पड़ोसी देश भूटान ने एक अत्यंत विशिष्ट कदम उठाते हुए भारत के साथ अपनी अटूट मित्रता को एक नया आध्यात्मिक आयाम प्रदान किया है। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में तैयार किए गए कुल 108 पवित्र स्तूपों की श्रृंखला में से 76वें स्तूप को आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में समर्पित किया गया है। यह पहल दोनों राष्ट्रों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संपर्कों और द्विपक्षीय साझेदारी के प्रभाव को दर्शाती है।
समारोह में पट्टिका का विधिवत अनावरण
इस ऐतिहासिक उपलक्ष्य पर 1 नवंबर को एक गरिमापूर्ण आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें इस विशेष समर्पण को चिह्नित करने वाली पट्टिका जनता के सामने रखी गई। इस अहम क्षण पर भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू इस अनावरण समारोह का हिस्सा बने। दोनों नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन के द्विपक्षीय महत्व को और अधिक उजागर किया।
भूटानी राजशाही का यह भाव दोनों मुल्कों के बीच सिर्फ सरकारी या कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित संबंधों से आगे बढ़कर एक पारिवारिक आत्मीयता को दर्शाता है। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर लाने के लिए भारत की ओर से लगातार मिले रचनात्मक और व्यावहारिक सहयोग के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के उद्देश्य से यह सम्मान दिया गया है।
प्रधानमंत्री की ओर से कृतज्ञता का संदेश
इस अद्वितीय सम्मान की घोषणा के पश्चात भारतीय प्रधानमंत्री ने भूटान के नरेश तथा वहां के नागरिकों के प्रति हार्दिक धन्यवाद प्रकट किया। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि यह स्तूप महज पत्थर या गारे से गढ़ी गई कोई इमारत नहीं है। उनके शब्दों में, यह दोनों पड़ोसी समाजों की साझा दार्शनिक विरासत और लंबे समय से चली आ रही स्थायी मैत्री का जीवंत प्रतीक बनकर उभरेगा।
साझा मूल्यों और भविष्य की साझेदारी का प्रतीक
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी की संकल्पना एक ऐसे भावी नगरीय केंद्र के रूप में की जा रही है, जो पर्यावरणीय संतुलन, सस्टेनेबिलिटी और मानसिक शांति के सिद्धांतों पर आधारित हो। इस प्रकार के दूरदर्शी शहरी विकास अभियान के केंद्र में भारतीय नेतृत्व के प्रति ऐसा आदर व्यक्त किया जाना क्षेत्रीय कूटनीति में आध्यात्मिक सौहार्द की मिसाल पेश करता है। दोनों देशों के बीच सहयोग का यह दृष्टिकोण आने वाले दशकों में सीमा पार शांति, विकास और जन-जन के आपसी जुड़ाव को नई मजबूती देगा।



















