असम भर के कैंसर मरीजों के लिए इलाज के खर्च में बड़ी राहत की राह खुली है। असम ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने राज्य के सभी दवा विक्रेताओं, अस्पतालों, डिस्ट्रीब्यूटरों और स्टॉकिस्टों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि 9 नवंबर से कैंसर की 137 नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं को घटे हुए अधिकतम खुदरा मूल्य पर ही बेचा जाए। केंद्र स्तर पर दवाओं के अनियंत्रित मुनाफे पर लगाम लगाने के मकसद से यह नियामक कदम उठाया गया है, ताकि आम परिवारों के लिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की दवाएं अधिक किफायती बन सकें।
ट्रेड मार्जिन पर 30 प्रतिशत की सीमा और गजट अधिसूचना
कीमतों में इस कटौती की शुरुआत नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी के 17 अक्टूबर को जारी आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन से हुई है। इस नियामक संस्था ने चयनित 137 एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर अधिकतम 30 प्रतिशत की सीमा तय की है। यह महत्वपूर्ण आदेश ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत लिया गया है, जो सार्वजनिक हित और आम जनता के कल्याण को देखते हुए कीमतों में सीधा हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
नियामक के इस नए आदेश के दायरे में इन चिन्हित दवाओं के वे सभी फॉर्मूलेशन आते हैं जो नॉन-शेड्यूल्ड श्रेणी में हैं। चाहे दवा को एकल घटक के रूप में बेचा जा रहा हो या फिर किसी अन्य दवा के संयोजन के रूप में, नई मूल्य सीमा पूरी तरह प्रभावी होगी। इसके अलावा पेटेंटेड दवाओं को भी इस मूल्य नियंत्रण के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे आधुनिक और महंगी दवाओं के दाम भी नियंत्रित रहेंगे।
राज्यव्यापी आदेश और 90 दिनों की जांच मुहिम
असम ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने अपने विस्तृत आदेश में कहा है कि रिटेल मेडिकल स्टोर, अस्पताल के डिस्पेंसरी, स्टॉकिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर 9 नवंबर की तय तारीख से ही नई घटी हुई दरें लागू करें। इसके साथ ही ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 25(3) के प्रावधानों के अनुरूप सभी प्रतिष्ठानों को अपनी दुकानों और काउंटरों पर संशोधित मूल्य सूची को प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है ताकि मरीज सीधे तौर पर नई दरों को देख सकें।
आदेश को कागजों से जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन ने पूरे असम में 90 दिनों का एक सघन निरीक्षण अभियान चलाने का ऐलान किया है। इस विशेष जांच दल का काम यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी मेडिकल स्टोर या निजी अस्पताल इन 137 दवाओं को निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर न बेचे। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चेताया है कि नियमों की अवहेलना करने वाले किसी भी विक्रेता या संस्थान पर ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर के साथ-साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नए मूल्य नियमों का पालन पूरी तरह अनिवार्य है और इसे तत्काल लागू करना होगा।
भारी मुनाफे पर रोक से 70 प्रतिशत तक घटेंगे दाम
इस राष्ट्रीय स्तर के हस्तक्षेप की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि आधिकारिक जांच में सामने आया था कि कई नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर रोधी दवाओं पर औसत ट्रेड मार्क-अप 170 प्रतिशत के करीब था। कई मामलों में तो यह मुनाफा 700 प्रतिशत तक की अत्यधिक ऊंचाई पर पहुंच रहा था। वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के इस मनमाने मुनाफे पर 30 प्रतिशत की सीमा तय होने से इन दवाओं के बाजार मूल्य में 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आने की उम्मीद जताई गई है।
इस मूल्य नियंत्रण सूची में शामिल 137 दवाएं विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार और आधुनिक इम्यूनोथेरेपी प्रोटोकॉल में बड़े पैमाने पर उपयोग की जाती हैं। इनमें निवोलुमैब, ओलापारिब, डेनोसुमैब और टोपोटेकन जैसी प्रमुख और नियमित रूप से लिखी जाने वाली जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं।
2019 के पिछले हस्तक्षेप का रिकॉर्ड
कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने का यह तरीका पहली बार नहीं अपनाया गया है। इससे पहले 2019 में भी नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने 42 कैंसर रोधी दवाओं पर 30 प्रतिशत का ट्रेड मार्जिन कैप लगाया था। उस समय किए गए इस नीतिगत सुधार के कारण 526 प्रमुख ब्रांड्स की दवाओं के दामों में 90 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई थी। इस पूरे कदम से जुड़ी विस्तृत अधिसूचना, प्रशासनिक आदेश और दवाओं की नई कीमतों का ब्योरा नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है।



















