बिहार की राजधानी पटना में दारोगा भर्ती परीक्षा को रद्द किए जाने के निर्णय के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। सरकार द्वारा परीक्षा निरस्त किए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं। इस फैसले से विशेष रूप से वे छात्र गहरे आक्रोश में हैं, जिन्होंने परीक्षा पास कर ली थी। प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस द्वारा लगाए गए सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर दिया और नारेबाजी करते हुए डाक बंगला चौराहे की तरफ कूच कर गए।
सड़क पर उतरे सफल अभ्यर्थी, सुरक्षा बलों से तीखी झड़प
प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जगह-जगह भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने से रोकने के हरसंभव प्रयास किए, लेकिन गुस्साए छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कड़े पहरे के बीच आंदोलनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी। डाक बंगला चौराहे की ओर बढ़ रहे छात्रों का कहना है कि परीक्षा में सफल होने के बाद भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द कर देना उनकी मेहनत पर पानी फेरने जैसा है।
अनियमितताओं के आरोपों के बाद निरस्त हुआ था इम्तिहान
यह विवाद दारोगा भर्ती के लिए 27 मई को आयोजित की गई लिखित परीक्षा से जुड़ा है। यह परीक्षा दो पालियों में संपन्न कराई गई थी। हालांकि, परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद से ही इसमें बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक होने के गंभीर आरोप लगने लगे थे। छात्रों का एक बड़ा वर्ग लगातार मामले की निष्पक्ष जांच कराने और परीक्षा को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहा था। विवाद गहराने और व्यापक विरोध को देखते हुए आखिरकार प्रशासन ने परीक्षा को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। परीक्षा रद्द होने के बाद अब स्थिति उलट गई है और सफल उम्मीदवार इस फैसले के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं।
1,799 पदों की बहाली पर महीनों से चल रहा था टकराव
बिहार पुलिस में दारोगा के कुल 1,799 रिक्त पदों को भरने के लिए इस भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत की गई थी। परीक्षा के आयोजन के बाद से ही पटना में कई दौर के उग्र प्रदर्शन देखने को मिले थे। पेपर लीक का आरोप लगाने वाले अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच पूर्व में भी झड़पें हुई थीं। अपनी मांगों के समर्थन में छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू की थी और 15 सितंबर को 1,799 पदों की मुख्य परीक्षा रद्द कराने के लिए मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की घोषणा भी की थी। छात्रों के लंबे आंदोलन के दबाव में परीक्षा तो रद्द कर दी गई, लेकिन अब भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकने से दोनों पक्षों के बीच विवाद और गहरा गया है।























