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बिहार दारोगा भर्ती रद्द होने पर पटना में फूटा सफल छात्रों का गुस्सा, बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ेबिहार
5 अक्तू॰ 2026, 2:34 pm (1 घंटे पहले)· 0

बिहार दारोगा भर्ती रद्द होने पर पटना में फूटा सफल छात्रों का गुस्सा, बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़े

बिहार में 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ सफल अभ्यर्थी पटना की सड़कों पर उतर आए और बैरिकेड तोड़कर डाक बंगला चौराहे की ओर कूच किया।

बिहार की राजधानी पटना में दारोगा भर्ती परीक्षा को रद्द किए जाने के निर्णय के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। सरकार द्वारा परीक्षा निरस्त किए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं। इस फैसले से विशेष रूप से वे छात्र गहरे आक्रोश में हैं, जिन्होंने परीक्षा पास कर ली थी। प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस द्वारा लगाए गए सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर दिया और नारेबाजी करते हुए डाक बंगला चौराहे की तरफ कूच कर गए।

सड़क पर उतरे सफल अभ्यर्थी, सुरक्षा बलों से तीखी झड़प

प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जगह-जगह भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने से रोकने के हरसंभव प्रयास किए, लेकिन गुस्साए छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कड़े पहरे के बीच आंदोलनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी। डाक बंगला चौराहे की ओर बढ़ रहे छात्रों का कहना है कि परीक्षा में सफल होने के बाद भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द कर देना उनकी मेहनत पर पानी फेरने जैसा है।

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अनियमितताओं के आरोपों के बाद निरस्त हुआ था इम्तिहान

यह विवाद दारोगा भर्ती के लिए 27 मई को आयोजित की गई लिखित परीक्षा से जुड़ा है। यह परीक्षा दो पालियों में संपन्न कराई गई थी। हालांकि, परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद से ही इसमें बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक होने के गंभीर आरोप लगने लगे थे। छात्रों का एक बड़ा वर्ग लगातार मामले की निष्पक्ष जांच कराने और परीक्षा को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहा था। विवाद गहराने और व्यापक विरोध को देखते हुए आखिरकार प्रशासन ने परीक्षा को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। परीक्षा रद्द होने के बाद अब स्थिति उलट गई है और सफल उम्मीदवार इस फैसले के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं।

1,799 पदों की बहाली पर महीनों से चल रहा था टकराव

बिहार पुलिस में दारोगा के कुल 1,799 रिक्त पदों को भरने के लिए इस भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत की गई थी। परीक्षा के आयोजन के बाद से ही पटना में कई दौर के उग्र प्रदर्शन देखने को मिले थे। पेपर लीक का आरोप लगाने वाले अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच पूर्व में भी झड़पें हुई थीं। अपनी मांगों के समर्थन में छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू की थी और 15 सितंबर को 1,799 पदों की मुख्य परीक्षा रद्द कराने के लिए मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की घोषणा भी की थी। छात्रों के लंबे आंदोलन के दबाव में परीक्षा तो रद्द कर दी गई, लेकिन अब भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकने से दोनों पक्षों के बीच विवाद और गहरा गया है।

सवाल-जवाब

पटना में दारोगा भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थी क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
अभ्यर्थी दारोगा भर्ती परीक्षा को अनियमितताओं के आरोपों के चलते रद्द किए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं।
इस भर्ती परीक्षा के जरिए कुल कितने पदों को भरा जाना था?
इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 1,799 दारोगा पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं।
दारोगा भर्ती की लिखित परीक्षा कब आयोजित की गई थी?
यह लिखित परीक्षा 27 मई को दो पालियों में आयोजित की गई थी।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी पटना में किस प्रमुख चौराहे की ओर बढ़ रहे हैं?
सुरक्षा घेरा और बैरिकेड तोड़कर अभ्यर्थी पटना के डाक बंगला चौराहे की तरफ बढ़ रहे हैं।
परीक्षा रद्द होने से पहले अभ्यर्थियों ने किस दिन मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी दी थी?
अभ्यर्थियों ने 15 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास के घेराव का ऐलान किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 मिनट पहले

जो लोग पास हो गए थे, उनका गुस्सा जायज है, लेकिन पूरी परीक्षा ही रद्द करना बिना किसी ठोस जांच के समझ नहीं आया। पेपर लीक वालों पर कार्रवाई होती, सबको क्यों डुबोया?

Ravikash Gupta@ravikash·9 मिनट पहले

अर्जुन जी, बात तो सही है आपकी। धांधली करने वालों को पकड़ना चाहिए था, पूरी परीक्षा रद्द होने से तो उन बच्चों की मेहनत बर्बाद हो गई जो सच में पढ़कर पास हुए थे।

Rohan Verma@rohan-verma·29 मिनट पहले

इन छात्रों की मेहनत और लाठियां खाने की तस्वीरें देखकर पुराना दौर याद आ जाता है, जब हम भी परीक्षा रद्द होने पर सड़कों पर धक्के खाते थे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 मिनट पहले

रोहन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है, सड़कों पर यूं धक्के खाना वाकई बहुत दर्दनाक होता है।

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