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पूर्णिया में वृद्धाश्रम पहुंचे डीएम अंशुल कुमार, बुजुर्ग महिला ने प्यार से मांगा चाट और फुचकाबिहार
5 अक्तू॰ 2026, 12:20 pm (27 मिनट पहले)· 0

पूर्णिया में वृद्धाश्रम पहुंचे डीएम अंशुल कुमार, बुजुर्ग महिला ने प्यार से मांगा चाट और फुचका

बिहार के पूर्णिया में वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम अंशुल कुमार से एक बुजुर्ग महिला ने चाट और फुचके की मांग कर दी। अधिकारी ने भी तुरंत उनकी यह इच्छा पूरी करने का भरोसा दिया।

प्रशासनिक अधिकारियों के दौरों के दौरान अमूमन फाइलों की जांच, सख्त समीक्षा और गंभीर चेहरे ही देखने को मिलते हैं। आम नागरिक भी अफसरों के सामने आते वक्त अक्सर किसी शिकायत, पेंशन की अर्जी या झिझक के साथ ही पेश आते हैं। हालांकि, बिहार के पूर्णिया जिले से सामने आई एक घटना ने इस पारंपरिक छवि को पूरी तरह बदल दिया है। पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार जब हाल ही में एक वृद्धाश्रम का हालचाल जानने पहुंचे, तो वहां मौजूद एक बुजुर्ग महिला ने उनसे किसी सरकारी दफ्तर के काम या योजना की शिकायत करने के बजाय बड़ी मासूमियत से चाट और फुचका खिलाने की मांग रख दी।

वृद्धाश्रम के निरीक्षण के दौरान सामने आया आत्मीय पल

पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार जिले के एक वृद्धाश्रम में औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य वहां रहने वाले वृद्धजनों की रहन-सहन की स्थिति, सुविधाओं और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लेना था। आमतौर पर ऐसे दौरों में प्रशासनिक अमला सिर्फ औपचारिक खानापूर्ति और व्यवस्थाओं के मुआयने तक सीमित रहता है। इसके विपरीत, जिलाधिकारी ने आश्रम में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के बीच बैठकर उनसे सीधे बातचीत शुरू की और उनके हालचाल पूछे।

इसी संवाद के दौरान एक बुजुर्ग महिला ने बिना किसी संकोच के डीएम साहब से बड़े अपनेपन के साथ पूछ लिया कि वे उन्हें चाट और फुचका कब खिला रहे हैं। पेंशन या बुनियादी सुविधाओं की जगह सीधे चाट-गोलगप्पे की फरमाइश सुनकर वहां उपस्थित सभी लोग और खुद जिलाधिकारी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। इस निश्छल मांग पर डीएम अंशुल कुमार ने भी फौरन आत्मीयता दिखाते हुए जवाब दिया कि वे आज ही और अभी उन्हें यह दावत खिलाएंगे। सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस पल को लोग बेहद पसंद कर रहे हैं।

श्रम विभाग के कर्मचारी के बेटे से आईएएस बनने का सफर

प्रशासन में अपनी खास कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले अंशुल कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उनके पिता गाजियाबाद के श्रम विभाग में कार्यरत थे। अपने पिता के सपने को साकार करने की प्रेरणा लेकर उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी तकनीकी शिक्षा प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNNIT) से पूरी की, जहां से उन्होंने बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी।

उनकी मेहनत का पहला नतीजा 2014 में सामने आया जब उन्होंने एसएससी परीक्षा उत्तीर्ण की और एक्साइज इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हुए। सरकारी सेवा में आने के बावजूद उनका मुख्य लक्ष्य यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा को पास करना ही रहा। आखिरकार उनकी लगन रंग लाई और 2015 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने 293वीं रैंक प्राप्त की, जिसके बाद उन्हें 2016 बैच के तहत बिहार कैडर आवंटित हुआ। इसी परीक्षा सत्र में उनकी योग्यता का एक और प्रमाण देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय वन सेवा की परीक्षा में भी 97वीं रैंक हासिल की थी।

संवेदनशीलता और जनता के साथ भरोसे का रिश्ता

प्रशासनिक व्यवस्था में जब उच्च पदस्थ अधिकारी जनता के इतने निकट पहुंच जाते हैं कि आम लोग बिना किसी हिचक या भय के अपनी बात कह सकें, तो व्यवस्था और समाज के बीच दूरी मिट जाती है। पूर्णिया के वृद्धाश्रम की यह घटना बताती है कि प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल नियमों और कागजों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके केंद्र में मानवीय संवेदनशीलता भी होनी चाहिए। जब कोई अफसर लोगों के बीच जाकर उनके सुख-दुख को साझा करता है, तो शासन के प्रति जनता का विश्वास और गहरा होता है।

सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे अभ्यर्थियों के लिए भी यह प्रसंग एक अहम संदेश देता है। बड़ी डिग्रियां हासिल करने और कठिन परीक्षाएं पास करने के साथ-साथ एक संवेदनशील इंसान बनना प्रशासनिक सेवा की सबसे बड़ी जरूरत है। जनता की समस्याओं को समझकर उनके साथ सहज संबंध बनाना ही एक कुशल अधिकारी की असली पहचान होती है, जिसकी मिसाल इस वाकये में देखने को मिली।

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सवाल-जवाब

पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार वृद्धाश्रम क्यों गए थे?
वे वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण करने और वहां रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के रहन-सहन और सुविधाओं का हालचाल जानने पहुंचे थे।
बुजुर्ग महिला ने डीएम साहब से क्या मांग की?
बुजुर्ग महिला ने किसी सरकारी शिकायत के बजाय डीएम साहब से बड़े अपनेपन से चाट और फुचका (गोलगप्पे) खिलाने की जिद की।
बुजुर्ग महिला की बात पर डीएम अंशुल कुमार ने क्या जवाब दिया?
महिला की मासूमियत भरी मांग सुनकर डीएम हंस पड़े और उन्होंने तुरंत कहा कि वे आज ही और अभी उन्हें चाट-फुचका खिलाते हैं।
आईएएस अंशुल कुमार ने यूपीएससी में कौन सी रैंक हासिल की थी?
अंशुल कुमार ने 2015 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 293वीं रैंक हासिल की थी और उन्हें बिहार कैडर मिला।
सिविल सेवा में आने से पहले अंशुल कुमार किस पद पर कार्यरत थे?
2014 में एसएससी परीक्षा पास करने के बाद वे एक्साइज इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हुए थे।
अंशुल कुमार ने अपनी उच्च शिक्षा कहां से पूरी की थी?
उन्होंने प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNNIT) से बीटेक की डिग्री प्राप्त की थी।
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