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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: थानेदार का बेशर्म बयान और गायब खोखों का खुलासाबिहार
21 जून 2026, 2:11 pm (45 दिन पहले)· 4

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: थानेदार का बेशर्म बयान और गायब खोखों का खुलासा

बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार ने एक वरिष्ठ पत्रकार के सामने कहा कि 'भरत की किस्मत में मरना लिखा था।' सरेंडर वाले वायरल वीडियो, 15 राउंड फायरिंग के तकनीकी विरोधाभास और गायब खोखों ने पुलिस की पूरी कहानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार के भोजपुर जिले के आरा में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक नया और चौंकाने वाला मोड़ लिया है। इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा झकझोरने वाली बात गोलियां नहीं, बल्कि एक पुलिस अधिकारी का वह बयान है जो उन्होंने एक वरिष्ठ पत्रकार से बातचीत में दिया। शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार ने पूरे इत्मीनान से कहा कि 'भरत की किस्मत में मरना लिखा था।' यह सुनकर खून ठंडा हो जाता है, क्योंकि यह वाक्य कहते वक्त उनके चेहरे पर न पछतावा था, न दुख और न किसी युवक को मौत के मुंह में धकेलने की ज़रा भी तकलीफ।

वर्दी के भीतर का अहंकार

राजेश मालाकार का यह रवैया उस सरकारी दावे की असलियत उजागर करता है, जो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार कानून के राज और मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर करती है। ऊपर से चाहे जितने दावे किए जाएं, जब थाने में बैठे एक अधिकारी को किसी की मौत पर ज़रा भी शर्म न हो, तो समझ आता है कि जमीनी हकीकत इन दावों से कितनी दूर है। एक वरिष्ठ पत्रकार के सामने इतनी सहजता से यह कह देना कि 'उसकी किस्मत में मरना लिखा था,' यह बताता है कि कुछ पुलिसकर्मियों के भीतर मानव जीवन के प्रति संवेदना बची ही नहीं है। यही संवेदनहीनता इस एनकाउंटर की पूरी तस्वीर को एक सुनियोजित हत्या की ओर ले जाती है।

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15 राउंड का दावा और पिस्तौल की तकनीकी सच्चाई

थानाध्यक्ष ने अपनी आत्मरक्षा की कहानी को सच साबित करने की कोशिश में दावा किया कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर पूरे 15 राउंड गोलियां चलाई थीं। लेकिन यहीं से उनकी कहानी में एक बड़ी और अनदेखी न होने वाली दरार पड़ती है। हथियारों के जानकारों के अनुसार एक सामान्य या प्रतिबंधित बोर की सिंगल पिस्तौल की मैगजीन में आमतौर पर 6 से 8 कारतूस ही आते हैं। ऐसे में एक ही पिस्तौल से 15 राउंड फायरिंग करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। रक्षा विशेषज्ञ भी इस दावे पर सकते में हैं और भोजपुर पुलिस कप्तान की जांच टीम के सामने यह सवाल अब एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

गायब खोखे और बिखरती पुलिसिया दलील

एक पल के लिए मान लीजिए कि 15 राउंड फायरिंग हुई भी थी। तो सबसे पहला सवाल यह उठता है कि उन 15 गोलियों के जो खोखे भरत की पिस्तौल से निकलते, वे कहां हैं? एनकाउंटर की जगह पर जांच टीम को ये खोखे क्यों नहीं मिले? अगर मिले थे तो पुलिस को इन्हें सबूत के तौर पर सामने रखना चाहिए। और अगर नहीं मिले, तो 15 राउंड फायरिंग की पूरी कहानी सिर्फ एक कागजी दास्तान बनकर रह जाती है जो थाने में बैठकर लिखी गई, वर्दी को बचाने के लिए।

