देश के बुनियादी ढांचे के विस्तार के तहत तैयार हो रहे नए एक्सप्रेसवे कॉरिडोर में नासिक और चेन्नई को जोड़ने वाले हाई-स्पीड मार्ग की प्रगति फिलहाल कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से रुक गई है। महाराष्ट्र के भीतर इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर होने वाली बिडिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर 30 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। हालांकि परियोजना के एक बड़े हिस्से के लिए जमीन जुटाने का काम तेजी से निपटाया गया है, लेकिन कुछ अहम जिलों में अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी न हो पाने की वजह से निर्माण कार्य को गति नहीं मिल सकी है।
महाराष्ट्र के प्रमुख जिलों में जमीन की स्थिति
परियोजना के महाराष्ट्र हिस्से पर नजर डालें तो नासिक से अक्कलकोट के बीच निर्माण कार्य शुरू करने से पहले जमीन जुटाने की प्रक्रिया चल रही है। इस खंड के तहत आने वाले सोलापुर और धाराशिव जिलों में प्रशासन ने लगभग 90 फीसदी भूमि अधिग्रहण का काम सफलता से पूरा कर लिया है। इसके उलट अहिल्यानगर और नासिक जिलों के कुछ चिन्हित क्षेत्रों में अब भी जमीन का अधिग्रहण पूरा होना बाकी है। इसी अधूरे काम को देखते हुए संबंधित अधिकारियों ने निर्माण की नीलामी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोकते हुए तारीख को 30 अक्टूबर तक बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि जमीन का पूरा पैच मिलने के बाद ही ठेका जारी किया जा सके।
नासिक से अक्कलकोट खंड का दायरा और दूरी में बचत
इस पूरे मार्ग का सबसे बड़ा और प्रमुख हिस्सा नासिक से अक्कलकोट के बीच प्रस्तावित है, जिसकी लंबाई करीब 374 किलोमीटर निर्धारित की गई है। वर्तमान सड़क नेटवर्क से इन दोनों स्थानों के बीच सफर करने पर वाहनों को लगभग 450 किलोमीटर का फासला तय करना पड़ता है। नए 6 लेन वाले एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद यह दूरी सीधे तौर पर 75 किलोमीटर घट जाएगी। इसके साथ ही यात्रा समय में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अभी इस सफर में यात्रियों को 10 घंटे से भी ज्यादा का समय खर्च करना पड़ता है, जबकि इस आधुनिक सड़क के बन जाने के बाद यह पूरी दूरी महज 4 घंटे में तय की जा सकेगी। इस खास हिस्से पर लगभग 19,142 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया है।
रूट में बदलाव और पांच राज्यों को मिलने वाला फायदा
शुरुआती योजना के अनुसार यह गलियारा सूरत से शुरू होकर चेन्नई तक जाना था, जिसकी कुल लंबाई करीब 1,271 किलोमीटर तय की गई थी। बाद में परियोजना की रूपरेखा में संशोधन करते हुए सूरत से नासिक वाले हिस्से को इससे अलग कर दिया गया। अब यह प्रोजेक्ट सीधे नासिक से शुरू होकर चेन्नई तक जाएगा और इसकी कुल दूरी 900 किलोमीटर रह गई है। यह 6 लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पांच राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु (चेन्नई) से होकर गुजरेगा। इस विशाल सड़क मार्ग के शुरू होने से न केवल अंतरराज्यीय माल ढुलाई सुगम होगी, बल्कि इन सभी राज्यों के बीच औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
लक्ष्य, वर्तमान प्रगति और आगे की चुनौतियां
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस पूरे 900 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को वर्ष 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना के अन्य हिस्सों की बात करें तो कर्नाटक और आंध्र प्रदेश को आपस में जोड़ने वाले 177 किलोमीटर के खंड पर निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। मौजूदा समय में नासिक से चेन्नई के बीच सामान्य रास्तों से लगभग 1,400 किलोमीटर का सफर तय करने में करीब 24 घंटे का वक्त लगता है। जब यह संपूर्ण एक्सप्रेसवे चालू हो जाएगा, तो यह सफर सिमटकर महज 9 से 10 घंटे का रह जाएगा। हालांकि महाराष्ट्र के महत्वपूर्ण हिस्से में भूमि अधिग्रहण पूरा न होने और टेंडर रुकने से परियोजना की तय समयसीमा पर दबाव बढ़ सकता है।



















