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बिहार के लखीसराय में फूलों की खेती को बढ़ावा, रामगढ़ और चानन में 50 फीसदी सरकारी मदद से तैयार होगा फ्लावर विलेजबिहार
11 अक्तू॰ 2026, 5:24 pm (2 घंटे पहले)· 0

बिहार के लखीसराय में फूलों की खेती को बढ़ावा, रामगढ़ और चानन में 50 फीसदी सरकारी मदद से तैयार होगा फ्लावर विलेज

लखीसराय जिले के रामगढ़ और चानन प्रखंड में 25 हेक्टेयर क्लस्टर के तहत गेंदे की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत किसानों को प्रति हेक्टेयर लागत पर 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 40 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी।

बिहार का लखीसराय जिला अब पारंपरिक फसलों के अलावा बागवानी के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान स्थापित करने की ओर कदम बढ़ा रहा है। उद्यान निदेशालय की विशेष कार्ययोजना के तहत जिले में गेंदे के फूलों की व्यापक खेती के लिए कमर कसी गई है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में फूलों के उत्पादन को बढ़ावा देकर स्थानीय किसानों की आमदनी में ठोस इजाफा करना है। बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा के गृह जिले के रूप में पहचाने जाने वाले लखीसराय को इस सरकारी पहल से सीधे तौर पर जोड़ा गया है, जिससे किसानों को बड़े पैमाने पर आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है।

गेंदे की खेती पर लागत और मिलने वाली सरकारी आर्थिक मदद

गेंदे के फूलों की खेती को व्यावहारिक और लाभदायक बनाने के लिए सरकार ने वित्तीय सहायता का एक ढांचा तैयार किया है। जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन के अनुसार, राज्य सरकार ने प्रति हेक्टेयर गेंदे की खेती के लिए 80 हजार रुपये की कुल अनुमानित लागत तय की है। इस निर्धारित लागत पर पात्र किसानों को 50 प्रतिशत तक का सरकारी अनुदान दिया जाएगा, जो अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंचता है।

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सहायता योजना का लाभ उठाने के लिए जमीन के रकबे की एक निश्चित सीमा भी तय की गई है। कोई भी किसान न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर से लेकर अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की कृषि भूमि पर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकता है। इससे छोटे और मझोले स्तर पर प्रयोग करने वाले काश्तकारों के साथ-साथ अपेक्षाकृत बड़े रकबे पर काम करने वाले उत्पादकों को भी लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।

भूमिहीन और गैर-रैयत किसानों के लिए भी खुले हैं अवसर

इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें केवल वही किसान शामिल नहीं होंगे जिनके पास खुद की पुश्तैनी जमीन है। गैर-रैयत अथवा भूमिहीन किसान भी किसी अन्य व्यक्ति की जमीन लीज पर लेकर गेंदे की खेती का काम शुरू कर सकते हैं। इसके लिए आवेदनकर्ता किसान को वैध लीज एग्रीमेंट विभागीय अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा, यदि जमीन के मूल दस्तावेजों या जमाबंदी में आवेदक किसान का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, तो उन्हें अपनी वंशावली पेश करनी होगी। राजस्व व पात्रता से जुड़े इन दस्तावेजों की विधिवत जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित किसान को योजना की स्वीकृति और अनुदान राशि का लाभ प्रदान किया जाएगा।

रामगढ़ और चानन प्रखंड में 25 हेक्टेयर का क्लस्टर

फूलों के व्यवस्थित उत्पादन को संगठित रूप देने के लिए जिले में एक व्यापक क्लस्टर मॉडल पर काम शुरू किया जा रहा है। जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन के मुताबिक, कुल 25 हेक्टेयर के दायरे में इस योजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। इसके तहत लखीसराय के दो प्रमुख प्रखंडों, रामगढ़ और चानन, में विशेष फ्लावर विलेज विकसित करने की पुख्ता रूपरेखा बनाई गई है।

इस सघन क्लस्टर मॉडल के माध्यम से जिले में गेंदे की खेती का रकबा बढ़ाने के साथ-साथ बिक्री, विपणन और परिवहन को भी सुगम बनाने की रणनीति है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो रामगढ़ और चानन आने वाले दिनों में लखीसराय को आसपास के बाजारों के लिए फूलों के प्रमुख आपूर्ति केंद्र के रूप में उभार सकते हैं।

आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी कागजी औपचारिकताएं

योजना से जुड़ने के इच्छुक किसान उद्यान निदेशालय के अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण और आवेदन दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा किसान अपने नजदीकी प्रखंड उद्यान कार्यालय अथवा जिला उद्यान विभाग के अधिकारियों से सीधे संपर्क करके भी आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं।

आवेदन के दौरान किसानों को भूमि स्वामित्व, पहचान पत्र और बैंक विवरण से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने होंगे। गैर-रैयत किसानों के मामले में पंजीकृत लीज दस्तावेज और पैतृक भूमि में नाम की अस्पष्टता होने पर वैध वंशावली पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य रहेगा, जिससे योजना का क्रियान्वयन बिना किसी विवाद के सुचारु रूप से संपन्न हो सके।

सवाल-जवाब

लखीसराय में गेंदे की खेती के लिए सरकार कितना अनुदान दे रही है?
सरकार प्रति हेक्टेयर 80 हजार रुपये की निर्धारित लागत पर 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 40 हजार रुपये तक का अनुदान दे रही है।
इस योजना के तहत किसान न्यूनतम और अधिकतम कितनी जमीन पर लाभ ले सकते हैं?
किसान कम से कम 0.1 हेक्टेयर और अधिक से अधिक 2 हेक्टेयर तक की कृषि भूमि पर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
क्या बिना अपनी जमीन वाले किसान भी इस योजना में शामिल हो सकते हैं?
हां, गैर-रैयत या भूमिहीन किसान लीज एग्रीमेंट प्रस्तुत करके किसी अन्य की जमीन पर गेंदे की खेती के लिए इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
जमीन के दस्तावेजों में नाम स्पष्ट न होने पर क्या करना होगा?
यदि जमीन के कागजात में आवेदक का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, तो पात्रता सिद्ध करने के लिए वंशावली प्रस्तुत करनी होगी।
लखीसराय के किन प्रखंडों में फ्लावर विलेज विकसित किया जा रहा है?
जिले के रामगढ़ और चानन प्रखंड में 25 हेक्टेयर के क्लस्टर के तहत फ्लावर विलेज विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
किसान इस अनुदान योजना के लिए कहां और कैसे आवेदन कर सकते हैं?
किसान उद्यान निदेशालय के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से या फिर अपने प्रखंड अथवा जिला उद्यान विभाग कार्यालय में संपर्क करके आवेदन कर सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

किसानों के लिए बढ़िया मौका है, गेंदे की खेती से कमाई बढ़ेगी और सरकार की आधी मदद मिलने से लागत की चिंता भी कम होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले साल जब मैं बाराबंकी के खेतों में गया था, तब किसानों ने बताया था कि फूलों की खेती से उनकी आमदनी पारंपरिक फसलों से काफी बेहतर हो जाती है।

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