवल वीडियो आधारित कार्रवाई से आगे बढ़कर राज्यभर की मंडियों में औचक निरीक्षण और आपूर्ति तंत्र की गहरी मॉनिटरिंग की आवश्यकता है ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·49 मिनट पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह जरूरी है कि इस तरह के मामलों में सप्लाई चेन की फॉरेंसिक मैपिंग की जाए ताकि यह पता चल सके कि प्रतिबंधित या संदिग्ध केमिकल कहाँ से आयात हो रहे हैं। भारतीय न्याय संहिता और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत केवल स्थानीय प्राथमिकी से बात नहीं बनेगी, बल्कि जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि थोक विक्रेताओं के लाइसेंस और कोल्ड स्टोरेज की नियमित जाँच हो, अन्यथा स्थानीय स्तर पर ऐसे मिलावटखोर जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर और दीर्घकालिक संकट पैदा करते रहेंगे।

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