असम में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को मोरीगांव जिले की सड़कों पर उतरकर एक विशाल राजनीतिक रैली का आयोजन किया। इस कार्यक्रम को 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' के मुख्य संदेश के साथ आयोजित किया गया, जिसका मकसद नई दिल्ली में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर किए जा रहे भारी विरोध का सीधा मुकाबला करना था। पार्टी के इस शक्ति प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए।
मोरीगांव में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और शक्ति प्रदर्शन
इस बड़े मार्च में असम प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया के साथ राज्य सरकार के मंत्री पीयूष हजारिका प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा मोरीगांव के स्थानीय विधायक रमा कांत देउरी, नगांव लोकसभा सीट से सांसद देवाशीष शर्मा और जिला बीजेपी अध्यक्ष राम प्रसाद सरकार सहित कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी भी मंच पर मौजूद रहे। रैली में भारी तादाद में पहुंचे पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन की राजनीतिक नीतियों और जनता के बीच मजबूत समर्थन का खुला प्रमाण बताया।
विपक्षी राजनीति पर नेतृत्व का तीखा हमला
जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने स्पष्ट किया कि मोरीगांव की सड़कों पर उमड़ी यह भीड़ कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के लिए एक सीधा संदेश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने या देश में राजनीतिक अस्थिरता फैलाने की किसी भी कोशिश को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभा के दौरान पार्टी नेताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, राजनीतिक स्थिरता और विकास में जनभागीदारी के महत्व पर विशेष जोर दिया।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और दिल्ली के घटनाक्रम का संदर्भ
इस राजनीतिक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा,
“The anarchists may create chaos, but nationalists give them back in equal measure kyuki hum Vote Chori nahi, Dil Chori karte hai!”
मुख्यमंत्री ने कहा कि मोरीगांव की जनता ने राष्ट्रीय राजधानी में गतिरोध पैदा करने की विपक्षी गठबंधन की कोशिशों के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा दिखाया है। यह पूरा टकराव विपक्षी गठबंधन के उस 'चलो दिल्ली' आंदोलन के बाद सामने आया, जिसमें चुनाव में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी।



















