ओडिशा के मयूरभंज जिले में प्राकृतिक आपदा और अचानक हुए हादसे के मेल ने एक हंसते खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। बारीपदा शहर के मधुबन इलाके में बाढ़ के पानी से घिरा एक परिवार उस समय गहरे सदमे में डूब गया, जब उनका 11 साल का बेटा घर की मदद के लिए राहत सामग्री लेने निकला और फिर कभी सुरक्षित वापस नहीं लौट सका। पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले मासूम बादल पात्र के सिर पर रास्ते में एक नारियल गिर गया, जिसके बाद इलाज के दौरान अस्पताल में उसकी मौत हो गई। बाढ़ के कहर के बीच इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र के लोगों को स्तब्ध कर दिया है।
राहत केंद्र से लौटते समय हुआ हादसा
बुधवार के दिन घटी यह घटना मयूरभंज क्षेत्र में आई बाढ़ की पृष्ठभूमि से जुड़ी है। भारी बारिश के चलते नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से बादल पात्र का घर पूरी तरह से पानी में डूब गया था। परिवार के पास खाने-पीने और गुजर-बसर की बुनियादी चीजों का संकट खड़ा हो गया था। इसी मुश्किल परिस्थिति में परिवार को थोड़ी राहत पहुंचाने के मकसद से 11 वर्षीय बादल खुद राहत सामग्री लेने के लिए स्थानीय राहत वितरण केंद्र की ओर रवाना हुआ था।
राहत केंद्र से आवश्यक सामग्री प्राप्त करने के बाद बादल अपने घर की ओर पैदल ही लौट रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब वह मधुबन इलाके में स्थित पाल बाबू के मकान के सामने से गुजर रहा था, तभी वहां मौजूद एक लंबे नारियल के पेड़ से अचानक एक नारियल टूट कर सीधे उसके सिर पर आ गिरा। तेज गति से गिरे भारी नारियल की चोट इतनी भीषण थी कि बादल मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया।
स्थानीय अस्पताल से मेडिकल कॉलेज तक की मशक्कत
घटना के तुरंत बाद आसपास के लोगों और परिजनों ने घायल बादल को संभाला। बच्चे ने किसी तरह अपने माता-पिता को सिर में लगी गंभीर चोट के बारे में जानकारी दी थी। परिजन बिना कोई वक्त गंवाए उसे नजदीकी स्थानीय चिकित्सा केंद्र ले गए। वहां डॉक्टरों ने उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया और बेहतर इलाज के लिए पीआरएम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने की सलाह दी।
पीआरएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने मासूम को बचाने के लिए हर संभव चिकित्सकीय प्रयास किए। बच्चे के सिर में अंदरूनी चोट बेहद गहरी थी, जिसके कारण उसकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी। स्थिति बिगड़ने पर उसे आगे के इलाज के लिए रंगमाटिया अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों और दवाओं के बावजूद बादल की जान नहीं बचाई जा सकी और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल के चिकित्सकों ने अंततः उसे मृत घोषित कर दिया।
पिता का छलका दर्द और परिजनों की दास्तान
मासूम बेटे को खोने के बाद पिता अजय पात्रा का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने दुख को साझा करते हुए अजय पात्रा ने बताया, "हमारे घर में बाढ़ का पानी घुस गया। मेरा बेटा रिलीफ सामग्री लाने के लिए गया था। लौटते वक्त पाल बाबू के घर के सामने के नारियल के पेड़ से नारियल गिर गया।"
अजय पात्रा ने आगे बताया कि नारियल लगने के बाद बेटा किसी तरह घर पहुंचा और सिर में बहुत तेज दर्द तथा चोट लगने की बात कही। इसके बाद पूरा परिवार घबरा गया और उसे तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया। वहां से प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की हालत को देखते हुए रंगमाटिया अस्पताल रेफर कर दिया, जहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक तरफ बाढ़ की विभीषिका से घर-बार डूब जाने का गम था और दूसरी तरफ परिवार के चिराग के बुझ जाने से पात्रा परिवार पूरी तरह टूट चुका है।
क्षेत्र में शोक का माहौल और हालिया हादसे
पांचवीं कक्षा के होनहार छात्र बादल पात्र की इस तरह अचानक हुई दर्दनाक मौत की खबर जैसे ही मधुबन इलाके में फैली, पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। बाढ़ के संकट से जूझ रहे स्थानीय नागरिक इस मासूम की मौत की खबर सुनकर गहरे शोक में डूब गए हैं। पड़ोसियों का कहना है कि बादल अपने परिवार का बहुत जिम्मेदार बच्चा था और संकट के समय अपने माता-पिता का हाथ बंटाने के लिए ही राहत सामग्री लेने गया था।
उल्लेखनीय है कि ओडिशा में मासूम बच्चों के साथ अचानक होने वाले जानलेवा हादसों की यह कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले राज्य के पूरी जिले में भी एक दर्दनाक दुर्घटना सामने आई थी, जहां फूल तोड़ने गई एक छोटी बच्ची लोहे की ग्रिल पर गिर पड़ी थी। उस हादसे में लोहे का सरिया बच्ची की हथेली आर-पार भेद गया था, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में एम्स अस्पताल ले जाना पड़ा था जहां डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी करके सरिया बाहर निकाला था। मयूरभंज में घटी इस नई घटना ने एक बार फिर से बच्चों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थलों पर मौजूद प्राकृतिक खतरों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





















