मूलांक 4 दैनिक राशिफल 11 अक्टूबर 2026: लीक से हटकर सोच से बनेंगे काम, जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचेंराजस्थान के दो स्कूली बच्चों ने रचा इतिहास, 100 दिनों में हाथों से लिख डाले 100 उपनिषदशारदीय नवरात्र पर चित्तौड़गढ़ के देवी धामों में उमड़ी भारी भीड़, कालिका माता के दरबार में लगी लंबी कतारेंबारां में प्रेमी संग गई तीन बच्चों की मां, आक्रोशित ससुराल वालों ने जीते जी कर दिया श्राद्धबारां में रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में मिली लावारिस नवजात बच्ची, दो माह में तीसरा मामला सामने आने पर कोतवाली में प्राथमिकी दर्जअंबाला शहर को नाम देने वाले 300 साल पुराने मां अंबिका देवी मंदिर में नवरात्रि पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़खाटूश्याम जी मंदिर के कपाट 19 घंटे के लिए रहेंगे बंद, 14 अक्टूबर शाम 5 बजे से फिर होंगे दर्शनराजस्थान के विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने खाटूश्यामजी मंदिर में की पूजा, प्रदेश के लिए मांगा आशीर्वादजेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने की चर्चा से विस्थापितों में आक्रोश, नौकरी और जमीन रजिस्ट्री के अधूरे वादों पर भड़का गुस्साबकरियों को रोजाना खुले में चराने से बढ़ता है वजन और प्रजनन दर, पशु विशेषज्ञ ने बताए बड़े फायदे
दुनिया भर में हर साल 1.2 करोड़ नाबालिगों की शादियां, बाल विवाह के खात्मे के लिए वैश्विक मंच पर उठी भारत की सशक्त मांगबिहार
11 अक्तू॰ 2026, 10:11 am (32 मिनट पहले)· 0

दुनिया भर में हर साल 1.2 करोड़ नाबालिगों की शादियां, बाल विवाह के खात्मे के लिए वैश्विक मंच पर उठी भारत की सशक्त मांग

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया में हर तीन सेकंड में एक बच्ची बाल विवाह की भेंट चढ़ जाती है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता के प्रयासों से 27 नवंबर को विशेष अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया है।

किताबों और खेलकूद की उम्र में गृहस्थी का बोझ उठाना आज भी दुनिया के कई इलाकों में अनगिनत मासूमों की कड़वी हकीकत बना हुआ है। जब किसी बच्ची से बिना उसकी रजामंदी जाने कम उम्र में ही शादी के बंधन में बांध दिया जाता है, तो असल में उससे उसका बुनियादी हक, स्कूली शिक्षा, बेहतर सेहत और खुद फैसले लेने की पूरी आजादी छिन जाती है। 11 अक्टूबर के दिन मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस समाज को इसी विकराल चुनौती की ओर देखने और ठोस कदम उठाने का संदेश देता है।

नाबालिग उम्र में विवाह के भयावह वैश्विक आंकड़े

इस वर्ष का अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मुख्य रूप से नाबालिगों के विवाह को पूरी तरह समाप्त करने और बेटियों के कानूनी अधिकारों में संसाधन लगाने पर केंद्रित है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किए गए तथ्य इस सामाजिक संकट की भयावहता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। धरती पर सालाना 1.2 करोड़ से भी अधिक कन्याओं का विवाह 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पूर्व ही करवा दिया जाता है। इसका सीधा गणित यह निकलता है कि प्रत्येक 3 सेकंड की अवधि में एक मासूम बच्ची को जबरिया पारिवारिक जिम्मेदारियों में धकेल दिया जाता है। दुनिया के तमाम मुल्कों में बने कड़े कानूनों और नियमों के बावजूद यह कुरीति समाज में गहरी जड़ें जमाए बैठी है।

