नेपाल में आई भीषण कुदरती आपदा ने देखते ही देखते हंसते-खेलते परिवारों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। कभी चहल-पहल और आर्थिक गतिविधियों से गुलजार रहने वाला नुवाकोट जिले का मशहूर त्रिशूली बाजार आज मलबे और वीराने में तब्दील हो चुका है। इस खौफनाक जल-तबाही ने दशकों से वहां अपना कारोबार जमाए बैठे भारतीय व्यापारियों की पूरी जिंदगी को एक ही झटके में उजाड़ दिया। उत्तर प्रदेश के रहने वाले कपड़ा व्यापारी अशोक कुमार चौरसिया इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक और भयावह चेहरा बनकर उभरे हैं, जिनके पास कभी करोड़ों की संपत्ति और विशाल व्यापार था लेकिन आज स्थिति ऐसी है कि वह दूसरों से मांगकर कपड़े पहनने और भोजन जुटाने को मजबूर हैं।
कुदरत के कहर में खाक हुआ 44 सालों का संघर्ष
अशोक कुमार चौरसिया मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के अंतर्गत आने वाले रसड़ा क्षेत्र के निवासी हैं। वह पिछले 44 वर्षों से नेपाल में रहकर कड़ी मेहनत के साथ अपना व्यापार चला रहे थे। त्रिशूली बाजार क्षेत्र में पिछले 20 सालों से उनकी विशाल दुकानें और गोदाम स्थित थे। नुवाकोट जिले में उनकी साख कपड़ों के सबसे बड़े थोक कारोबारियों में होती थी। उनका व्यापार आसपास के कई इलाकों में फैला हुआ था, लेकिन कुदरत के अचानक बरपे कहर ने उनके चार दशक से भी लंबे संघर्ष, जमा पूंजी और मेहनत के साम्राज्य को चंद मिनटों के भीतर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
20 मिनट में सब कुछ बहा ले गया भयानक सैलाब
आपदा वाले दिन का दर्दनाक मंजर याद करते हुए अशोक ने बताया कि वह रोज की तरह तड़के ही अपनी दुकानें खोलकर कारोबार की तैयारियों में जुट चुके थे। उसी समय स्थानीय पुलिस प्रशासन के जवानों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें चेतावनी दी कि नदी में जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहा है और तुरंत वहां से हटना जरूरी है। पुलिस की गंभीर चेतावनी सुनते ही अशोक तुरंत भागकर अपने घर पहुंचे और सो रहे परिवार के सदस्यों, पत्नी और बच्चों को जगाकर सुरक्षित ऊंचे स्थान पर ले जाने की कोशिश करने लगे। लेकिन पानी का बहाव इतना तेज और आक्रामक था कि लोगों को जरूरी सामान उठाने तक का वक्त नहीं मिला। शापुर बेसिस से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय करके सैलाब का पानी महज 20 मिनट के भीतर त्रिशूली बाजार तक आ पहुंचा और सबकुछ अपने साथ बहा ले गया।
45 करोड़ से अधिक का नुकसान और दो परिजनों की मौत
इस विनाशकारी सैलाब में अशोक कुमार चौरसिया की चार मुख्य दुकानें, चार विशाल गोदाम, उनकी एक मारुति कार और एक स्कूटी जलमग्न होकर पूरी तरह नष्ट हो गए। अशोक के शुरुआती आकलन के मुताबिक इस जल-तबाही में उन्हें 45 करोड़ रुपये से भी अधिक का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। संपत्ति और व्यापार के नुकसान से भी बड़ा आघात उन्हें व्यक्तिगत रूप से लगा है। इस बाढ़ के आक्रामक बहाव की चपेट में आने से उनके परिवार के दो बेहद करीबी सदस्यों, उनकी भाभी और भतीजे की दर्दनाक मौत हो गई।
दाने-दाने को मोहताज हुए 60 से अधिक भारतीय परिवार
कभी हर दिन लाखों रुपये का टर्नओवर देखने वाले व्यवसायी अशोक के पास इस त्रासदी के तुरंत बाद अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने या खाने के लिए ₹100 का नोट भी नहीं बचा था। आपदा के बाद परिवार में बचे कुल चार जीवित सदस्यों में से उन्होंने दो लोगों को सुरक्षित भारत स्थित अपने पैतृक घर भेज दिया है। त्रिशूली बाजार में अशोक की तरह ही लगभग 60 से अधिक भारतीय परिवार सालों से रहकर व्यापार कर रहे थे। आज उस पूरे बाजार में जगह-जगह क्षतिग्रस्त मकान, टूटी दीवारें और खंडहर बन चुकी दुकानें ही नजर आ रही हैं। जो व्यापारी कल तक दर्जनों लोगों को रोजगार देते थे और करोड़ों का कारोबार संभालते थे, वे आज खुद भोजन और कपड़ों जैसी बुनियादी मानवीय जरूरतों के लिए दूसरों की सहायता पर आश्रित हो चुके हैं।



















