HDFC बैंक ने अपने कर्ज की लागत से जुड़े बेंचमार्क में फेरबदल करते हुए विभिन्न अवधियों के लिए MCLR दरों में 5 से 10 बेसिस पॉइंट्स तक की कमी की है। यह संशोधन 7 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है, जिससे उन कर्जधारकों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनके फ्लोटिंग-रेट लोन इस बेंचमार्क से जुड़े हुए हैं। इस ताजा कटौती के बाद बैंक की MCLR दरें घटकर 7.90% से 8.60% के दायरे में आ गई हैं। इस बदलाव से होम लोन, पर्सनल लोन और बिजनेस लोन समेत विभिन्न फ्लोटिंग-रेट सुविधाओं का लाभ उठा रहे ग्राहकों को फायदा हो सकता है, हालांकि ईएमआई में कमी आने की प्रक्रिया तुरंत नहीं होती है।
विभिन्न अवधियों के लिए नई दरें
HDFC बैंक ने कुल सात अवधियों के लिए अपनी दरों को संशोधित किया है। इनमें से चार अवधियों के लिए दरों में 10 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई है, जबकि बाकी तीन अवधियों के लिए दरों को 5 बेसिस पॉइंट्स घटाया गया है। ओवरनाइट MCLR को 8.00% से घटाकर 7.90% कर दिया गया है, जिसमें 10 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। एक महीने की अवधि का MCLR भी 8.00% से घटकर 7.90% पर आ गया है। तीन महीने की अवधि के लिए बेंचमार्क को 8.15% से 10 बेसिस पॉइंट्स कम करके 8.05% कर दिया गया है।
इसके अलावा, छह महीने की अवधि के लिए दर को 8.30% से 5 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 8.25% कर दिया गया है। एक साल की MCLR दर 8.40% से 5 बेसिस पॉइंट्स कम होकर 8.35% पर पहुंच गई है। दो साल की अवधि के लिए बेंचमार्क को 8.55% से 10 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 8.45% किया गया है। वहीं, तीन साल की MCLR दर को 8.65% से 5 बेसिस पॉइंट्स कम करके 8.60% तय किया गया है। इस प्रकार, ओवरनाइट और एक महीने की दरें 7.90% के साथ सबसे कम हैं, जबकि तीन साल की दर 8.60% पर सबसे अधिक बनी हुई है।
ब्याज दरों और ईएमआई पर इसका असर
बेंचमार्क दरों में यह गिरावट उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके कर्ज सीधे MCLR से जुड़े हुए हैं। जब व्यक्तिगत कर्जधारक के लिए संशोधित दर प्रभावी होती है, तो लागू ब्याज दर में कमी आ सकती है। हालांकि, यह लाभ तुरंत दिखाई नहीं देता है क्योंकि मौजूदा फ्लोटिंग-रेट लोन में एक निश्चित रीसेट साइकल होता है। इसका मतलब यह है कि नई दरें तभी लागू होती हैं जब लोन अपनी अगली निर्धारित रीसेट तिथि पर पहुंचता है। परिणामस्वरूप, एक जैसे लोन वाले दो अलग-अलग ग्राहकों को इस कटौती का फायदा अलग-अलग समय पर मिल सकता है, जो उनके रीसेट चक्र पर निर्भर करता है। इसके अलावा, अंतिम ब्याज दर लागू MCLR पर जोड़े जाने वाले स्प्रेड पर भी निर्भर करती है, इसलिए बेंचमार्क में कटौती का मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक की प्रभावी दर में ठीक उतनी ही कमी आएगी।
बेसिस पॉइंट का गणित और तकनीकी विवरण
वित्तीय भाषा में एक बेसिस पॉइंट यानी bps का मतलब एक प्रतिशत का सौवां हिस्सा होता है। 10 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का मतलब बेंचमार्क दर में 0.10 प्रतिशत की कमी है, जबकि 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती 0.05 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, एक साल की दर 8.40% से घटकर 8.35% होना 5 बेसिस पॉइंट्स की कमी है, और दो साल की दर का 8.55% से 8.45% होना 10 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट है। इन बदलावों को ईएमआई में सीधे 5% या 10% की कटौती के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि यह केवल बैंक की आंतरिक बेंचमार्क लागत से जुड़े हैं।



















