असम के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को आगामी महीनों में बिजली के लिए अधिक भुगतान करना होगा। राज्य के बिजली नियामक असम विद्युत नियामक आयोग ने बिजली वितरण कंपनी को ईंधन और बिजली खरीद मूल्य समायोजन अधिभार के तहत लंबित लगभग 155.59 करोड़ रुपये की वसूली करने की हरी झंडी दे दी है। यह वसूली प्रक्रिया नवंबर 2026 से शुरू होकर मार्च 2027 तक चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
बाढ़ और अप्रत्याशित बाधाओं के कारण नियमों में छूट
असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने बकाया राशि की वसूली के लिए नियमों में ढील देने की मांग की थी। सामान्य नियमों के तहत किसी एक महीने का अधिभार दूसरे अगले महीने में बिल के साथ वसूला जाता है, जिसके अनुसार अप्रैल का समायोजन जून में, मई का जुलाई में और अगस्त का अक्टूबर में होना चाहिए था। वितरण कंपनी ने दलील दी कि राज्य में आई विनाशकारी बाढ़ और अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों की वजह से तय समय पर वसूली प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। आयोग ने इन आधारों को स्वीकार करते हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष के शेष महीनों में राशि एकत्र करने की अनुमति प्रदान कर दी।
पांच महीनों में तय की गई वसूली की रूपरेखा
वितरण कंपनी ने अप्रैल से अगस्त 2026 की पांच महीने की अवधि के दौरान बिजली खरीद और पारेषण लागत में आए उतार-चढ़ाव को इस वित्तीय घाटे का मुख्य कारण बताया है। पूरक बिलों को अलग रखकर करीब 156 करोड़ रुपये की यह बकाया राशि जमा हुई है। स्वीकृत योजना के तहत 3.81 प्रतिशत प्रति माह की प्रस्तावित दर पर राशि की वसूली की जाएगी।
महीनेवार वसूली का खाका इस प्रकार निर्धारित किया गया है
- नवंबर में 40.07 करोड़ रुपये की वसूली होगी।
- दिसंबर में 30.95 करोड़ रुपये एकत्र किए जाएंगे।
- जनवरी 2027 में 28.97 करोड़ रुपये जोड़े जाएंगे।
- फरवरी 2027 में 29.36 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
- मार्च 2027 में अंतिम किस्त के तौर पर 26.23 करोड़ रुपये वसूले जाएंगे।
कम खपत वाले परिवारों को राहत देने का प्रावधान
नियामक आयोग ने यह भी ध्यान दिलाया कि सितंबर 2026 के बाद से नियमित मासिक अधिभार भी जुड़ने लगेगा, जिससे कुल वित्तीय भार बढ़ सकता है। आम जनता, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर अचानक बड़ा वित्तीय बोझ न पड़े, इसके लिए वितरण कंपनी ने राहत की सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अंतर्गत जीवन धारा श्रेणी के उपभोक्ताओं और प्रति माह 120 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले घरेलू-ए परिवारों के लिए इस अधिभार की अधिकतम सीमा 0.05 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। इस सीमा से अधिक बिजली इस्तेमाल करने वाली अन्य सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर तय फॉर्मूले के अनुसार पूरा अधिभार लागू होगा।



