ये भी पढ़ें

शादी रोकने से आगे पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की जरूरत

कम उम्र में बेटियों का ब्याह कर देना सिर्फ आर्थिक तंगी या रूढ़िवादी मान्यताओं का परिणाम भर नहीं है। कमसिन उम्र का यह बंधन युवतियों के सुनहरे कल को हमेशा के लिए छीन लेता है और उन्हें जीवन भर आर्थिक निर्भरता, अवांछित मातृत्व और घरेलू प्रताड़ना के गहरे संकट की ओर धकेल देता है। केवल रस्मों को रुकवा देना या विवाह मंडप से नाबालिग को बचा लेना ही समाधान नहीं है। असल परीक्षा उस वक्त सामने आती है जब उस कन्या के आगे के जीवन को एक सकारात्मक दिशा देनी होती है। समाज और तंत्र के सामने सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि क्या उस बच्ची को दोबारा स्कूल भेजा जा सका और क्या उसे स्वावलंबी बनने के जरूरी साधन मिले।

वैश्विक पटल पर भारत की मुहिम और 27 नवंबर का फैसला

इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के अभियान में वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रयासों ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक और बच्चों के अधिकारों के पैरोकार अधिवक्ता भुवन रिभु ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस कुप्रथा को समाप्त करने हेतु एक समर्पित दिवस तय करने की मजबूत वकालत की थी। कई राष्ट्रों के सक्रिय समर्थन और इस निरंतर पहल के फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 27 नवंबर की तारीख को बाल और जबरन विवाह के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के तौर पर मनाने का प्रस्ताव औपचारिक रूप से पारित किया।

कानूनी सख्ती और व्यापक सामाजिक बदलाव की दिशा

अधिवक्ता भुवन रिभु का मानना है कि बाल सुरक्षा को अलग-थलग कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, “कानून का असली मकसद सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित भविष्य देना है।” इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीतिगत फैसलों, मजबूत प्रशासनिक तंत्र, अधिकारियों की कार्यकुशलता, स्थानीय समाज की सीधी भागीदारी, आर्थिक सहायता और नई तकनीकों का समन्वित उपयोग अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस यह याद दिलाता है कि किसी भी कन्या का भाग्य उसकी उम्र या लिंग से तय नहीं होना चाहिए। इस कुप्रथा का अंत उसी दिन मुमकिन होगा जब समाज रूढ़ियों को त्यागकर बेटियों की शिक्षा और उनके सपनों को सबसे आगे रखेगा।

सवाल-जवाब

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस किस तारीख को मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस प्रतिवर्ष 11 अक्टूबर को मनाया जाता है।
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की मुख्य थीम क्या है?
इस वर्ष की थीम बाल विवाह को समाप्त करना और लड़कियों के अधिकारों में निवेश करना है।
दुनिया भर में हर साल कितनी लड़कियों का बाल विवाह होता है?
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हर साल 1.2 करोड़ से अधिक लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले कर दी जाती है।
संयुक्त राष्ट्र ने बाल और जबरन विवाह के खिलाफ कौन सा नया अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया है?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 27 नवंबर को बाल और जबरन विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया है।
संयुक्त राष्ट्र में इस विशेष दिवस की मांग किसने रखी थी?
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक और बाल अधिकार अधिवक्ता भुवन रिभु ने यह मांग रखी थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 मिनट पहले

हर तीन सेकंड में एक बच्ची की शादी होना बेहद डरावना आंकड़ा है। मंडप से उठाकर सिर्फ घर ले आना काफी नहीं, जब तक उसे दोबारा स्कूल न भेजा जाए, तब तक कुछ नहीं बदला।

Karan Malhotra@karan-malhotra·अभी

रोहन, तुम्हारी बात बिल्कुल सही है। जब मैं एक मामले की जाँच के सिलसिले में गया था, तो मैंने देखा कि छुड़ाई गई बच्ची स्कूल जाने के लिए रो रही थी, पर समाज उसे अपनाने को तैयार नहीं था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp