उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित बक्सीपुरा, चांदमारी, नौरैया और पहाड़ा पकड़ जैसे मोहल्लों के बाशिंदे बीते आठ से दस सालों से एक सुगम सड़क संपर्क के लिए जूझ रहे हैं। बड़ी रेल लाइन बिछाने के दौरान रेलवे प्रशासन ने यहां मौजूद क्रॉसिंग संख्या 41-C को स्थायी तौर पर बंद कर दिया था। इस एक फैसले ने तकरीबन पचास हजार लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद जटिल और कष्टकारी बना दिया है।
चंद कदमों की दूरी बनी घंटों की मशक्कत
इस क्रॉसिंग के बंद होने से पहले स्थानीय लोगों को बाजार या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने के लिए सिर्फ तीन सौ मीटर चलना पड़ता था। अब उसी गंतव्य तक पहुंचने के लिए लोगों को तीन से चार किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। यदि किसी के पास निजी वाहन न हो, तो स्टैंड पर ऑटो या सवारी गाड़ी के इंतजार में ही एक से डेढ़ घंटे का वक्त जाया हो जाता है। इस घुमावदार रास्ते की वजह से स्कूली बच्चों की बसें, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और आपातकालीन एंबुलेंस वक्त पर नहीं पहुंच पाती हैं।
इलाके के लोगों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने में हुई देरी और बंद रास्ते के कारण अब तक चार से पांच लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि कई सड़क दुर्घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। सबसे विकट स्थिति गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के सामने खड़ी होती है। रोजमर्रा का राशन लाने, बच्चों को छोड़ने या दवा लेने जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए स्थानीय महिलाओं को अक्सर जान जोखिम में डालकर बंद पड़ी पटरियों को लांघना पड़ता है।
प्रशासनिक चौखटों पर भटकती उम्मीदें
क्षेत्रीय स्तर पर लंबे समय से इस मांग को उठा रहे राष्ट्रीय हिंदू रक्षा मंच के जिला कार्यकारी अध्यक्ष बृजेश सनातनी के मुताबिक, ब्रॉडगेज लाइन के काम के समय से ही क्षेत्र के लोग लगातार संघर्ष कर रहे हैं। सनातनी ने कहा कि दस सालों से सांसद, विधायक, रेल मंत्री, रेल मंत्रालय और पीएमओ तक अर्जी लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो इस विशाल आबादी को उनके हाल पर बेसहारा छोड़ दिया गया है।
अपनी उपेक्षा से नाराज बाशिंदों ने हाल ही में धरना देकर भी विरोध प्रदर्शन किया था। स्थानीय लोगों का तर्क है कि जब बहराइच से रुपईडीहा के बीच बाकी कई स्थानों पर रेलवे ने अंडरपास या ओवरब्रिज जैसी सुविधाएं मुहैया कराई हैं, तो फिर उनकी पचास हजार की आबादी को इस हक से महरूम क्यों रखा गया।
अंडरपास या फ्लाईओवर की मांग पर अड़ी जनता
रेलवे की ओर से क्रॉसिंग बंद करते वक्त जो वैकल्पिक रास्ता दिया गया था, वह न केवल काफी दूर है बल्कि बेहद संकरा और अस्थायी प्रकृति का है। उस संकरे मार्ग पर हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है और लोगों का भारी समय बर्बाद होता है। क्षेत्रवासियों का स्पष्ट कहना है कि रेलवे फाटक संख्या 41-C के स्थान पर या तो एक अंडरपास तैयार किया जाए अथवा ऊपर से एक मजबूत फ्लाईओवर बनाया जाए। केवल इसी कदम से दमकल, एंबुलेंस और स्कूल वैन का सुरक्षित व निर्बाध आवागमन दोबारा बहाल हो सकेगा।



