सरेंडर वीडियो और कस्टोडियल किलिंग का मामला

राजेश मालाकार की एनकाउंटर वाली कहानी उस वक्त पूरी तरह धराशायी होती दिखती है, जब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को देखा जाता है। उस वीडियो में भरत भूषण तिवारी पुलिस के सामने अपने हथियार डालते और पूरी तरह आत्मसमर्पण करते साफ दिख रहे हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि एक ऐसे व्यक्ति पर जो पहले ही निहत्था हो चुका हो और सरेंडर कर चुका हो, चार-चार गोलियां दागना एनकाउंटर नहीं, बल्कि 'कस्टोडियल किलिंग' का साफ मामला है। ये जानकार यह भी कहते हैं कि पुलिस की वर्दी सिर्फ ताकत का प्रतीक नहीं होती, उसके साथ संयम और मानवीय संवेदनशीलता की जिम्मेदारी भी आती है। जांच पूरी होने तक एक जिम्मेदार अधिकारी को तथ्यों पर बात करनी चाहिए, न कि ऐसे बयान देने चाहिए जो निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े कर दें।

असली सवाल कानून के शासन का है

भरत तिवारी की मौत एनकाउंटर थी या नहीं, इसका जवाब मीडिया नहीं दे सकती, सोशल मीडिया नहीं दे सकती और पुलिस तो बिल्कुल नहीं। इसका फैसला सिर्फ निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया करेगी। लेकिन इस पूरे मामले में जो बात दिल को सबसे गहरी चोट देती है, वह यह है कि जब किसी एनकाउंटर पर इतने गंभीर सवाल उठ रहे हों, उस समय एक पुलिस अधिकारी सार्वजनिक रूप से यह कह रहा हो कि 'उसकी किस्मत में मरना लिखा था।' लोकतंत्र में किसी नागरिक की जिंदगी और मौत का फैसला कानून की किताब करती है, किसी थानेदार की निजी सोच नहीं।

सवाल-जवाब

राजेश मालाकार ने भरत तिवारी की मौत के बारे में क्या कहा?
शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार ने एक वरिष्ठ पत्रकार से बातचीत में कहा कि 'भरत की किस्मत में मरना लिखा था,' और उनके चेहरे पर पछतावे का कोई भाव नहीं था।
15 राउंड फायरिंग का दावा क्यों संदिग्ध है?
एक साधारण या प्रतिबंधित बोर की सिंगल पिस्तौल की मैगजीन में आमतौर पर केवल 6 से 8 कारतूस होते हैं, इसलिए एक ही पिस्तौल से 15 राउंड फायरिंग तकनीकी रूप से संभव नहीं है।
एनकाउंटर साइट से खोखे क्यों नहीं मिले?
अगर भरत तिवारी ने वाकई 15 राउंड फायरिंग की होती तो मौके पर 15 खोखे जरूर मिलते, लेकिन जांच टीम को ये खोखे नहीं मिले, जो पुलिस के दावे पर गंभीर सवाल उठाता है।
वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भरत भूषण तिवारी पुलिस के सामने अपने हथियार डालते और पूरी तरह आत्मसमर्पण करते साफ नजर आ रहे हैं।
कस्टोडियल किलिंग क्या होती है?
कानून के जानकारों के अनुसार एक निहत्थे और सरेंडर किए हुए व्यक्ति पर गोलियां दागना एनकाउंटर नहीं बल्कि 'कस्टोडियल किलिंग' का मामला बनता है।
भरत तिवारी पर कितनी गोलियां दागी गईं?
कानूनी जानकारों के हवाले से इस मामले में बताया गया है कि भरत तिवारी पर चार-चार गोलियां दागी गई थीं।
इस मामले में किस सरकार पर सवाल उठ रहे हैं?
बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर सवाल उठ रहे हैं, जो कानून के राज और मानवाधिकारों की रक्षा का दावा करती है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
कानूनी और मीडिया जगत की नजर अब एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पर है, जो तय करेगी कि यह एनकाउंटर था या कस्टोडियल किलिंग।
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