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23 दिनों बाद टूटा वांगचुक का अनशन, नड्डा से मुलाकात बनी वजहबिहार
20 जुल॰ 2026, 6:31 pm (46 दिन पहले)· 0

23 दिनों बाद टूटा वांगचुक का अनशन, नड्डा से मुलाकात बनी वजह

जंतर मंतर पर 23 दिनों से जारी सोनम वांगचुक का अनशन सोमवार को खत्म हो गया, यह फैसला केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की सीजेपी प्रदर्शनकारियों से मुलाकात के तुरंत बाद आया।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को अपनी 23 दिन से चल रही भूख हड़ताल खत्म कर दी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की सीजेपी के प्रदर्शनकारियों से मुलाकात के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। जंतर मंतर पर लंबे समय से जारी अनशन की वजह से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी।

तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती

अनशन के दौरान सेहत खराब होने पर 18 जुलाई को वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके शरीर में पानी की भारी कमी यानी डिहाइड्रेशन, पोटैशियम का स्तर काफी नीचे गिरने और कीटोन का स्तर बढ़ने पर चिंता जताई थी। ये तीनों लक्षण लंबे उपवास के बाद शरीर पर पड़ने वाले गंभीर असर की ओर इशारा करते हैं, यही वजह रही कि डॉक्टरों की टीम उनकी हालत पर लगातार नजर रखे हुए थी।

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सीजेपी का प्रदर्शन और नड्डा से मुलाकात

सोनम वांगचुक जिस संगठन सीजेपी के बैनर तले जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे, उसे रिपोर्टों में 'कॉकरोच पार्टी' के नाम से भी संबोधित किया जा रहा है। सोमवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा सीजेपी के प्रदर्शनकारियों से मिले, जिसके तुरंत बाद वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही जंतर मंतर पर बना प्रदर्शन स्थल भी खाली करा लिया गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है और अब वे शिक्षा तथा स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जेपी नड्डा के साथ आगे बातचीत करेंगे।

क्या सरकार और सीजेपी के बीच कोई समझौता हुआ?

अनशन खत्म होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार और सीजेपी के बीच किसी तरह की डील हुई है। खबरों के मुताबिक सोनम वांगचुक ने पहले जो तीन शर्तें रखी थीं, उनमें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी, लेकिन अब सामने आई शर्तों की सूची से यह मांग गायब बताई जा रही है। इसी वजह से यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर किन शर्तों पर अनशन खत्म कराया गया।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

सीजेपी के इस प्रदर्शन को लेकर विपक्ष भी सरकार पर हमलावर रहा। समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने सोनम वांगचुक के अनशन पर तंज कसते हुए कहा, "भाजपा में अहंकार, क्या यही अमृत काल है?" उनका इशारा सरकार के रवैये की तरफ था, जिसकी वजह से वांगचुक को हफ्तों तक अनशन पर बैठना पड़ा।

भाजपा नेता का विवादित बयान

इससे पहले 17 जुलाई को एक भाजपा नेता ने सोनम वांगचुक को लेकर विवादित बयान दिया था। इस बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए चेतावनी के अंदाज में कहा गया था कि अगर हालात नहीं संभले तो स्थिति और बिगड़ सकती है। इस बयान के बाद सोनम वांगचुक के समर्थकों और विपक्षी नेताओं में नाराजगी देखी गई थी।

सवाल-जवाब

सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल कब और क्यों खत्म की?
उन्होंने सोमवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की सीजेपी प्रदर्शनकारियों से मुलाकात के बाद 23 दिन से चल रही भूख हड़ताल खत्म कर दी।
वांगचुक को अस्पताल में कब भर्ती कराया गया था?
तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 18 जुलाई को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टरों ने किन बातों पर चिंता जताई थी?
डॉक्टरों ने डिहाइड्रेशन, पोटैशियम का स्तर काफी कम होने और शरीर में कीटोन लेवल बढ़ने पर चिंता जताई थी।
सीजेपी क्या है?
सीजेपी वह संगठन है जिसके बैनर तले सोनम वांगचुक जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे, जिसे रिपोर्टों में 'कॉकरोच पार्टी' भी कहा जा रहा है।
क्या सरकार और सीजेपी के बीच कोई समझौता हुआ है?
यह अभी साफ नहीं है, हालांकि खबरों के मुताबिक वांगचुक की तीन मूल शर्तों में शामिल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग अब सामने आई सूची से गायब बताई जा रही है।
अभिजीत दीपके कौन हैं?
वे सीजेपी के संस्थापक हैं, जिन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है और अब शिक्षा व स्वास्थ्य मुद्दों पर जेपी नड्डा से बातचीत करेंगे।
अखिलेश यादव ने इस मामले पर क्या कहा?
उन्होंने कहा, 'भाजपा में अहंकार, क्या यही अमृत काल है?', और सरकार के रवैये पर सवाल उठाया।
जंतर मंतर पर प्रदर्शन स्थल का क्या हुआ?
वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद जंतर मंतर पर बना प्रदर्शन स्थल खाली करा लिया गया।
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