बिहार की राजधानी पटना में एक आम किसान के खेत में उस समय इतिहास जीवंत हो उठा, जब मिट्टी की खुदाई के दौरान एक प्राचीन खजाना बाहर निकल आया। फुलवारी शरीफ इलाके के कुर्जी मोहम्मदपुर गांव में एक किसान अपने खेत की मेढ़ ठीक कर रहा था, तभी उसकी कुदाल जमीन के नीचे छिपी भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की प्राचीन काले पत्थर की मूर्तियों से टकराई। मिट्टी से सनी इन मूर्तियों की नक्काशी और बनावट को देखकर स्थानीय जानकारों का मानना है कि ये पाल वंश के काल की हैं, जिससे इनकी उम्र लगभग 1250 साल आंकी जा रही है। इस अचानक हुई खोज ने गांव के एक शांत खेत को आस्था के एक बड़े केंद्र में बदल दिया है, जहां आसपास के इलाकों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, और अब इस जगह की औपचारिक पुरातात्विक जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।
खेत में खुदाई के दौरान हुआ चमत्कार
यह पूरी घटना फुलवारी शरीफ के कुर्जी मोहम्मदपुर गांव में घटी, जिसने रातों-रात पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। स्थानीय किसान अजीत भारती अपने कृषि भूमि पर काम कर रहे थे और खेत की मेढ़ बना रहे थे। उन्होंने बताया कि साफ-सफाई करने और कुदाल से मिट्टी हटाने के दौरान अचानक जमीन के नीचे से कुछ खट-खट की आवाज आई, जैसे लोहा किसी कठोर पत्थर से टकराया हो। जब उन्होंने उस जगह पर ध्यान से देखा, तो उन्हें काले रंग के पत्थर जैसी कोई चीज नजर आई। उत्सुकता में आकर उन्होंने हाथों से और मिट्टी हटाई, तो सबसे पहले एक छोटी सी मूर्ति बाहर निकल कर आई। इसके बाद उन्होंने और गहराई में सावधानी से खुदाई की, तो एक के बाद एक बड़ी मूर्तियां भी मिट्टी से बाहर आने लगीं। इस घटना की खबर गांव में आग की तरह फैल गई, जिसके बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और सबने मिलकर बाकी मूर्तियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
पीढ़ियों से पूजी जा रही है यह जगह
कुर्जी मोहम्मदपुर के ग्रामीणों के लिए जमीन के नीचे से मूर्तियों का निकलना केवल एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह उनकी पीढ़ियों पुरानी आस्था का एक साक्षात प्रमाण है। जिस जगह से यह ऐतिहासिक मूर्तियां प्राप्त हुई हैं, उसे गांव के लोग दशकों से एक पवित्र और धार्मिक स्थल मानते आए हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वे लोग इस स्थान को 'अन्नकुड़ी बाबा' के नाम से पूजते हैं। गांव में यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है कि किसी भी घर में शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या कोई भी अन्य शुभ काम होने पर सबसे पहला निमंत्रण पत्र इसी जगह पर लाकर चढ़ाया जाता है। इस स्थान के प्रति लोगों के मन में इतना गहरा सम्मान था कि पूर्वजों के समय से ही इस हिस्से को कभी भी पूरी तरह से जोता नहीं गया था। अब मूर्तियों के प्रकट होने के बाद लोगों का विश्वास और भी मजबूत हो गया है कि वे जिस जगह की पूजा करते थे, वहां वास्तव में एक दैवीय ऊर्जा का वास है।
पालकालीन वास्तुकला का शानदार नमूना
मिट्टी और धूल साफ होने के बाद जब मूर्तियों का वास्तविक स्वरूप सामने आया, तो हर कोई इनकी सुंदरता देखकर हैरान रह गया। खुदाई में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की बेहद आकर्षक और सुरक्षित प्रतिमाएं मिली हैं, जबकि भगवान शिव की एक मूर्ति का ऊपरी हिस्सा भी बरामद हुआ है। यह सभी मूर्तियां काले पत्थर से तराशी गई हैं, जो उस दौर की एक प्रमुख पहचान हुआ करती थी। मूर्तियों पर बने मुकुट, देवी-देवताओं के आभूषण और उनकी बारीक शिल्पकला उस समय के कलाकारों की अद्भुत क्षमता को दर्शाती है। इन मूर्तियों की बनावट और कला शैली को देखकर स्थानीय स्तर पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह पाल वंश के शासनकाल की हो सकती हैं। पाल साम्राज्य का प्रभाव 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच रहा था। अगर विशेषज्ञ इस अनुमान की पुष्टि करते हैं, तो इसका सीधा अर्थ यह होगा कि खेत से निकली ये धरोहरें करीब 1250 साल पुरानी हैं, जो बिहार के समृद्ध इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
पुरातत्व विभाग से सर्वेक्षण की मांग
इस खोज के बाद कुर्जी मोहम्मदपुर का माहौल पूरी तरह से बदल गया है और यह जगह एक अस्थायी मंदिर में तब्दील हो गई है। प्राचीन देवी-देवताओं के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भारी संख्या में ग्रामीण और दूर-दराज से लोग लगातार यहां पहुंच रहे हैं। लेकिन धार्मिक उत्साह के साथ-साथ इस खोज ने एक बड़ी उत्सुकता को भी जन्म दिया है। स्थानीय लोगों को अब यह पूरी उम्मीद है कि जिस जमीन के नीचे से यह मूर्तियां निकली हैं, वहां जरूर किसी प्राचीन मंदिर या बड़े धार्मिक परिसर के अवशेष दबे हो सकते हैं। इसे देखते हुए गांव वालों ने सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से अपील की है कि इस पूरे इलाके का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराया जाए। लोगों की मांग है कि विशेषज्ञ इन मूर्तियों की सटीक उम्र का पता लगाएं और इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाएं, ताकि इसके पीछे छिपे सही इतिहास को दुनिया के सामने लाया जा सके।




















