गुवाहाटी स्थित असम इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल परिसर से स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। संस्थान के हॉस्टल नंबर 7 की छत पर रखी पानी की मुख्य टंकी में एक मृत बंदर पाए जाने के बाद 50 से अधिक छात्र अचानक बीमार पड़ गए। इस घटना के सामने आने के बाद समूचे कॉलेज परिसर में पेयजल सुरक्षा, स्वच्छता मानकों और बुनियादी रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बदबू आने पर खुली लापरवाही की पोल
इस पूरे मामले का खुलासा 2 नवंबर की शाम को हुआ, जब हॉस्टल नंबर 7 में रहने वाले छात्रों ने नलों से आने वाले पानी से असामान्य दुर्गंध आने की शिकायत की। छात्रों की लगातार शिकायतों के बाद जब कर्मचारियों ने पानी की मुख्य स्टोरेज टंकी का मुआयना किया, तो उसके भीतर एक बंदर का शव तैरता हुआ मिला। स्थिति का जायजा लेने पर सामने आया कि बंदर का शव लगभग एक हफ्ते से उस टंकी के अंदर पड़ा हुआ था।
दूषित पानी का खाना बनाने और पीने में इस्तेमाल
हॉस्टल के छात्र लगभग एक सप्ताह तक अनजाने में उसी दूषित पानी का इस्तेमाल अपनी दैनिक जरूरतों के लिए करते रहे। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि हॉस्टल मेस में छात्रों का भोजन पकाने के लिए भी इसी टंकी के दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही थी। इसके चलते हॉस्टल में रहने वाले कई विद्यार्थियों को पेट संबंधी गंभीर संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।
जालुकबारी अस्पताल में भर्ती कराए गए छात्र
स्वास्थ्य बिगड़ने पर 50 से अधिक छात्रों को तुरंत उपचार के लिए जालुकबारी स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचे छात्रों में से कुछ की हालत में सुधार हुआ है, जबकि कई अन्य छात्र अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में हैं। कुछ प्रभावित छात्रों को डिहाइड्रेशन और संक्रमण से उबारने के लिए इंट्रावेनस फ्लूइड्स चढ़ाए जा रहे हैं, वहीं कुछ अन्य छात्रों को दवाएं देकर उनके कमरों में आराम करने की सलाह दी गई है।
नियमित जांच और मेंटेनेंस पर उठे सवाल
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने कॉलेज प्रशासन की व्यवस्थाओं पर आक्रोश पैदा कर दिया है। छात्रों ने इस बात पर कड़ा रोष जताया है कि पीने और खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली पानी की टंकियों की नियमित जांच क्यों नहीं की जाती। हॉस्टल के निवासियों का कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में कई दिनों तक दूषित जल की आपूर्ति जारी रहना बेहद गंभीर विफलता है, जिससे सैकड़ों छात्रों का जीवन खतरे में पड़ गया।



















